जिनपिंग अब नये IPO सिस्टम के जरिये देश में धनी व्यापारियों को नियंत्रित करेंगे

दूसरा जैक मा चीन में अब देखने को नहीं मिलेगा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का चीन के अमीर व्यापारियों से डर अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। अलीबाबा के संस्थापक और चीन के सबसे लोकप्रिय अरबपति जैक मा के साथ अपने विवाद के बाद, जिनपिंग अब यह सुनिश्चित करने के अभियान पर लग चुके हैं कि कोई भी चीनी कंपनी सार्वजनिक रूप से इतनी अमीर न हो जाए कि वो CCP को चुनौती दे सके। यह उनकी उसी योजना का एक हिस्सा है जिससे वे किसी भी कंपनी को अलीबाबा जैसी बड़ी कंपनी या किसी अन्य व्यवसायी को जैक मा नहीं बनने देना चाहते हैं।

दरअसल, शी जिनपिंग अब अनौपचारिक तरीके और मनमानी ढंग से विनियमन प्रतिबंधों के माध्यम से चीन के पंजीकरण-आधारित आईपीओ प्रणाली को कमजोर कर रहे हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि जिनपिंग प्रशासन अब यह सुनिश्चित कर रहा है कि चीन में किसी भी कंपनी के लिए स्टॉक लिस्टिंग के माध्यम से पूंजी जुटाना अब आसान नहीं होगा।

पंजीकरण-आधारित आईपीओ प्रणाली एक नया प्रयोग था जिसे 2013 के नवंबर महीने की शुरुआत में चीनी नीति निर्माताओं ने अपनाया था। पिछले वर्ष, शंघाई के STAR Market ने इसे अपनाया था और इस साल के शुरू में, शेन्ज़ेन के ChiNext board ने भी नया आईपीओ सिस्टम अपनाया था।

पंजीकरण-आधारित आईपीओ चीन की सामान्य अनुमोदन-आधारित आईपीओ प्रणाली से अलग है, जिसमें कंपनियों की सख्त जांच होती है और इसी कारण चीनी सरकार का कंपनियों पर शिकंजा रहता है। चीन में सामान्य आईपीओ प्रणाली एक कठिन प्रणाली है जहां किसी संस्था को Public होने के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल प्राप्त करने से पहले उसे निरंतर लाभप्रदता की आवश्यकता होती है।

दूसरी ओर, पंजीकरण-आधारित आईपीओ अधिक पारदर्शी और बाजार के हिसाब से आसान है। एक बार, कंपनियां निवेशकों को अपने व्यवसाय के बारे में कुछ जानकारी देती हैं, उसके बाद उन्हें सार्वजनिक रूप से जाने की अनुमति होती है।

हालांकि, अब चीन में सब कुछ समाप्ती की ओर जा रहा है और शी जिनपिंग किसी भी कंपनी को आगे नहीं बढ़ने देने के लिए नए नए तरीके अपना रहे हैं। स्टॉक मार्केट लिस्टिंग में बाधा पैदा करने के लिए शी के प्रयासों के पहले संकेत तब सामने आए जब CCP ने अलीबाबा की फिनटेक यूनिट- Ant Group कंपनी के 37 बिलियन डॉलर मूल्य के आईपीओ को रोक दिया था। यह कार्रवाई सिर्फ जैक मा द्वारा CCP के एक सच को बताने के कारण किया गया था।

इसके बाद, अब चीनी नियामकों ने नई, पंजीकरण-आधारित आईपीओ प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों पर नई शर्तों की लिस्ट जारी की है। Caixin के अनुसार, ChiNext board  अब कई निवेश बैंकों को एक मार्गदर्शन दे रहा है। इसके तहत आईपीओ के लिए आवेदन करने वालों को यह बताया जा रहा है कि उन्होंने Public होने के लिए हाल के वर्ष में 50 मिलियन युआन ( 7.6 मिलियन डॉलर) का न्यूनतम शुद्ध लाभ दिखाना होगा।

जिनपिंग प्रशासन का संदेश स्पष्ट है- यदि आप एक छोटी फर्म हैं, तो आप छोटे ही बने रहेंगे। इस कारण से शंघाई के स्टार मार्केट और शेन्ज़ेन के ChiNext से भारी मात्रा में आईपीओ आवेदन रिजेक्ट हो रहे हैं। ChiNext चीन का एकमात्र स्टॉक एक्सचेंज बाजार है जिसने पंजीकरण-आधारित आईपीओ प्रणाली को अपनाया था।

ChiNext ने एक Jiangsu स्थित सॉफ़्टवेयर डेवलपर के आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। इस साल जून में पंजीकरण-आधारित IPO प्रणाली आने के बाद यह पहली अस्वीकृति थी। दूसरी ओर, स्टार मार्केट ने दो आवेदनों को खारिज कर दिया है- एक सितंबर में और दूसरा नवंबर में।

चीन की सरकार द्वारा किए गए कड़े नियामक जांच भी आईपीओ आवेदन प्रक्रिया को जटिल बनाने में भूमिका निभा रहे हैं। इससे चीन की छोटी-मोटी फर्मों को सार्वजनिक होने से और पूंजी जुटाने से रोकने में शी प्रशासन को मदद मिल रही है।

वहीं, चीन की China Securities Regulatory Commission (CSRC) भी निवेशकों की सुरक्षा के नाम पर चीनी कंपनियों के इस तरह के शिकंजे को सही ठहरा रही है। इसने कहा है कि , “सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनियों की गुणवत्ता में सुधार करना उनके सुपरवाइजिंग का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य होना चाहिए।” CSRC ने भी शंघाई तथा शेन्ज़ेन स्टॉक एक्सचेंजों को गेटकीपर की भूमिका निभाने और आईपीओ की अन्य प्रक्रियाओं के मामले में नियामक जिम्मेदारियों निभाने की सलाह दी है।

वास्तव में, चीन में और भी कंपनियों की डीलिस्टिंग हो सकती है और यह CSRC के उपाध्यक्ष Yan Qingmin के बयानों से स्पष्ट होता है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड में गंभीर रूप से धोखाधड़ी उन्हें डीलिस्ट करने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए।

इसका अर्थ यह हुआ कि अगर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) को लगता है कि एक कंपनी “गंभीर रूप से धोखाधड़ी” कर रही है और वह कंपनी पहले से ही चीनी बाजारों में सूचीबद्ध हैं, तो भी उन्हें बाहर निकाला जा सकता है। जिनपिंग प्रशासन न केवल चीनी कंपनियों के लिए IPO में सूचीबद्ध होने की प्रक्रिया को और अधिक कठिन बना रहा है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि कंपनियों के लिए IPO में सूचीबद्ध रहना ही एक बोझ बन जाए।

शी जिनपिंग पूरी तरह से चीन की निजी कंपनियों को अपने निशाने पर ले चुके हैं और अब उन्हें किसी भी तरह से काबू करने के लिए रोज नए हथकंडे अपना रहे हैं। अब उन्होंने कंपनियों को सार्वजनिक करने से रोकने का मन बना लिया है। इससे कंपनियां सार्वजनिक नहीं हो सकती हैं तथा अलीबाबा जितनी बड़ी कंपनी नहीं बन पायेॆगी, तथा वे शी जिनपिंग और सीसीपी के लिए कभी भी चुनौती नहीं बन सकती।

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