मोदी दुराग्रह से प्रेरित था किसान आंदोलन, अब तो एग्जिट पोल भी उसी ओर इशारा कर रहे हैं

पश्चिमी यूपी में भाजपा का वर्चस्व ज्यों का त्यों बना हुआ है!

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बाहर से फंड लो, भारत विरोधियों का दलाल बनो, मोदी को कोसो, कल्याणकारी योजनाओं को बाधित करो, दिल्ली को कब्जे में ले लो, दंगा करो, शव को काटकर सिंघु बॉर्डर पर लटका दो और इसे किसान आंदोलन का नाम दे दो, ताकि असली किसान की आड़ में छिप सको और अपनी राजनीति चमका सको। पर अंततोगत्वा मिला क्या? कुछ नहीं। न सीट मिली न राजनीतिक शक्ति। इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल सहित सभी सर्वे एजेंसियों ने उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए राज्य में एक आसान जीत की भविष्यवाणी की है। उन क्षेत्रों में भी भाजपा की जीत की बात कही गई है, जहां नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि-सुधार कानूनों को लेकर किसानों का आंदोलन देखा गया।

सात चरणों में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ था। वही पश्चिमी उत्तर प्रदेश जो राज्य में किसान आंदोलन का केंद्र था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों के 58 विधानसभा क्षेत्रों में पहले चरण के मतदान में भाजपा को 49 सीटें जीतने का अनुमान है। एग्जिट पोल्स के अनुसार समाजवादी पार्टी सिर्फ आठ सीटों पर कब्जा जमाएगी, जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को मात्र दो सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। ध्यान देने वाली बात है कि वर्ष 2017 में भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 58 में से 53 सीटों पर जीत हासिल की थी। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को 2-2 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) को एक सीट मिली थी। इसका मतलब यह है कि किसानों के आंदोलन और भाजपा के खिलाफ ध्रुवीकरण की खबरों के बावजूद, पार्टी को केवल तीन सीटों के नुकसान होने की संभावना है।

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यह तो तय हो गया कि मोदी दुराग्रह से प्रेरित था किसान आंदोलन

कांग्रेस  वर्ष 2017 में पश्चिमी यूपी के 58 सीटों में एक पर भी जीत हासिल करने में विफल रही थी, तब उसने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। विधानसभा चुनावों में पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व वाली कांग्रेस के पहले चरण के मतदान वाले निर्वाचन क्षेत्रों में लगातार दूसरी बार अपना खाता खोलने की संभावना भी नहीं है। हालांकि, विभिन्न एजेंसियों द्वारा किए गए लगभग सभी एग्जिट पोल में यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत की भविष्यवाणी के एक दिन बाद, अखिल भारतीय किसान सभा (AIKAS) के नेता हन्नान मुल्ला ने इसे “अवास्तविक और अतार्किक” बताया।

उन्होंने कहा,“भाजपा समर्थक मीडिया ने एग्जिट पोल दिखाकर अपनी विश्वसनीयता खो दी है। उन पर कोई विश्वास नहीं करता। उदाहरण के लिए किसानों के विरोध को ही ले लें। टीवी मीडिया ने पहले किसानों के विरोध का बहिष्कार किया, फिर इसे देशद्रोही करार दिया…पीएम द्वारा कानूनों को वापस लेने के बाद उन्हें दिखाना पड़ा। लेकिन भारत के इतिहास में सबसे लंबे विरोध प्रदर्शनों में से एक का प्रभाव चुनाव परिणाम पर कैसे परिलक्षित नहीं हो सकता है?”

AIKS सहित सभी किसान संघों ने संयुक्त किसान मोर्चा (जो 40 किसान संघों के एकछत्र निकाय है) के बैनर तले पंजाब और उत्तर प्रदेश के साथ, सभी पांच राज्यों में भाजपा के खिलाफ अभियान चलाया। पर, अंततोगत्वा इसका परिणाम अपेक्षित आता नहीं दिख रहा है। इससे साफ-साफ सिद्ध हो रहा है कि किसान आंदोलन राजनीति और मोदी दुराग्रह से प्रेरित एक सामंतवादी आंदोलन था, जिसने अनैतिक विरोध प्रदर्शन का मार्ग अपना कर सरकार को वास्तविक किसानों के हक में लाए गए कानूनों को रोक दिया। हालांकि, एक्ज़िट पोल के अनुसार अब जनता उन्हें सबक सीखा रही है पर वो उसे पचा नहीं पा रहे हैं।

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