TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नोएडा में सिस्टम की लापरवाही से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नितिन नबीन के ताजपोशी में पीएम मोदी ने खुद को बताया कार्यकर्ता , बीजेपी ऑफिस में जश्न का माहौल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    सिमरन बाला 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर क्या खास करने वाली है

    पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच पली-बढ़ीं, अब गणतंंत्र दिवस परेड में CRPF की पुरुष टुकड़ी का करेंगी नेतृत्व, जानिए कौन हैं जम्मू-कश्मीर का नाम रौशन करने वालीं सिमरन बाला?

    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    विदेश मंत्रालय का स्पष्ट जवाब: 500% अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा

    ईरान पर ट्रंप का गुस्सा, देश तबाह करने की बात

    ट्रंप की ईरान को खुली धमकी: कहा- पूरा देश तबाह कर देंगे

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नोएडा में सिस्टम की लापरवाही से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत

    युवराज की मौत: लापरवाही, लाचारी और जवाबदेही का सवाल

    नितिन नबीन के ताजपोशी में पीएम मोदी ने खुद को बताया कार्यकर्ता , बीजेपी ऑफिस में जश्न का माहौल

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    सिमरन बाला 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर क्या खास करने वाली है

    पाकिस्तानी गोलाबारी के बीच पली-बढ़ीं, अब गणतंंत्र दिवस परेड में CRPF की पुरुष टुकड़ी का करेंगी नेतृत्व, जानिए कौन हैं जम्मू-कश्मीर का नाम रौशन करने वालीं सिमरन बाला?

    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है

    अमेरिकी दबाव के बीच भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाए रखने पर विचार कर रहा

    भारतीय नौसेना पानी और ज़मीन दोनों से उड़ान भर सकने वाले उभयचर विमानों को शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय नौसेना का नया प्लान, पानी पर नए रनवे बनाने की तैयारी

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    कनाडा के बयान ने भारत की स्थिति को किया मजबूत

    आया ऊंट पहाड़ के नीचे: ट्रम्प की दादागीरी से त्रस्त कनाडा अब Order Based World को लेकर भारत के सुर में सुर क्यों मिला रहा है?

    ईरान की आंतरिक उथल-पुथल से आगे, अंतरराष्ट्रीय असर

    ईरान संकट: भारत के लिए स्थिरता ही सही रणनीति

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    विदेश मंत्रालय का स्पष्ट जवाब: 500% अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा

    ईरान पर ट्रंप का गुस्सा, देश तबाह करने की बात

    ट्रंप की ईरान को खुली धमकी: कहा- पूरा देश तबाह कर देंगे

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

बिना पाखंड करे शादी भी नहीं कर सकी मलाला यूसुफजई!​

मलाला: गलती से गोली लगी और गलती से नोबेल मिला!

Aniket Raj द्वारा Aniket Raj
12 November 2021
in मत
मलाला यूसुफजई नोबेल
Share on FacebookShare on X

“मौत के सौदागर की मृत्यु।” सुबह-सुबह एक स्वीडिश समाचार पत्र में इस खबर को पढ़कर डायनामाइट के आविष्कारक और एक धनाढ्य उद्यमी अल्फ्रेड नोबेल हतप्रभ रह गए। उनके आश्चर्य का कारण समाचार पत्र में छपी उनके मृत्यु की गलत खबर नहीं बल्कि उनके संबोधन में प्रयुक्त होने वाले शब्द थे। वह सोच में पड़ गए कि क्या दुनिया उन्हें ऐसे याद रखेगी? अतः, उन्होंने अपने वसीयतनामे में नोबेल पुरस्कार की नींव रखी।

नोबेल पुरस्कार विश्व का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। इसे डायनामाइट के आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल के वसीयतनामे के तहत साहित्य, भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और शांति के क्षेत्र में उत्कृष्ट मानवीय योगदान के लिए स्वीडिश सरकार के नोबेल फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है।

