TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद

    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद : मुस्लिम संगठन ने वंदे मातरम को स्वीकार करने को हमला बताया

    फिल्म घूसखोर पंडित को लेकर बवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स को निर्देश दिया: ‘घूसखोर पंडित’ का नाम बदलें, फिल्म का टाइटल बदलने तक ‘रिलीज़ नहीं

    शेख हसीना का भारत में प्रवास और प्रत्यर्पण

    बांग्लादेश में बीएनपी की सत्ता वापसी: जानें क्या हुआ था साल 2024 में ?

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी: तारिक रहमान को पीएम मोदी ने दी बधाई, कहां -मिलकर करेंगे काम

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत अमेरिका डिल में जानें क्या है खास बात

    India US Trade Deal: अमेरिका के साथ खेती और डेयरी को लेकर क्या हुई डील? जानें भारत ने क्या लिया फैसला

    सिस्टम की लापरवाही से दिल्ली में एक और मौत

    जल बोर्ड की चूक बनी जानलेवा, जनकपुरी में गड्ढ़े में गिरकर बाइक सवार की मौत

    चिकन नेक भारत की एक पतली ज़मीन की पट्टी है

    चिकन नेक में अंडरग्राउंड रेल कनेक्टिविटी: हकीकत या सिर्फ योजना?

    अडानी ग्रुप इटली के लियोनार्दो के साथ स्वदेशी समानों से बनाएगा हेलिकॉप्टर

    भारत में हेलिकॉप्टर उत्पाद बढ़ेगा, अदानी ग्रुप ने लियोनार्दो के साथ की पहल ,स्वदेशी को दिया जाएगा बढ़ावा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    तेजस Mk1-A: बन कर तैया

    तेजस Mk1-A: बन कर तैयार हैं तो फिर Air Force को सौंपे क्यों नहीं गए ? इंजन या HAL की लेट लतीफी- क्या है देरी की असली वजह ?

    भारत में बनाएं जाएंगे स्वदेशी विमान

    फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की ₹3.25 लाख करोड़ डील को जल्द मिल सकती है DAC की मंज़ूरी

    अग्नि-3 एक तैयार और मैच्योर मिसाइल सिस्टम है

    अग्नि -3 का एक और परीक्षण: भारत एक Active Nuclear Missile को बार-बार Test क्यों कर रहा है?

    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत का ऊर्जा रणनीतिक बदलाव

    रूस पर निर्भरता घटाने की दिशा में भारत का कदम: वेनेजुएला से 20 लाख बैरल तेल की खरीद

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला, 4 भारतीय छात्र घायल

    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद

    वंदे मातरम को लेकर एक बार फिर विवाद : मुस्लिम संगठन ने वंदे मातरम को स्वीकार करने को हमला बताया

    फिल्म घूसखोर पंडित को लेकर बवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स को निर्देश दिया: ‘घूसखोर पंडित’ का नाम बदलें, फिल्म का टाइटल बदलने तक ‘रिलीज़ नहीं

    शेख हसीना का भारत में प्रवास और प्रत्यर्पण

    बांग्लादेश में बीएनपी की सत्ता वापसी: जानें क्या हुआ था साल 2024 में ?

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी

    बांग्लादेश में नई सरकार की तैयारी: तारिक रहमान को पीएम मोदी ने दी बधाई, कहां -मिलकर करेंगे काम

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    भारत अमेरिका डिल में जानें क्या है खास बात

    India US Trade Deal: अमेरिका के साथ खेती और डेयरी को लेकर क्या हुई डील? जानें भारत ने क्या लिया फैसला

    सिस्टम की लापरवाही से दिल्ली में एक और मौत

    जल बोर्ड की चूक बनी जानलेवा, जनकपुरी में गड्ढ़े में गिरकर बाइक सवार की मौत

    चिकन नेक भारत की एक पतली ज़मीन की पट्टी है

    चिकन नेक में अंडरग्राउंड रेल कनेक्टिविटी: हकीकत या सिर्फ योजना?

