पहले Houthis से आतंकवादियों का टैग हटाया, अब उनसे युद्धविराम की भीख मांग रहे जो बाइडन

बाइडन

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने यमन गृहयुद्ध से अचानक हाथ खींच लिए और सऊदी अरब की मदद करने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर से प्रतिबंध हटाए, साथ ही ईरान के प्रति अमेरिकी नीति में ईरान के पक्ष में व्यापक बदलाव किए। किंतु इन सब के बाद भी बाइडन हूती विद्रोहियों को शस्त्र त्यागने और हिंसा बन्द करने के लिए नहीं मना पा रहे। अब तो ये हाल है कि अमेरिका को आधिकारिक रूप से हूती विद्रोहियों से शांति की अपील करनी पड़ रही है, लेकिन हूती अपना आक्रमण जारी रखे हैं।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्रिंस ने हूती विद्रोहियों को मरीब शहर पर आक्रमण बन्द करने, अपने सभी मिलिट्री ऑपरेशन खत्म करने, सऊदी अरब पर।सीमा पार से हमले बन्द करने और संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व वाले शांति समझौते में हिस्सा लेने का निवेदन किया है। बता दें कि मरीब यमन की राजधानी से 125 किलोमीटर दूर है। शहर पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन सरकार का कब्जा है और अगर यह शहर हाथ से निकला तो यह यमन सरकार और उसके सबसे बड़े सहयोगी सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका होगा।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्रिंस ने कहा “मरीब पर Houthis का आक्रमण, उसके एक धड़े का काम है, यह धड़ा नहीं चाहता कि यह गृहयुद्ध शांत हो, जो यमन के लोगों की जिंदगी दूभर कर रहा है।”

खबरों के मुताबिक यमन में अमेरिका के विशेष राजदूत बनाए गए टिमोथी लेंडरकिंग लगातार कोशिश में हैं कि कैसे भी हूती विद्रोहियों को बातचीत की टेबल पर लाया जाए। इसके लिए वे अनौपचारिक रूप से भी प्रयासरत हैं किंतु उन्हें कोई सफलता नहीं मिल रही। यदि हूती विद्रोही बातचीत के लिए नहीं मानते और संघर्ष जारी रखते हैं तो यह नवनिर्वाचित बाइडन प्रशासन की बड़ी कूटनीतिक हार होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि बाइडन हूती विद्रोहियों और उनके आका ईरान को खुश करने के लिए कई कदम उठा चुके हैं। जबकि उन्होंने क्षेत्र में अमेरिका के मुख्य सहयोगी सऊदी अरब का साथ छोड़ दिया है।

TFI  ने पहले भी रिपोर्ट में बताया है कि अमेरिका अपने सैनिकों को यमन की भूमि से वापस बुला रहा है। बाइडन ने कहा था ” यह युद्ध खत्म होना चाहिए। और इसके लिए हमारी प्रतिबद्धता को दिखाने के लिए, हम यमन में आक्रामक ऑपरेशन के लिए मिलने वाली सभी अमेरिकी मदद बन्द कर रहे हैं”।

अमेरिका ने ट्रम्प शासन के दौरान सऊदी अरब और उसके सहयोगियों को जो सैन्य उपकरण बेचने का फैसला किया था, बाइडन ने उसे भी पलट दिया। बाइडन ने यह सब इसलिए किया कि वह यमन युद्ध को किसी भी हाल में रोकना चाहते हैं। लेकिन अब जो हालात बन रहे हैं वह बताते हैं कि युद्ध बन्द होने के बजाए ईरान के पक्ष में झुकने लगा है।

बाइडन के निर्णय लगातार ईरान का मन बढ़ा रहे हैं। ट्रम्प के समय ईरान के प्रति Maximum Pressure की नीति थी। इसके तहत ईरान की अर्थव्यवस्था को ध्वस्त किया गया, क्षेत्र में ईरान की छद्म युद्ध की नीति को संचालित करने वाले मुख्य व्यक्ति सुलेमानी की हत्या की गई और अंततः ईरान के न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के मुख्य वैज्ञानिक की भी अज्ञात लोगों द्वारा हत्या की गई जिसके पीछे भी अमेरिका और इजराइल का हाथ माना जा रहा था।

बाइडन ने सत्ता में आते ही सबसे पहले क्षेत्र में जिन राजनायिकों की नियुक्ति की, और इजरायल के प्रति जो नीति अपनाई उसने ईरान की हिम्मत को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया। यही कारण है कि अब बाइडन को यमन समस्या सुलझाने में दिक्कत हो रही है। यमन गृहयुद्ध निश्चित रूप से बन्द होना चाहिए, उसका शांतिपूर्ण समाधान निकलना सबके विशेष रूप से यमन के लोगों के लिए बहुत अच्छा होगा। किंतु अब तक बाइडन जो नीति अपनाए हैं वह आदर्श भले हो, लेकिन व्यवहारिक नहीं है।

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