संबंधितपोस्ट

जापानी समूह को मिला नोबेल शांति पुरस्कार, परमाणु खतरे के खिलाफ चलाता है अभियान

काम करने वाले ट्रम्प को नहीं, अपने बयानबाजी के लिए मशहूर थनबर्ग को मिल सकता है नोबेल

खालिस्तान समर्थक एनजीओ खालसा ऐड नोबेल पुरस्कार के लिए नामित, अगला नंबर अलकायदा का

और लोड करें

नोबेल पुरस्कार का राजनीतिकरण

कालांतर में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार का प्रयोग स्वीडिश सरकार द्वारा अपने राजनैतिक हित और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को साधने के लिए किया जाने लगा। 2014 में 17 साल की उम्र में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार पाकर पाकिस्तान की मलाला यूसफजई सबसे कम उम्र की नोबेल विजेता बनी। एक देश के तौर पर, अब्दुल सलाम के बाद यह पाकिस्तान का दूसरा नोबेल पुरस्कार था। वैसे भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी से अनभिज्ञ पाकिस्तान शांति के क्षेत्र में ही नोबेल प्राप्त करने का स्वप्न देख सकता था। धर्मांध और कट्टरपंथी मुल्लों से भरे इस दुष्ट राष्ट्र में शांति के संवाहक को ढूंढना असंभव था।

अयोग्य मलाला को मिला नोबेल

परंतु, भारत के योग्य उम्मीदवार कैलाश सत्यार्थी के चयन के पश्चात दक्षिण एशिया क्षेत्र में संबंध संतुलन स्थापना हेतु पाकिस्तानी नागरिक का चयन अनिवार्य हो गया। अतः, पाकिस्तान और यूरोपीय संघ के राष्ट्रों जैसे ब्रिटेन को खुश करने के लिए मलाला यूसुफजई जैसे अयोग्य, अक्षम और अनुभवहीन उम्मीदवार का नोबेल के लिए चयन किया गया। वैसे भी नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन और चयन प्रक्रिया अत्यंत जटिल,अपारदर्शी और पूर्ण रूप से स्वायत्त है। इतना जटिल कि इसमें नामांकन करने के लिए आपको किसी राष्ट्र, राष्ट्राध्यक्ष या राष्ट्र प्रतिनिधि जैसे लोगों और संस्थाओं की सहमति चाहिए। इतने अपारदर्शी और  शांति व्यक्तित्व धारण करने वाले महात्मा गांधी और दलाई लामा जैसे योग्य व्यक्तियों को छोड़कर बराक ओबामा और हेनरी किसिंगर जैसे लोगों को चयनित कर लिया गया जो स्वयं अपने चयन से आश्चर्यचकित थे। साहित्य का नोबेल पुरस्कार तो पूर्णतः यूरोप केंद्रित है और शांति हेतु नोबेल पुरस्कार के लिए कभी हिटलर भी नामांकित थे।

और पढ़े : अल गोर हो, मलाला हो या ग्रेटा, इन नोबल क्लब एक्टिविस्टों की हिपोक्रिसी का कोई जवाब नहीं!

मलाला की हिपोक्रेसी और गलती से मिला शांति का नोबेल

मलाला यूसुफजई का चयन इसी जटिलता, अपारदर्शीता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को साधने के परिणामस्वरुप हुआ है। स्वयं नोबेल समिति ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में यह स्वीकार किया कि कैलाश सत्यार्थी के साथ मलाला यूसुफजई को शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाना हिंदू-मुस्लिम और भारत-पाक के बीच संतुलन साधने का प्रयत्न है। दलाई लामा, एडवर्ड स्नोडेन और बान की मून के स्थान पर मलाला को वरीयता देना अत्यंत ही बेहूदा निर्णय था। मलाला यूसुफजई के चयन के पीछे तर्क दिया गया कि उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक कार्य किए हैं। परंतु, पाकिस्तान के स्वात प्रांत में उन्होंने लड़कियों के लिए कितने विद्यालय खोलें? विद्यालयों में लड़कियों की उपस्थिति में कितने प्रतिशत की वृद्धि की? उनके कार्यों के व्यापक प्रभाव और परिणाम क्या रहे? इन प्रश्नों पर सभी विद्वानजन आज तक निरुत्तर हैं।

