“अब नाटो नहीं QUAD जरूरी”, QUAD होगा औपचारिक क्योंकि अमेरिका के लिए रूस से बड़ा खतरा चीन है

QUAD नहीं, चीन के खिलाफ ये चतुरंगिनी सेना है

QUAD

कोरोना वायरस के दुनिया भर में फैलने के बाद अब वैश्विक व्यवस्था के समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं। एक बार फिर विश्व bipolar यानि द्विपक्षीय हो चुका है। एक ओर विश्व का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका है, तो दूसरी तरफ है कोरोना का जनक और इस समय पूरे एशिया और हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में कब्ज़ा जमाने की नीयत से जुटा हुआ चीन। इस कूटनीतिक घमासान के बीच अमेरिका ने तय कर लिया है कि चीन की मनमानी अब और नहीं चलेगी। इसी को देखते वह QUAD गुट को एक औपचारिक संगठन का रूप देने में जुट गया है, जो आगे चलकर संभवत: NATO की जगह भी ले सकता है।

ये हम नहीं कह रहे, बल्कि अमेरिका की वर्तमान गतिविधियां ही इस ओर संकेत दे रही हैं। कोरियाई न्यूज़ पोर्टल Yonhap News Agency की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के प्रमुख राजनायिकों में से एक और वर्तमान उप विदेशमंत्री स्टीफेन बीगन ने हाल ही में India US Strategic Partnership Forum के मंच से इस बात पर जोर दिया कि, कैसे हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में एक सशक्त संगठन की आवश्यकता है। बीगन के अनुसार, “इसमें कोई दो राय नहीं है कि, हिन्द प्रशांत क्षेत्र में सशक्त बहुपक्षीय संगठनों की भारी कमी है। यहाँ NATO या यूरोपीय संघ जैसा कुछ भी नहीं है।”

लेकिन बीगन इतने पर ही नहीं रुके। बातों ही बातों में उन्होंने इस बात की ओर संकेत दिया कि, इस समय हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में केवल NATO जैसे संगठन की ही आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसे विस्तार देने की भी उतनी ही आवश्यकता है। इसका अर्थ स्पष्ट है- QUAD गुट सिर्फ एक साझेदारी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि NATO की तर्ज पर एक सशक्त संगठन बनेगा। संभव है कि, QUAD का साथ देने के लिए दक्षिण कोरिया और वियतनाम जैसे देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो आने वाले समय में यही QUAD नाटो की जगह भी ले सकता है।

यूं तो QUAD साझेदारी की नींव बहुत पहले ही पड़ चुकी थी, लेकिन ये पहली बार है जब अमेरिका ने इस साझेदारी को एक आधारभूत ढांचा देने की बात सार्वजनिक तौर पर की है। जुलाई महीने में इसी ओर संकेत देते हुए यूरेशियन टाइम्स ने एक लेख छापा था, जिसका शीर्षक था चीन का सबसे बड़ा दुस्वप्न QUAD जल्द ही एक हकीकत बनेगा”। इस लेख में उन्होंने अमेरिका, जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले नौसेना युद्ध अभ्यास को ध्यान में रखते हुए अपने विचार प्रकट किए थे।

इसी रिपोर्ट के एक अंश में हडसन संस्थान के एशिया-पैसिफिक विभाग के प्रमुख पैट्रिक क्रोनिन ने लिखा था, “हिन्द प्रशांत में हो रहे अंतर्राष्ट्रीय नौसैनिक युद्ध अभ्यास इस बात का प्रमाण है कि किस प्रकार भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान आपसी शंकाओं को अलग रखते हुए एक मंच पर साथ आए हैं।”

इस विषय पर भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अफसर और नेवल इंटेलिजेंस के पूर्व अध्यक्ष, रियर एडमिरल सुदर्शन श्रीखंडे का कहना है, QUAD आगे चलकर एक सशक्त संगठन में विकसित हो सकता है, जिसमें और भी पड़ोसी और मित्र देश शामिल हो सकेंगे इस बात में अब कोई संदेह नहीं है कि अब चीन की जी हुज़ूरी से कोई काम नहीं चलने वाला। यह भी हो सकता है कि QUAD का जब विस्तार हो, तो ASEAN  के सदस्यों को शामिल कर चीन को बैकफुट पर लाया जा सकता है।

अब QUAD को एक आधिकारिक संगठन के तौर पर कब लॉन्च किया जाता है, ये तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन इसकी सूचना मात्र से ही चीन के चहरे की हवाइयाँ उड़ने लगी है। ग्लोबल टाइम्स में तो एक पूरा लेख ही इस विषय पर लिखा गया है कि, यह योजना पूरी तरह असफल होगी। चीन का ये मिमियाना तब हो रहा है जब अभी तक QUAD को औपचारिक तौर पर एक संगठन बनाया भी नहीं गया है। इससे स्पष्ट पता चलता है कि, यदि QUAD एक औपचारिक संगठन के तौर पर सफलतापूर्वक स्थापित हुआ, तो हिन्द-प्रशांत क्षेत्र पर चीन के बढ़ते प्रभाव को नष्ट होने में एक पल भी नहीं लगेगा।

Exit mobile version