यूरोप के संसद से चीन समर्थकों को बाहर करने की मांग हुई तेज

जानिए, कैसे चीन के प्रभाव से मुक्त होगी यूरोपीय संसद

यूरोप

यूरोप की संसद में शुरू से ही चीन का प्रभाव बेहद ज़्यादा रहा है। कोरोना के बाद यूरोप का चीन प्रेम खुलकर सामने आया था और तब हर मुद्दे पर यूरोप चीन का पक्ष लेता ही नज़र आ रहा था। यहाँ तक कि कोरोना के बाद जब एक रिपोर्ट में यूरोपियन यूनियन ने कोरोना की handling को लेकर चीन की आलोचना की थी, तो चीन ने यूरोप और उसके सांसदों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए उस रिपोर्ट को ही संशोधित करवा दिया था। हालांकि, अब जैसे-जैसे आर्थिक और सुरक्षा मुद्दों पर यूरोप और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे सब यूरोप की संसद में से चीन के प्रभाव वाले सांसदों को बाहर किए जाने की मांग भी की जाने लगी है। इसका मकसद सिर्फ एक ही है, कैसे भी करके यूरोपियन यूनियन की संसद को चाइना-फ्री करना!

यूरोप की संसद में कई ऐसे “friendship groups” हैं, जो यूरोप और दुनिया के कई देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए काम करते हैं। ऐसा ही एक चीन का friendship group भी है, जिसके नेता Jan Zahradil हैं। हैरानी की बात तो यह है कि Zahradil EU की शक्तिशाली ट्रेडिंग बॉडी के उपाध्यक्ष भी हैं। इसके साथ ही एक चीनी नागरिक Gai-Lin इस group के सचिव हैं जो पिछले एक दशक में ना जाने कितने ही EU सांसदों की चीन यात्रा का प्रबंध कर चुके हैं। ऐसे वक्त में जब EU और चीन के बीच व्यापार समझौते को लेकर तनाव चल रहा है, तो Zahradil का खेमा EU में चीन के एजेंडे को आगे बढ़ाने के भरसक प्रयास कर रहा है। शायद यही कारण है कि अब Zahradil और उनकी गैंग अब अमेरिका-समर्थक EU सांसदों के रेडार पर आ चुकी है।

अमेरिका की तरफ झुकाव रखने वाले सांसदों, think tanks और नीतिकारों का यह आरोप है कि Zahradil अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बेहद महत्वपूर्ण व्यापार वार्ताओं में चीन की तरफ से खेल रहे हैं, और ऐसे में वे EU के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं। Zahradil ट्रेडिंग बॉडी के उपाध्यक्ष होने के नाते EU के व्यापार संबंधी खूफिया सूचना और जानकारी तक पहुँच रखते हैं और यही कारण है कि कुछ सांसद अब उनपर अपने पद को त्यागने का दबाव बना रहे हैं।

Zahradil के कारण अब पूरा EU-China friendship group ही शक की निगाहों में आ गया है। इस group की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी। इसके बाद से ही यह group चीनी सरकार के खर्चे पर कई EU के सांसदों को चीन का दौरा करा चुका है और सांसदों की चीनी सरकार के कई संगठनों से मुलाकात करा चुका है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह group EU में चीन के एजेंडे को आगे बढ़ाता रहा है, लेकिन अब यह आरोप लग रहे हैं कि यह group EU के हितों के खिलाफ काम करने लगा है।

कोरोना से पहले चीन और यूरोप के संबंध बेहद मजबूत थे और दोनों ही एक व्यापार समझौते को पक्का करने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, अब जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में बढ़ रही चीनी-विरोधी मानसिकता के कारण चीन के लिए मुश्किलें पैदा होना शुरू हो गयी हैं। उदाहरण के लिए जर्मन चांसलर एंजेला मर्कल ने हाल ही में कहा था कि अगर चीन अपने मार्केट को यूरोपियन कंपनियों के लिए नहीं खोलता है तो बदले में यूरोप भी चीनी कंपनियों पर प्रतिबंधों का ऐलान कर सकता है।

यूरोप और खासकर जर्मनी जैसे देश अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बने रहने के लिए अब चीन के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं और इसी कड़ी में अब यूरोप की संसद को चाइना-फ्री करने की मुहिम ज़ोर पकड़ने लगी है।

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