मलाला यूसुफजई को नोबेल पुरस्कार वास्तव में तालिबानियों के कारण मिला। नोबेल पुरस्कार के इतिहास में मलाला का चयन योग्यता के आधार पर नहीं बल्कि प्रतीक के आधार पर किया गया। एक सनकी तालिबानी मलाला के स्कूल बस में घुसा और अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जिसमें से एक गोली मलाला को लग गई और यही गोली मलाला का दुर्भाग्य नहीं बल्कि उनके भाग्योदय का कारण बनी। वैश्विक मीडिया ने उन्हें  आतंक विरोधी और नारी शिक्षा के प्रतीक स्वरूप स्थापित कर दिया।  मलाला चिकित्सा हेतु ब्रिटेन चली गई और वहीं की नागरिकता ग्रहण कर ली।

हिप्पोक्रेसी अर्थात द्विचित प्रवृत्ति अर्थात दोगलेपन की सीमा देखिए। अपने देश का त्याग किया और नारी शिक्षा के प्रति उनका उत्तरदायित्व तेल लेने गया। ऑक्सफोर्ड जैसे शिक्षण संस्थान में अपने आगे की शिक्षा प्राप्त की। एक अच्छे संपन्न और समृद्ध जीवन को प्राप्त किया और कर्म के रूप में सिर्फ वैश्विक मंचों से ढ़ेर सारा ज्ञान दिया।

अगर गलती से किसी आतंकवादी के गोली का शिकार हो जाना ही नोबेल पुरस्कार के योग्यता का प्रमाण है तो माफ करिए! इस विश्व में प्रतिदिन सैकड़ों शांति हेतु नोबेल पुरस्कार के प्रतिस्पर्धी जन्मते हैं। इसके विपरीत कैलाश सत्यार्थी ने अपने संस्था के माध्यम से गरीब, निराश्रित और अनाथ बच्चों के लिए जमीनी स्तर पर कार्य किया। सतत और अनवरत रूप से अपने संघर्षों और उत्तरदायित्व के प्रति युद्धरत रहे। परंतु, अपने देश का त्याग कर दूसरे देश की नागरिकता लेने वाली, जिन्ना को अपना आदर्श मानने वाली और जमीनी स्तर पर नारी शिक्षा हेतु कुछ न कर पाने के बावजूद भी मलाला को नोबेल पुरस्कार भारत-पाक संबंध साधने, ब्रिटेन को खुश करने और तालिबान को आतंक के चेहरे के रूप में स्थापित करने के लिए दिया गया। अयोग्यता के बावजूद भी मलाला द्वारा नोबेल पुरस्कार को स्वीकार किया जाना उनके द्विचित्त प्रवृति के पराकाष्ठा को दर्शाता है।

और पढ़े : नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी, लॉकडाउन के बहाने भारत को वेनेजुएला या क्यूबा बनाना चाहते हैं

शादी के संबंध में उनका दोगलापन

हाल ही में उनके द्विचित्त प्रवृत्ति का एक और उदाहरण देखने को मिला है। कुछ दिनों पूर्व ही एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि वो कभी शादी नहीं करेंगी ना ही बच्चे पैदा करेगी परन्तु, 9 नवंबर 2021 को मलाला यूसुफजई पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के जनरल मैनेजर असर मलिक के साथ परिणय सूत्र में बंधी। आपके स्मरण हेतु बता दें यह वही मलाला यूसुफजई है, जिन्होंने कुछ समय पूर्व विवाह जैसे पवित्र संस्थान को ढ़कोसला बताया था और विवाह को महज एक पृष्ठ पर उल्लेखित संविदा कहा था। परंतु, अब जब स्वयं की बात आई तब 24 वर्षीय मलाला ने असर मलिक जैसे एक धनाढ्य वर को खुद के लिए चुन लिया। अपने विवाह को वह जन्म-जन्म का बंधन और संगम मानती हैं और दूसरों के विवाह को महज ढकोसला व संविदा।

अफगानिस्तान में मौजूद है सैकड़ों नोबेल प्रतिद्वंदी

नोबेल पुरस्कार निश्चित ही विश्व का श्रेष्ठतम पुरस्कार है। परंतु, शांति और साहित्य के क्षेत्र में इस पुरस्कार का राजनीतिकरण हो गया है। मलाला यूसुफजई इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। नारी शिक्षा के लिए जमीनी स्तर पर उन्होंने कोई कार्य नहीं किया ना ही वह एक सच्चे राष्ट्रभक्त के रूप में स्वयं को स्थापित कर पाई। एक भगोड़े के रूप में डर के कारण उन्होंने देश छोड़ दिया। स्वयं मलाला ने भी सिर्फ स्नातक स्तर की ही शिक्षा प्राप्त की है। उन्हें नोबेल पुरस्कार तालिबान, ब्रिटेन, पाकिस्तान और वैश्विक मीडिया ने मिलकर दिलाया है ना की उनके कार्यों ने। ऊपर से विवाह के संबंध में उनके विचार उनके आचरणहीन नैतिक मूल्यों को दर्शाते हैं। माफ करिएगा, अगर आतंकी की गोली का शिकार होना ही नोबेल पुरस्कार जीतने का पैमाना है तो आज अफगानिस्तान में नोबेल पुरस्कार के सैकड़ों कद्दावर दावेदार हैं। जिन्होंने ना तो अपने देश को छोड़ा और ना ही अपने सनातन धर्म को इसके बावजूद कि तालिबान अब वहां सिर्फ एक आतंकी संगठन ही नहीं बल्कि शासन का केंद्र बन चुका है।

और पढ़े : पिता की गिरफ्तारी के बाद भारत की ग्रेटा “Licypriya Kangujam” अब 1 करोड़ के Oxygen Scam के लिए घेरे में

Tags: नोबेलमलाला युसुफ़ज़ई
शेयर1018ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

हार्दिक पांड्या और राजीव शुक्ला पर लगा गैंगस्टर की पत्नी के बलात्कार का आरोप

अगली पोस्ट

“भारत हिंदुओं का है, जब मर्ज़ी चाहे भारत आयें”, CM हिमन्ता ने साफ़ शब्दों में कही अपनी बात

संबंधित पोस्ट

बांग्लादेश
चर्चित

हिंदू दीपू दास की इस्लामी भीड़ के हाथों बर्बर हत्या उस्मान हादी हत्याकांड का ‘साइड इफेक्ट’ नहीं है, ये मजहबी कट्टरता को आत्मसात कर चुके बांग्लादेश का नया सच है

20 December 2025

बांग्लादेश इस समय गहरी अस्थिरता से गुज़र रहा है। दुर्भाग्य से ये अस्थिरता सिर्फ राजनैतिक नहीं है, ये नैतिक और सामाजिक भी है। अलग भाषाई...

ऑपरेशन सिंदूर 2:0
मत

दिल्ली धमाका और PoK के नेता का कबूलनामा: क्या भारत के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ का समय आ गया है?

21 November 2025

पाकिस्तान एक आतंकी मुल्क है और इसमें शायद ही किसी को कोई संशय हो, ख़ुद पाकिस्तान के मित्र भी न सिर्फ इसे अच्छी तरह जानते...

शशि थरूर पीएम की तारीफ कर अपनी ही पार्टी के अंदर निशाने पर आ गए हैं
चर्चित

कांग्रेस का नया नियम यही है कि चाहे कुछ भी हो जाए पीएम मोदी/बीजेपी का हर क़ीमत पर विरोध ही करना है?

21 November 2025

कांग्रेस के नेता देश ही नहीं विदेशों में भी जाकर लोकतंत्र बचाने की दुहाई देते रहते हैं। लेकिन जब बारी आंतरिक लोकतंत्र की आती है...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

French Media Exposes Pakistan and China on the Rafale lost

00:04:36

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

00:03:24

Ramjet-Powered Shell: A Potential Game Changer for Indian Artillery| IIT Madra

00:06:25

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited