सैफई महोत्सव का काला सच: जहां उड़ाए जाते थे जनता के टैक्स के पैसे

समाजवाद और परिवारवाद का नग्न नृत्य!

सैफई महोत्सव

Source- TFIPOST

सैफई महोत्सव का आधिकारिक नाम रणवीर सिंह स्मृति सैफई महोत्सव है। यह रणवीर सिंह स्मृति सैफई महोत्सव समिति द्वारा आयोजित एक वार्षिक 15-दिवसीय सांस्कृतिक मेला था। इसकी शुरुआत वर्ष 1997 में मुलायम सिंह यादव के भतीजे और मैनपुरी से पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह यादव के पिता स्वर्गीय रणवीर सिंह यादव ने गांव के एक मेले के रूप में की थी। वर्ष 1997 से वर्ष 2015 के बीच इसे लगातार आयोजित किया जाता रहा। वर्ष 2002 में उनकी मृत्यु के बाद इसे रणवीर सिंह स्मृति सैफई महोत्सव का नाम दिया गया और धीरे-धीरे सांस्कृतिक महोत्सव का आवरण ओढ़े यह आयोजन समाजवाद का नग्न नृत्य वाला मंच बन गया! सैफई महोत्सव इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण बन गया कि कैसे परिवारवाद और सत्ता की सनक जनता के दुखों के प्रति असंवेदनशील होकर समाजवाद जैसे उत्कृष्ट विचारधारा को विकृत कर देती है।

और पढ़ें: यूपी के राहुल गांधी बनने की ओर अग्रसर हैं अखिलेश यादव, उनका ये हास्यास्पद तर्क तो देखिए!

सैफई महोत्सव और बॉलीवुड नाइट

ध्यान देने वाली बात है कि सैफई महोत्सव का अंतिम दिन अर्थात् समापन समारोह को बॉलीवुड नाइट के नाम से भी जाना जाता है। इसकी शुरुआत मुलायम सिंह यादव सरकार ने की थी। इसमें अक्सर दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों की भागीदारी होती थी। यह हर साल दिसंबर और जनवरी के महीनों के दौरान सैफई गांव में होता था। बॉलीवुड नाइट दरअसल और कुछ नहीं, बल्कि एक परिवार के द्वारा जनता को मुंह चिढ़ाने और समाजवाद का मखौल उड़ाने जैसा था। सैफई महोत्सव के समापन समारोह से पहले करीब दर्जनों चार्टर्ड उड़ानें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सैफई की हवाई पट्टी पर उतरती थी।

उनमें से प्रत्येक पर सलमान खान, माधुरी दीक्षित, रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, जरीन खान, हार्ड कौर. बादशाह, आदित्य कपूर, आयुष्मान खुराना और कई अन्य बॉलीवुड दिग्गज सवार होते थे। वैसे तो गरीब जनता और दंगा पीड़ित हिंदुओं का हाल-चाल लेने के लिए समाजवाद के पुरोधा बने इस परिवार के पास तो समय नहीं होता था, पर मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव की अध्यक्षता में एक रिसेप्शन पार्टी इन सितारों की आगवानी करती थी। रात को एक-एक करके प्रत्येक सितारे मंच संभालते थे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पत्नी डिंपल यादव के अलावा मुलायम सिंह यादव और अन्य सपा के दिग्गज उनका अभिवादन करते थे।

और पढ़ें: जानिए कैसे अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मुलायम की विरासत को मिट्टी में मिला दिया

सैफई महोत्सव पर खर्च किए जाते थे 300 करोड़

समाजवाद की बात करने वाला यह परिवार फिल्मस्टारों, नर्तकियों और उनके क्रू सदस्यों पर करोड़ों रुपए लुटाता था। करदाताओं के पैसों से उनके सुख सुविधाओं का ध्यान रखा जाता था। उन्हें तरह-तरह की सुविधाओं से नवाजा जाता था, जैसे माधुरी दीक्षित की फिल्म डेढ़ इश्किया को फिल्म की कुल लागत का 25 प्रतिशत अनुदान दिया गया, जो कि 1 करोड़ रुपये था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सैफई महोत्सव पर 300 करोड़ रुपए खर्च किए जाते थे।

परंतु, आयोजन का इंतजाम, ऐशो आराम और कलाकारों के तामझाम देखकर यह आंकड़ा काफी छोटा लगता है, लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि मुलायम सुपुत्र ने “चोरी भी और सीनाजोरी भी” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए मीडिया को ही ऐसे आंकड़े पेश करने पर माफी मांगने की नसीहत दे दी। इतना ही नहीं उन्होंने झूठ बोलते हुए आयोजन का खर्च सिर्फ 6-7 करोड़ बताया। परन्तु, लोगों को यह समझा पाने में असमर्थ रहें कि आखिर 7 करोड़ में इतने कलाकार मान कैसे जाते थे। उनके पिता मुलायम सिंह यादव ने तो इसे समाजवादियों का हक तक बता दिया था।

जबकि इसी दौरान सैफई से महज 300 किलोमीटर दूर मुजफ्फरनगर जिले में दंगा पीड़ित राहत शिविरों में बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे थे। बच्चे ठंड से मर रहे थे और हिंदू समाज को बलपूर्वक घर से बाहर निकाला जा रहा था। दंगाइयो द्वारा उन्हें मारा जा रहा था लेकिन नेताजी और उनके सुपुत्र नृत्य का आनंद लेने में मग्न थे। गौरतलब है कि सैफई और कुछ नहीं, बल्कि मुलायम परिवार तथा समाजवादियों का निजी समारोह था, जिसपर करदाताओं के पैसे खर्च किए जाते थे। मर्यादा पुरुषोत्तम राम की अयोध्या में 4 लाख दीप जलाने के लिए फंड देने वाले सीएम योगी से तो मीडिया ढेरों सवाल करती है, पर सैफई में समाजवाद के नग्न नृत्य पर इनके मुंह से आवाज तक नहीं निकलती थी!

और पढ़ें: अखिलेश यादव यूपी में बस उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए लड़ रहे हैं, उनके पास कोई रणनीति नहीं है

Exit mobile version