‘ऑपरेशन सनराइज़’ से कैसे म्यांमार कर रहा है चीन के नापाक इरादो का ‘सूर्यास्त’

चीन के छल को म्यांमार के ‘ऑपरेशन सनराइज़’ ने दी मात!

म्यांमार

कहते हैं दोस्त वही, जो मुसीबत में काम आए, और जिस प्रकार से म्यांमार ने हाल ही में भारत को एक बहुत बड़े संकट से बचाया है, उससे यह कहावत उस पर शत-प्रतिशत सटीक बैठती है। हाल ही में म्यांमार ने चीन द्वारा पूर्वोत्तर भारत में तांडव मचाने की योजना पर कार्रवाई करते हुए जबरदस्त पानी फेरा है।

हाल ही में म्यांमार प्रशासन ने आतंकियों के विरुद्ध एक अहम कार्रवाई में ऑपरेशन सनराइज़ 3 को प्रारंभ किया है। ज़ी न्यूज के रिपोर्ट के अनुसार, “म्यांमार सेना की विशेष यूनिट्स NSCN [K], अलगाववादियों को ढूंढ निकालने के लिए इन दिनों Sagaing क्षेत्र में कॉम्बिंग ऑपरेशन कर रही हैं। मणिपुर नदी के पूर्वी क्षेत्र के आसपास भी म्यांमार सेना के infantry यूनिट्स काफ़ी सक्रिय है।”

ऑपरेशन सनराइज़ 3 को अंजाम देने के पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि, भारत और म्यांमार की खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली है कि चीन समर्थित अलगाववादी पूर्वोत्तर भारत में त्राहिमाम मचाने के लिए म्यांमार को अपना launchpad बनाना चाहते हैं, और वे म्यांमार के उक्त क्षेत्र [Sagaing] के रास्ते मिजोरम राज्य में घुसपैठ करना चाहते हैं। चूंकि, यह ऑपरेशन विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला और भारतीय थलसेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नारावने के म्यांमार दौरे के ठीक बाद हुआ है, इसीलिए यह ऑपरेशन और भी महत्व रखता है।

अब NSCNK समेत कई आतंकी गुटों का चीन द्वारा उक्त क्षेत्र में समर्थन इसलिए भी भारत के लिए हानिकारक है क्योंकि मिज़ोरम राज्य के निकट ही भारत और म्यांमार द्वारा संयुक्त रूप से कालादान प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है। कालादान का मल्टी मॉडल ट्रांसिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट, दक्षिण पूर्वी एशिया की दृष्टि से भारत के लिए द्वार खोल देगा। ये प्रोजेक्ट भारत को म्यांमार के रखाइन राज्य में स्थित सिटवे बंदरगाह से जोड़ेगा, और भारत की जिम्मेदारी है कि भारतीय क्षेत्र में इस प्रोजेक्ट को Zorinpui में स्थित अंतर्राष्ट्रीय सीमा से Aizawl –Saiha के राष्ट्रीय राजमार्ग को 90 किलोमीटर की दूरी तक विस्तृत करना।

और यदि ऐसा होता है, तो भारत की चीन पर से निर्भरता कम हो जाएगी, और दक्षिण एशिया के साथ-साथ दक्षिणपूर्वी एशिया में भी चीन का वर्चस्व खतरे में आ जाएगा। इसीलिए वह कालादान प्रोजेक्ट पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए हुए है। रखाइन स्थित अराकान आर्मी को वित्तीय सहायता देकर चीन ने इस प्रोजेक्ट को ध्वस्त करने का हर संभव प्रयास किया है। जब ग्लोबल टाइम्स के एडिटर हू शीजिन ने भारत को धमकाते हुए कहा था कि ताइवान में ‘हस्तक्षेप’ के बदले चीन पूर्वोत्तर भारत में अलगाववाद को बढ़ावा दे सकता है, तो वे संभवतः इसी ओर इशारा कर रहे थे।

लेकिन भारत और म्यांमार भी हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठे है। 17 मार्च से 2 मार्च और फिर 16 मई को दो भाग में ‘ऑपरेशन सनराइज़’ के प्रारम्भिक भागों को अंजाम दिया गया, जिससे भारत और म्यांमार के लिए खतरा बन रहे आतंकी गुटों का काफी हद तक सफाया किया गया। यह ऑपरेशन काफी सफल रहा, परंतु म्यांमार की सेना को ऑपरेशन के दूसरे भाग में काफी नुकसान उठाना पड़ा।

ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि भारत के लिए एक सच्चे पड़ोसी का धर्म निभाते हुए म्यांमार ने चीन के नापाक इरादों पर जबरदस्त पानी फेरा है। जिस प्रकार से भारत और म्यांमार आतंकवाद और चीन के दोहरे खतरे के विरुद्ध सीना तान कर खड़े हैं, उसे देखते हुए यही लगता है कि अब आने वाले दिनों में आतंकियों और उनके चीनी आकाओं की मुसीबतें बहुत बढ़ने वाली है।

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