जमाखोर है चीन की सरकार, CCP कर रही है बड़ी मात्र में अनाज जमा

चीन में व्याप्त अनाज संकट!

चीन अनाज

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी नित नए आयाम लिख रही है। लोगों के अधिकार को हड़पने के बाद अब CCP ने खाने को भी हड़पना आरंभ कर दिया है। चीन की सत्तावादी पार्टी लोगों के अनाज पर कुंडली मार कर बैठी है। रिपोर्ट के अनुसार चीन खाद्यान्न की जमाखोरी में लिप्त है। चीन ने दुनिया की 20% से भी कम आबादी ने दुनिया के आधे से अधिक मक्का और अन्य अनाज का भंडारण करने में कामयाबी हासिल की है।

अमेरिकी कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास वर्ष 2022 की पहली छमाही में विश्व के मक्का भंडार का 69%, चावल का 60% और गेहूं का 51% होने की उम्मीद है।

चीन के राष्ट्रीय खाद्य और सामरिक भंडार प्रशासन में अनाज भंडार के प्रमुख किन युयुन के अनुसार, “हमारे गेहूं के भंडार डेढ़ साल की मांग को पूरा कर सकते हैं। भोजन की आपूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है।”

उन्होंने गर्व से घोषणा की कि चीन अपने खाद्य भंडार को “ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर” पर बनाए हुए है। General Administration of Customs of China के अनुसार, साम्यवादी राष्ट्र ने 2020 में 98.1 बिलियन डॉलर का भोजन आयात किया, जो कि 10 साल पहले के एक आंकड़े से 4.6 गुना अधिक है।

निक्केई एशिया की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी और सितंबर 2021 के बीच, चीन ने कम से कम 2016 की तुलना में अधिक खाद्य आयात किया। पिछले पांच वर्षों में, चीन का सोयाबीन, मक्का और गेहूं का आयात दो से बारह गुना बढ़ गया। गोमांस, सूअर का मांस, डेयरी और फलों का आयात दो से पांच गुना बढ़ गया।

चीन का कृषि संकट

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि चीन में कोई भी किसान नहीं बनना चाहता। मिट्टी जहरीली हो रही है, तथा रिटर्न कम है।

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इसके अतिरिक्त, ग्रामीण चीन के लोग बेहतर आजीविका की तलाश में शहरी केंद्रों की ओर पलायन कर रहे हैं। चीन में गेहूं और अन्य प्रावधान का उत्पादन 2015 से ही एक स्तर पर आकर अटक गए हैं।

Aichi विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस और चीनी कृषि के विशेषज्ञ गोरो ताकाहाशी ने चीन के कृषि क्षेत्र के स्वास्थ्य के बारे में यह कहा था कि, “चीन में कृषि उत्पादकता कृषि भूमि के फैलाव और मिट्टी के दूषित होने के कारण कम है। कृषि उत्पादन की मात्रा ठप होती रहेगी क्योंकि किसान शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं।”

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चीन अब देश की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर खाद्यान्न का उत्पादन नहीं कर सकता है। मामला तब और बदतर हो जाता है जब चीनी नागरिक उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद चाहते हैं। चीन के बारे में एक बात जो हम जानते हैं वह यह है कि वह उच्च गुणवत्ता वाले सामान का उत्पादन नहीं कर सकता, खाना तो छोड़ ही दीजिये। चीन में सब कुछ सस्ती क्वालिटी का है।

इसलिए, अपने खाद्य संकट को कम करने के लिए, चीन बड़ी मात्रा में खाद्यान्न आयात कर रहा है, तथा उनकी जमाखोरी कर रहा है। इससे अनाज के वैश्विक कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है।

चीन का खाद्य संकट

TFI ने पहले ही बताया था कि चीन एक गहन खाद्य संकट से जूझ रहा है। नवंबर में ही हमने आपको बताया था कि कैसे चीनी सरकार ने एक नया निर्देश जारी किया था और अपने नागरिकों से जितना हो सके उतना खाना स्टोर करने के लिए कहा था। शी जिनपिंग प्रशासन चीनी घरों में बर्बाद होने वाले भोजन की मात्रा में कटौती करना चाह रहे हैं। चीन में सब्जियों की कीमतें बढ़ गई हैं।

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अक्टूबर की शुरुआत से पिछले महीने तक खीरे, पालक और ब्रोकली के दाम दोगुने से ज्यादा हो गए थे। Shandong के एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र में $ 2.60 प्रति किलोग्राम के साथ पालक, पोर्क की तुलना में अधिक महंगा था। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 22 अक्टूबर को खत्म हुए चार हफ्तों में थोक सब्जियों की कीमतों में 28% की बढ़ोतरी हुई और यह फरवरी के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर है।

अब चीन दहशत में है। CCP  का सच लोगों के सामने आ चुका है। चीन की कृषि भूमि बंजर हो रही है, और दुनिया जल्द ही चीन को खाद्य निर्यात करना बंद कर सकती है। इसी कारण CCP अब CGHP यानी China Grain Hoarding Party बन चुकी है। आपको क्या लगता है कि एक बार जब चीन में जमा अनाज खत्म हो जाएगा, और वह अनाज की खरीद करने में असमर्थ है, तो क्या होगा?

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