    अडानी ग्रुप इटली के लियोनार्दो के साथ स्वदेशी समानों से बनाएगा हेलिकॉप्टर

    भारत में हेलिकॉप्टर उत्पाद बढ़ेगा, अदानी ग्रुप ने लियोनार्दो के साथ की पहल ,स्वदेशी को दिया जाएगा बढ़ावा

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    तेजस Mk1-A: बन कर तैया

    तेजस Mk1-A: बन कर तैयार हैं तो फिर Air Force को सौंपे क्यों नहीं गए ? इंजन या HAL की लेट लतीफी- क्या है देरी की असली वजह ?

    भारत में बनाएं जाएंगे स्वदेशी विमान

    फ्रांस से 114 राफेल खरीदने की ₹3.25 लाख करोड़ डील को जल्द मिल सकती है DAC की मंज़ूरी

    अग्नि-3 एक तैयार और मैच्योर मिसाइल सिस्टम है

    अग्नि -3 का एक और परीक्षण: भारत एक Active Nuclear Missile को बार-बार Test क्यों कर रहा है?

    डिंगातारा सिंगापुर के साथ मिलकर करेगा उपग्रहों की सुरक्षा

    अंतरिक्ष मलबे से निपटने के लिए भारतीय स्टार्टअप डिंगातारा और सिंगापुर की साझेदारी

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    भारत का ऊर्जा रणनीतिक बदलाव

    रूस पर निर्भरता घटाने की दिशा में भारत का कदम: वेनेजुएला से 20 लाख बैरल तेल की खरीद

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला

    रूसी मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में चाकू से हमला, 4 भारतीय छात्र घायल

    भारत–EU सहयोग को नई गति

    समुद्री निगरानी को मजबूत करता भारत, यूरोपीय संघ को दी IFC-IOR तक पहुंच

    एलन मस्क को भारत से बड़ा झटका

    एलन मस्क को झटका : भारत ने स्टारलिंक के GEN-2 सैटेलाइट सिस्टम को किया खारिज

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक

    फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

    10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

    नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!

    नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    भारतीय यूट्यूबर्स की कमाई: करोड़पति बनने वाले टॉप 10 कंटेंट क्रिएटर्स

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

अध्याय 2: भारतीय स्वतंत्रता की वास्तविक कहानी: मोहनदास करमचंद गांधी वास्तव में भारत क्यों लौटे?

सत्य के सबसे बड़े प्रवर्तक का अनसुना सत्य!

Aniket Raj द्वारा Aniket Raj
17 January 2022
in इतिहास
दक्षिण अफ्रीका गांधी
Share on FacebookShare on X
क्या आप जानते हैं?
  • गांधी का भारत आना ब्रितानी शासन के बढ़े ‘Deadline’ का उद्घोष था
  • दक्षिण अफ्रीका में गांधी के आंदोलन या संघर्ष सिर्फ भारतीयों के लिए थे
  • वे ‘भारतीय’ मुद्दों को इतनी चतुराई से उठाते थे कि कभी-कभार ये मुद्दे भारतीयों को अफ्रीकियों से अलग कर देते थे
  • गांधी को जानना, गांधी पर प्रश्न उठाना और गांधी को आलोचना के आधार में लाना सबसे बड़ा गांधीवाद है

9 जनवरी 1915 को मोहनदास करमचंद गांधी जलयात्रा करते हुए दक्षिण अफ्रीका से बॉम्बे पहुंचे। वह वहां दो दशकों से अधिक समय तक रहे। 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इस दिन को प्रवासी भारतीय दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया। पर, सबसे बड़ा प्रश्न जो अभी तक अनुत्तरित है या यूं कहें की जिस प्रश्न को लेकर भारतीय जनमानस आज भी दिग्भ्रमित है, वो प्रश्न है कि आखिर गांधी दो दशक बाद दक्षिण अफ्रीका से लौटे क्यों?

ब्रितानी साम्राज्य और महात्मा गांधी 

भारतीय राजनीति और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इस प्रश्न पर अधिक चर्चा इसलिए भी नहीं हुई क्योंकि अधिवक्ता मोहनदास करमचंद गांधी महात्मा गांधी बन के लौटे थे। अस्पृश्यता विरोधी आंदोलन के प्रणेता ने स्वयं हेतु महात्मा का ऐसा कवच बुना की उनके व्यक्तित्व को छूने का किसी ने साहस ही नहीं किया। ब्रिटिश उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के दासत्व में बंधे भारतीय ने उन्हें सिर्फ एक उद्धारक महात्मा के रूप में देखा।

संबंधितपोस्ट

तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

वंदे मातरम् के 150 वर्ष: बंकिमचंद्र की वेदना से जनमा गीत, जिसने भारत को जगाया और मोदी युग में पुनः जीवित हुआ आत्मगौरव

सरदार पटेल: लौहपुरुष जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया

और लोड करें

ब्रितानी साम्राज्य ने उन्हें भारतीय जनता के क्रोध को अपने अहिंसा से नियंत्रित करनेवाले ‘Safety Pin’  के रूप में देखा तो वहीं नेहरू ने उन्हें भारतीय जनमानस में अपनी स्वीकार्यता को बढ़ाने के माध्यम के रूप में। सभी के स्वार्थ सिद्ध हुए। भारत पर ब्रिटिश शासन की समयसीमा बढ़ गई और विश्व युद्ध में उन्हें भारतीयों की मदद भी मिली। नेहरू को पीएम पद मिला और गांधी को अभेद्य राजनीतिक शुचिता प्रदान करनेवाला महात्मा का कवच।

पर, क्या आप जानते हैं कि मोहनदास के जिंदगी के कई अनछुए पहलू ऐसे हैं, जिन्हें टटोलने पर आपकी धारणा बदल सकती है? साथ ही आपकी यही परिष्कृत धारणा देश की सबसे पुरानी पार्टी की धुरी को ध्वस्त कर देगी तथा सही अर्थों में भारत और उसके राष्ट्रवाद से ना सिर्फ आपको परिचित कराएगी बल्कि उनकी शाश्वत परिभाषा को प्रतिपादित करेगी। शायद, इसीलिए उन्हें राजनीतिक रूप से इतना पवित्र कर दिया दिया गया की वो ‘अस्पृश्य’ हो जाएं और आप गांधी और अपने देश की पहचान को लेकर हमेशा भ्रम में रहें।

रंगभेद के खिलाफ विरोध के साथ गांधी ने…

गांधी को गरीब महत्मा समझने वाली जनता को यह पता ही नहीं होगा कि गांधी एक अत्यंत धनाढ्य और शासकीय वर्ग से आते थे। उनके पिता और दादा पोरबंदर स्टेट के मुख्यमंत्री के अधीन दीवान रह चुके थे। गांधी का बचपन संपन्नता और वैभव में गुजरा। 14 वर्ष की उम्र में ही शादी हो जाने से गांधी बचपन से यौन क्रियाओं के प्रति उन्मुख रहें। लंदन से वकालत की पढ़ाई की लेकिन कभी अच्छे अधिवक्ता नहीं बन पाएं। पिता के बल पर पोरबंदर स्टेट के वकील रहे पर कुछ खास नहीं कर पाएं। वकालत पेशे को छोड़कर  शैक्षणिक पेशे में भी हाथ आजमाना चाहा पर वहां भी नाकाम रहे।

अंततः, 1893 में गांधी ने दक्षिण अफ्रीका संघ में ट्रांसवाल की राजधानी प्रिटोरिया में कानूनी रूप से एक मुस्लिम मवक्किल का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुसलमानों की एक फर्म से एक प्रस्ताव स्वीकार कर अफ्रीका चले गए।हम भारतीयों को सिखाया गया है कि गांधी भारत में महात्मा बने, लेकिन उनके ‘संतत्व’ की बीज 1893 और 1914 के बीच दक्षिण अफ्रीका में पड़ी।

और पढ़ें: गांधी जयंती : गांधी जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था

पीटरमैरिट्सबर्ग में गैर-श्वेत होने के कारण ट्रेन से बाहर फेंकने की घटना हम सभी भारतीयों को पढ़ाई गई है। भारतीय स्कूलों में इसे एक प्रतिष्ठित और परिवर्तनकारी क्षण के रूप में पढ़ाया जाता है, जब गांधी अन्याय के खिलाफ उठ खड़े हुए। हालांकि, इस संस्करण से जो सबसे महत्वपूर्ण बात अनुपस्थित है वह यह है कि गांधी अश्वेत अफ्रीकियों के साथ बैठना ही नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने बैठने का विरोध किया। उन्होंने रंगभेद के खिलाफ विरोध नहीं बल्कि खुद को अश्वेतों के साथ बैठाए जाने का विरोध किया था।

क्या गांधी नस्लभेदी थे?

दक्षिण अफ्रीका में गांधी के जीवन और कार्य पर एक विवादास्पद पुस्तक के लेखक और अफ़्रीकी शिक्षाविद अश्विन देसाई और गुलाम वाहेद निश्चित रूप से ऐसा मानते हैं। इन दोनों ने एक ऐसे व्यक्ति के जीवन खोज में सात साल बिताए जो उनके देश में दो दशकों (1893-1914) से अधिक समय तक रहा और वहां भारतीय लोगों के अधिकारों के लिए अभियान चलाया ।

The South African Gandhi: Stretcher-Bearer of Empire नामक अपनी पुस्तक में देसाई और वाहेद लिखते हैं “अफ्रीका में रहने के दौरान, गांधी ने भारतीयों को अफ्रीकियों से रंग और नस्ल के आधार पर अलग कर दिया जबकि अफ्रीकी लोग ब्रिटेन के रंगभेद नीति से ज्यादा त्रस्त थे और ब्रिटिश प्रजा होने का दावा भी कर सकते थे।” आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पूर्वव्याप्त अंग्रेजी रंगभेद की नीति में गांधी द्वारा जनित इस नस्लभेदी अलगाव से दक्षिण अफ्रीका में रहनेवाले भारतीय और अफ्रीकी समुदायों के बीच कितना दुराग्रह जन्मा होगा।

वे लिखते हैं कि गांधी के आंदोलन या संघर्ष सिर्फ भारतीयों के लिए थे। वे ‘भारतीय’ मुद्दों को इतनी चतुराई से उठाते थे कि कभी-कभार ये मुद्दे भारतीयों को अफ्रीकियों से अलग कर देते थे। इस नीति से गांधी एक तीर से तीन निशाने साधते थे। प्रथम, अंग्रेजों की ‘फुट डालो, राज करो’ की रणनीति को सफल बना ब्रितानी साम्राज्यवाद को दबावमुक्त रखते थे। दूसरा, गांधी ने स्वयं को भारतीय समाज के पुरोधा के रूप में प्रस्तुत किया, जिसने उन्हें राजनीतिक शक्ति प्रदान की। तीसरा, पराभव को प्राप्त होते अपने विधिक पेशे को उन्होंने अपने इस राजनीतिक उदय से महत्वहीन कर दिया। लेखक लिखते हैं कि गांधी भारतीय गिरमिटिया मजदूरों की दुर्दशा के प्रति भी उदासीन थे। अफ्रीका देश के मूल निवासी और काले अफ्रीकियों को गांधी काफिर कहते थे। महात्मा का तो पता नहीं पर अपने इन कृत्यों से गांधी ब्रितानी राजसत्ता के करीब आए और अजातशत्रु बने।

उनके जीवनी के लेखक रामचंद्र गुहा कहते हैं..

गांधी अपने शुरुआती दिनों में नस्लभेदी थे, इसमें लेशमात्र भी संदेह नहीं है। 61 वर्षीय गुहा ने एक साक्षात्कार में NPR को बताया था कि “20 वर्षीय गांधी सोचते थे कि यूरोपीय सबसे सभ्य हैं। उन्हें लगता था कि  भारतीय लगभग सभ्य है, जबकि अफ्रीकी पूर्णतः असभ्य है। पूर्वी अफ्रीका के राष्ट्र मालवी में तो #gandhimustfall  नाम का अभियान तक चलाया गया। इसके पीछे का कारण था गांधी का रंगभेदी चेहरा। अफ्रीकी लोग उन्हें नायक से ज्यादा खलनायक के रूप में देखते है।”

ब्लैंटायर के चांसलर कॉलेज में काम करने वाले अकादमिक और कार्यकर्ता जिमी कैंजा भी कहते हैं कि “गोरों और दुनिया भर के सरकारों और लोगों द्वारा फैलाए गए प्रोपोगेंडा के कारण मलावी सरकार के लिए इस तथ्य को स्वीकार करना मुश्किल है कि एक देश के तौर पर गांधी की हममें कोई हिस्सेदारी है। गांधी को एक अलग नजरिए से नायक के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन अफ्रीका और अश्वेत अफ्रीकी नजरिए से नहीं।”

कैंजा वास्तव में कहते हैं कि “पूरे अफ्रीका में कई युवा ऐतिहासिक घटनाओं पर सवाल उठाने लगे हैं। कई अफ्रीकी सरकारों ने कार्यकर्ताओं के युवा समूहों के दबाव का सामना किया है, जो एक अलग दृष्टिकोण से इतिहास को फिर से पढ़ना या समझना शुरू करते हैं।” 1893 में गांधी ने संसद को यह कहते हुए पत्र लिखा था कि भारतीय, जंगली या अफ्रीका के मूल निवासियों की तुलना में थोडे बेहतर नस्ल हैं।

1904 में, उन्होंने जोहान्सबर्ग के एक स्वास्थ्य अधिकारी को लिखा कि परिषद को ‘कुली लोकेशन’ नामक एक अस्वच्छ झुग्गी से ‘काफिरों’ अर्थात अफ्रीकी मूल के लोगों को हटा लेना चाहिए। मैं काफिरों की जगह भारतीयों के साथ रहने से व्यथित महसूस करता हूं। 1903 में, जब गांधी दक्षिण अफ्रीका में थे, तब उन्होंने लिखा था कि गोरे लोग ‘Predominating Race”  यानी श्रेष्ठ जाति है। उन्होंने यह भी कहा कि काले लोग ‘परेशान करने वाले, बहुत गंदे और जानवरों की तरह रहते हैं।’ 1905 में जब डरबन प्लेग की चपेट में आया तो गांधी ने लिखा कि यह समस्या तब तक बनी रहेगी जब तक कि भारतीयों और अफ्रीकियों को अस्पताल में एक साथ रखा जायेगा।

गांधी के पोते राजमोहन गांधी कहते हैं…

इतिहासकारों का कहना है कि ये सारे साक्ष्य पूरी तरह से को नया रहस्योद्घाटन नहीं है। अपने जीवन के प्रारंभिक काल में गांधी नस्लभेदी थे और यह सच है। कुछ दक्षिण अफ़्रीकी लोगों ने हमेशा उनपर आरोप लगाया है कि अपनी राजनीतिक शक्ति, स्वीकार्यता और पेशे को बढ़ाने के लिए उन्होंने नस्लीय अलगाव को बढ़ावा दिया तथा ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के साथ मिलकर काम किया। गांधी के जीवनी लेखक और उनके पोते राजमोहन गांधी कहते हैं कि ‘वे वकालत के काम से दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। वे दक्षिण अफ्रीका के अश्वेतों के बारे में पूर्वाग्रह से ग्रस्त थे।”

उनका तर्क है कि गांधी भी एक अपूर्ण इंसान थे। Magisterial Gandhi Before India के लेखक रामचंद्र गुहा लिखते हैं कि “गांधी के कारण ही अफ्रीका में नस्लभेद के विरोध में अभियान आरंभ हुए।” परन्तु, The South African Gandhi: Stretcher-Bearer of Empire  के लेखक इस कथन से असहमत हैं। अश्विन देसाई कहते है –“उन्होंने इस हद तक श्वेत अल्पसंख्यक शक्ति को स्वीकार कर लिया कि वह ब्रितानी साम्राज्य के कनिष्ठ भागीदार बनने के इच्छुक थे, वह एक नस्लवादी थे। भगवान का शुक्र है कि वह इसमें सफल नहीं हुए। देसाई ने इस दावे को भी खारिज कर दिया कि गांधी ने काले अधिकारों के लिए स्थानीय संघर्ष का मार्ग प्रशस्त किया। वे कहते हैं, “आप उपनिवेशवाद के लिए अफ्रीकी प्रतिरोध का इतिहास लिख रहे हैं, जो गांधी के आने से बहुत पहले सामने आ चुका था।”

जब गांधी ने भारतवंशियों को साथ देने के लिए बाध्य किया

गुहा ने अपनी किताब में लिखते हैं कि केपटाउन में उनके एक दोस्त ने उन्हें गांधी के बारे में बताते हुए कहा कि आपने हमें एक वकील दिया, हमने आपको एक महात्मा वापस दिया। अश्विन देसाई को लगता है कि एक ऐसे व्यक्ति को नायक बनाया जाना हास्यास्पद है, जिसने अफ्रीकी लोगों पर निरंकुश करों का समर्थन किया और उनपर होनेवाले क्रूरता के लिए आंखें मूंद लीं। गांधी पर पारंपरिक भारतीय इतिहास लेखन को चुनौती देने वाले कई इतिहासकार हुए पर उन्हें कभी स्वीकार नहीं किया गया। यहां तक की इतिहासकार पैट्रिक फ्रेंच ने 2013 में स्पष्ट रूप से लिखा था कि “गांधी का अफ्रीकियों के प्रति व्यवहार उनकी महात्मा छवि पर एक काला धब्बा है।”

1899 में दक्षिण अफ्रीका में दूसरा एंग्लो-बोअर (दक्षिण अफ्रीकी युद्ध) युद्ध छिड़ गया। हालांकि, गांधी की सहानुभूति बोअर्स के साथ थी, जो अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे पर उन्होंने भारतीय समुदाय को अंग्रेजो का समर्थन करने की सलाह दी थी। गांधी ने भारतीयों को ब्रिटिश सत्ता के अधीन मान भारतवंशियों को उनका साथ देने के लिए बाध्य किया। ब्रितानी साम्राज्य की रक्षा करने को उनका कर्तव्य बताया। उन्होंने डॉ बूथ की मदद से संगठित होकर 1,100 स्वयंसेवकों की एक भारतीय एम्बुलेंस कोर को प्रशिक्षित किया और सरकार को अपनी सेवाएं दीं। गांधी के नेतृत्व में वाहिनी ने बहुमूल्य सेवा प्रदान की और प्रेषणों में इसका उल्लेख भी किया गया है। उनके इस कृत्य से ना सिर्फ वहां के मूल अफ्रीकियों और भारतवासियों के बीच दुराव बढ़ा बल्कि अंग्रेजों के बीच गांधी की स्वीकार्यता भी बढ़ी।

और पढ़ें: South Africa में अब महात्मा गांधी की परपोती को हुई जेल, आंदोलन के लिए नहीं बल्कि fraud के लिए

क्यों लौटे थे गांधी?

गांधी दक्षिण अफ्रीका से अपने नस्लभेदी मानसिकता, कृत्यों, अश्वेतो के खिलाफ अपने पूर्वाग्रहों और ब्रिटिश साम्राज्य का समर्थन करने के कारण लौटाए गए। एक धनाढ्य और कुलीन वर्ग से आने के कारण वो यहां एक बेहतर राजनेता के रूप में उभर सकते थे। अपने पेशे को बचा सकत थे। ब्रिटेन ने भी कोई आपत्ति इसीलिए नहीं जताई क्योंकि उनका भारत आना ब्रितानी शासन के बढ़े ‘Deadline’ का उद्घोष था। यहां उन्हें सुरक्षा थी, संतोष था और अवसर के आसार दिखे जबकि दक्षिण अफ्रीका में उनकी नस्लभेदी मानसिकता के कारण भीड़ ने उनके हत्या तक का प्रयास किया था।

