जगन सरकार अल्पसंख्यक तुष्टीकरण के एजेंडे के लिए आंध्र प्रदेश को ऋण जाल के गर्त में धकेल चुके हैं

ये आंध्र प्रदेश को कमजोर कर रहे हैं!

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‘उधार लो घी पियो’ इस कहावत को आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी सरकार ने पूर्णतः अपना लिया है, प्रदेश सरकार की इस नीति से मुख्य नुकसान देश की मोदी सरकार को हो रहा है, क्योंकि राजस्व में कमी के कारण राज्यों को केन्द्र सरकार द्वारा जो पैसा दिया जाता है, उसमें सर्वोच्च तीन में एक स्थान आंध्र का ही है। पिछले दो वर्षों में जगन सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र से इतना अधिक कर्ज ले लिया है कि अब आंध्र प्रदेश का राजस्व गर्त में है। ऐसा भी नहीं है कि इस कर्ज का जगन सरकार ने कोई विशेष उपयोग किया हो, क्योंकि राज्य सरकार ईसाईयों से लेकर मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के अंतर्गत ताबड़तोड़ कथित कल्याणकारी योजनाएं लागू कर रही हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ है।

दरअसल, मोदी सरकार द्वारा राज्यों को वित्त आयोग की सिफारिशों पर दी जाने वाली तीसरी किस्त जारी कर दी गई है, इस किस्त के अंतर्गत मोदी सरकार ने राज्यों को करीब 29,613 करोड़ रुपए दिए हैं, जिसमें मुख्य तौर पर केरल को करीब 4,972.74 करोड़ रुपए, दूसरे नबंर पर पश्चिम बंगाल को 4,401 करोड़ रुपए और आश्चर्यजनक रूप से आंध्र प्रदेश को करीब 4,314 करोड़ रुपए दिए गए हैं। ये तीनों ही राज्य गैर-बीजेपी या गैर एनडीए शासित हैं, जो इनकी अकर्मण्यता के कारण घटते राजस्व को प्रतिबिंबित करता है। केरल और बंगाल की स्थिति तो पहले ही बदतर है, किन्तु आंध्र प्रदेश में भी राजस्व की कमी की एक बड़ी वजह वहां की जगन सरकार की लचर नीतियों का प्रतीक है।

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आंध्र की बात करें तो वर्ष 2019 में सरकार बदलने के बाद से अब तक राज्य सरकर ने सार्वजनिक सेक्टर से लगभग 56 हजार करोड़ का लोन ले रखा है, जिसमें सबसे बड़ा लोन स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से लिया गया है, जो करीब 15 हजार करोड़ का है। महत्वपूर्ण बात ये भी है कि ये सारे खुलासे स्वयं आध्र प्रदेश की विधानसभा में वित्त मंत्री भागवत करात ने ही किए, जिसमें ये भी बताया गया है कि लोन का एक बड़ा हिस्सा आरबीआई द्वारा लिया गया है। इस वर्ष जून में ही राज्य सरकार ने आंध्र प्रदेश राजकीय स्टेट डेवलेपमेंड प्राधिकरण के जरिए करीब 18 हजार करोड़ रुपए लिए हैं।

कुल मिलाकर रिजर्व बैंक के अलावा  स्टेट बैंक और अन्य सभी बैंको से अब तक आंध्र सरकार ने 56 हजार करोड़ का लोन लिया है, जिसके चलते आंध्र प्रदेश का राजस्व नीचले स्तर पर जा चुका है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि इस रकम का खर्च राज्य सरकार ने कहा किया? ऐसे में राज्य की जगन सरकार के क्रियाकलापों को देखें तो ऐसी कई परियोजनाएं हैं जिनके अंतर्गत जगन सरकार ने आंध्र प्रदेश सरकार का राजस्व उड़ाया है, जिसमें मुस्लिम से लेकर ईसाईयों के तुष्टीकऱण से संबंधित योजनाओं की भरमार है। वहीं, सरकारी आंकड़े बताते हैं कि राज्य सरकार द्वारा करीब 48 हजार करोड़ रुपए पिछले दो वर्षों के दौरान केवल मुप्त की योजनाओं पर खर्च कर चुकी है. वही, जगन सरकार अभी करीब 50 हजार करोड़ रुपए का नया कर्ज लेने की तैयारी भी कर रही है।

टीएफआई ने हाल ही में आपको बताया था कि कैसे जगन सरकार मुस्लिम वक्फ बोर्ड की संपत्ति के लिए सरकारी पैसों का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही है। इसके तहत वक्फ बोर्ड की जमीन की सुरक्षा के लिए चारों ओर तैयार किए जाने वाली दीवारों का खर्च तथा होमगार्ड का वेतन आंध्र प्रदेश की सरकार देने वाली है। ये तो मात्र एक उदाहरण है, जबसे जगन ने राज्य की सत्ता अपने हाथ में ली है, तब से लगातार समाज कल्याण के नाम पर विशेष वर्गों के लोगों को सरकारी अनुदान दिया जा रहा है।

आंध्र प्रदेश सरकार ने अपने पहले ही बजट में पादरियों और मौलानाओं को सरकारी अनुदान देने के लिए एक बड़ा हिस्सा आवंटित किया था। अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं के नाम पर राज्य सरकार ने 2,106 करोड़ रुपए आवंटित किए पहले बजट में इमामों, मौलाना और पादरियों को 5000 से 10,000 रुपये मानदेय के रूप में देने के वादे को पूरा करते हुए इन सभी को सरकारी अनुदान दिलवाया। इसका नतीजा ये है कि इस नए खर्च के साथ ही राजस्व पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है किन्तु इन सब बातों से जगन सरकार को शायद कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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हम पहले ही बता चुके हैं कि कैसे राज्य में एससी-एसटी के लोगों द्वारा धर्म बदलने और ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद उन्हें एससी-एसटी की सुविधाएं मिल रही हैं, जिसके पीछे भी जगन सरकार की तुष्टीकरण की ही नीति ही है। इसी तरह स्वयं जगन मोहन रेड्डी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप हैं, जिनमें से कई तो पुराने हैं, परंतु कछ सरकार में आने के बाद भी लगे हैं।

ऐसे में एक तरफ जहां राजस्व की कमी का हवाला देकर आंध्र प्रदेश की जगन सरकार मोदी सरकार से मदद लेने वाले राज्यों में टॉप 3 में है, तो वहीं इस आंध्र प्रदेश के राजस्व में कमी की एक बड़ी वजह राज्य सरकार की तुष्टीकरण की नीति भी है, जगन बैंकों से उधार लेकर ईसाई और मुस्लिम समाज के लोगों को घी पिला रहे हैं और आंध्र प्रदेश को खोखला कर रहे हैं।

 

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