कांग्रेस के राज में दूरदर्शन ने राम मंदिर के उल्लेख को बैन करना चाहा था, और रामायण को ‘सेक्यलर’ बनाना चाहा था

आज हमें देखने को मिल रहा है कि वैश्विक स्तर पर किस प्रकार से सनातन धर्म को बदनाम किया जा रहा है। कहीं पर तालिबान का बचाव करने के लिए आरएसएस से तुलना की जा रही है, तो कहीं पर ‘Dismantling Global Hindutva’ जैसे कॉन्फ्रेंस आयोजित कर सनातन धर्म पर कीचड़ उछालने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, यह भारतीयों के लिए कोई नई बात नहीं है, विशेषकर उनके लिए, जिन्होंने कांग्रेस के राज में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग केवल हिंदुओं को बदनाम करने के लिए होते हुए देखा है, जिसके बारे में हाल ही में प्रख्यात लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने भी अपना अनुभव साझा किया है।

एक न्यूज चैनल से अपने साक्षात्कार में मालिनी अवस्थी ने बताया कि 2005 में दूरदर्शन चैनल पर उनका एक भजन प्रसारित होने वाला था, जिसे अचानक हटा दिया गया।  वह इस बात पर चकित हुईं, तो उन्होंने स्वाभाविक तौर पर इसका कारण पूछा। क्या आप सोच सकते हैं किस कारण से उनका लोक गीत दूरदर्शन के प्रस्तावित कार्यक्रम से हटाया गया? मालिनी अवस्थी के लोकगीत को दूरदर्शन के कार्यक्रम से इसलिए हटा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने अपने उस भजन में अयोध्या को श्रीराम के जन्मस्थल के रूप में प्रमाणित किया था।

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जी हाँ, आपने ठीक सुना। एक लोकगायिका को श्रीराम की स्तुति करने से इसलिए मना कर दिया गया क्योंकि उन्होंने श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या मानी। यदि आपको लगता है कि कांग्रेस रामायण और रामसेतु को कपोल कल्पना कहने का दुस्साहस कैसे कर सकती है, तो इसका अंदाज़ा आप कांग्रेस के शासन में दूरदर्शन द्वारा उठाये गये कदम से लग सकते हैं।

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पर क्या आपको लगता है कि कांग्रेस के प्रशासन में दूरदर्शन के कारनामे यहीं तक सीमित थे? कांग्रेस पार्टी ‘रामायण’ तक को सेक्युलर के तौर पर दिखाने पर तुली थी और ऐसा न करने पर वे रामानंद सागर के विश्व प्रसिद्ध शो को बीच में बंद करने की धमकियाँ भी देते थे। रामानंद सागर के पुत्र और फिल्मकार प्रेम सागर अपनी पुस्तक में बताते हैं कि तत्कालीन दूरदर्शन के निदेशक भास्कर घोष ने मांग की थी कि रामायण को ‘थोड़ा और धर्मनिरपेक्ष बनाना चाहिए’, ताकि दूरदर्शन पर ध्रुवीकरण के आरोप न लगे। इतना ही नहीं, वे रामायण को 26 हफ्तों के प्रसारण का समय भी देने को तैयार नहीं थे, जिससे शो बीच में ही बंद हो जाए।

लेकिन ये शो इतना विख्यात हुआ, और लोगों की आस्था इस शो से इतनी जुड़ चुकी थी कि न चाहते हुए भी भास्कर घोष को अपना विवादित निर्णय बदलना पड़ा था। दरअसल, तब जन समर्थन के कारण ही राजीव गांधी प्रशासन ने भास्कर घोष पर दबाव बनाया, अन्यथा वो तो रामायण के प्रसारण के लिए ही तैयार नहीं था। आप को अजीब लग रहा हो तो जनसमर्थन से रिप्लेस कर सकती हैं! अब आपको पता है कि ये भास्कर घोष किसके पिता हैं? ये उसी सागरिका घोष के पिता हैं, जो आए दिन केंद्र सरकार और सनातन धर्म के विरुद्ध विष उगलती हैं, और निरंतर सनातन धर्म को अपमानित करने का प्रयास करती है।

बता दें कि कांग्रेस के प्रशासन में जब मशहूर संगीतकार और लता मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने आल इंडिया रेडियो के लिए सावरकर की एक कविता की धुन तैयार की तबउन्हें तुरंत कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया और बाद में नौकरी से निकाल दिया गया था। अब मालिनी अवस्थी के वर्तमान साक्षात्कार ने एक बार ये स्पष्ट किया है कि कांग्रेस के हिन्दू घृणा की कोई सीमा नहीं है और उसका वर्तमान हिन्दू प्रेम मात्र छलावा है। कांग्रेस को हिन्दू धर्म से कितनी चिढ़ रही है ये बात किसी से छुपी नहीं है। ये तो उस समय की बात थी , अभी हाल ही में एक फोटो शेयर करते समय ॐ शब्द को क्रॉप करना हो और गणेश चतुर्थी की बधाई देते समय गणेश भगवान की छवि क्रॉप करना हो ‘जनेऊधरी’ राहुल गांधी और उनकी पार्टी सनातन धर्म के प्रति अपनी घृणा को समय समय पर दिखाते रहे हैं।

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