1962 में, एक ब्रिटिश फिल्म निर्माता रिचर्ड एटनबरो ने जब गांधी पर फिल्म बनाने के लिए शोध करना शुरू किया। तब उन्होंने भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से पूछा कि उन्हें अपने दिवंगत सहयोगी को कैसे चित्रित करना चाहिए? नेहरू ने प्रसिद्ध रूप से उत्तर दिया कि गांधी “एक महान व्यक्ति थे, लेकिन उनकी अपनी कमजोरियां, मनोदशा और उनकी अपनी विफलताएं थीं।” उन्होंने एटनबरो से गांधी को संत न बनाने की भीख मांगी। नेहरू ने कहा, “वह संत नहीं बल्कि इंसान थे।”

मोहनदास करमचंद गांधी अपने मानसिकता और कृत्यों के कारण परदेश से घर लौट आये परन्तु कुछ लोगों ने उन्हें महात्मा का चोगा ओढ़ाकर उनके जीवन के सत्य से दुनिया को अपरिचित रखा। यह कुत्सित और निकृष्ट कृत्य स्वयं में ही गांधीवाद के खिलाफ है। गांधी तो सदैव ही सत्यार्थ की खोज में रहे। ऐसे में, कहा जा सकता है कि सत्य के सबसे बड़े प्रवर्तक आज स्वयं हेतु ‘सत्याग्रह’ की मांग कर रहा है। अतः उनके कृत्य और व्यक्तिव का सत्यपूर्ण अन्वेषण करके हम गांधीवाद की धुरी को और मजबूत ही करेंगे। याद रहे, गांधी को जानना, गांधी पर प्रश्न उठाना और गांधी को आलोचना के आधार में लाना सबसे बड़ा गांधीवाद है और इसका निषेध गांधीवाद के खिलाफ!

Tags: दक्षिण अफ्रीकाभारतीय स्वतंत्रता संग्राममहात्मा गाँधीरामचंद्र गुहा
शेयर679ट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

आम आदमी पार्टी के पंजाब विधानसभा चुनाव नहीं जीतने के चार कारण

अगली पोस्ट

प्रिय अनुष्का शर्मा, आप अभिनय तक ही सीमित रहें, क्योंकि प्रेरणास्त्रोत होना आपके बस की बात नहीं

संबंधित पोस्ट

के एम करियाप्पा अनुशासन के प्रतीक
इतिहास

फील्ड मार्शल के .एम. करियाप्पा : अनुशासन और देशभक्ति की मिसाल

29 January 2026

फील्ड मार्शल कोडंडेरा मदप्पा करियप्पा, जिन्हें प्यार से के.एम. करियप्पा कहा जाता है, भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ और राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण...

10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं
इतिहास

इतिहास की गवाही: 10 फिल्में जो होलोकॉस्ट और नाजी क्रूरता को दर्शाती हैं

28 January 2026

होलोकॉस्ट एक सुनियोजित, राज्य-प्रायोजित नरसंहार था, जिसे 1933 से 1945 के बीच नाजी जर्मनी ने एडॉल्फ़ हिटलर के नेतृत्व में अंजाम दिया। इसका मूल कारण...

नेहरू अपने निजी अकाउंट में जमा कराना चाहते थे कुछ खजाना!
इतिहास

नेताजी की आजाद हिंद फौज के खजाने का क्या हुआ? क्यों खजाने की लूट पर जांच से बचते रहे जवाहर लाल नेहरू ?

23 January 2026

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की वर्ष 1945 में हुए विमान हादसे में मृत्यु होने के दावे को लगभग खारिज किया जा चुका है, लेकिन इससे...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05

India’s Swadesi ‘Meteor’: World’s Most Lethal BVR Missile | Gandiv| SFDR | DRDO

00:06:48

Between Rafale and AMCA; Where Does the Su-57 Fit | IAF| HAL | Wings India

00:06:10
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited