राजा को चरित्रवान होना चाहिए, प्रशासन को संचालित और नियंत्रित करने के तरीके व मानदंड अलग-अलग हो सकते हैं, किंतु साहस, चरित्र, सिद्धांत और गरिमा के मानदंड हमेशा एक समान रहेंगे और एक प्रशासक का इन सभी मानवीय मूल्यों के उत्कृष्टतम मानदंडों से परिपूर्ण होना एक राष्ट्र के लिए अति आवश्यक है | परंतु दुर्भाग्यवश हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के प्रशासकों में इन सभी मानवीय मूल्यों का अभाव रहा है | आजकल पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल चल रही है | प्रधानमंत्री इमरान खान के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है , जिस कारण से इमरान खान का सत्ता से जाना लगभग तय हो गया है, ऐसे में इमरान खान बौखलाए नजर आ रहें है | वह बार बार विदेशी साजिश का चूरन पाकिस्तानी आवाम को बेचना चाह रहे हैं, पर उनका कोई भी पैंतरा कामयाब होता नहीं दिख रहा है |
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पाक की वर्तमान स्थिति
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान में ना तो चरित्र बचा है, ना ही कोई सिद्धांत और ना ही इतना साहस की वो अपने विपक्षियों से आंख मिला सकें। तब्दीली लाने और गरीबी हटाने का झूठ बोलकर इमरान सत्ता में आए। उनके सत्ता में आते ही पाकिस्तान में ‘तब्दीली’ आई भी और पाकिस्तान तीव्रता के साथ पतन की ओर अग्रसर हुआ, पहले पाकिस्तान में गरीबी थी, अब पूरा का पूरा पाकिस्तान ही गरीब हो गया है। रही सही कसर इमरान खान की मूर्खता और नरेंद्र मोदी के साहस ने पूरी कर दी, भारत ने अनुच्छेद 370 हटा दिया और पाकिस्तान कुछ नहीं कर पाया। ऊपर से इमरान खान ने अपनी मूर्खता का परिचय देते हुए रूस-यूक्रेन संकट के दौरान रूस का दौरा किया, जिससे रूस का साथ तो मिला नहीं, किन्तु अमेरिका के कोपभाजन का सामना अलग करना पड़ा |
इसी बीच इमरान खान गिरती लोकप्रियता के बीच पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने मोर्चा संभाल लिया। महंगाई, विदेश नीति, आर्थिक हालात, बढ़ते चीनी कर्ज और घटिया कूटनीति पर विपक्ष लामबंद हुआ और इमरान सरकार ने पाकिस्तान के संसद नेशनल असेंबली में बहुमत खो दिया. पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में 341 सीटें हैं, बहुमत के लिए 172 चाहिए जबकि विपक्ष का दावा है की उसके पास 175 सांसदों का समर्थन है| इसलिए उनके खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर आया और इमरान खान में इतना भी साहस नहीं है, कि वह विपक्ष का सामना कर सके |
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इमरान द्वारा विदेशी साजिश का राग अलापा गया
अविश्वास प्रस्ताव पर पाकिस्तान की संसद में 3 अप्रैल को मतदान होने की उम्मीद है, इमरान खान ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और अपनी सरकार के खिलाफ “विदेशी साजिश” के दावे को दोहराया और अमेरिका को दोष दिया। राष्ट्र को संबोधित करते हुए पाक पीएम ने कथित साजिश के पीछे अमेरिका को उत्तरदायी ठहराया | बुधवार को खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेतृत्व वाली सरकार ने कथित साजिश की पुष्टि की। इमरान ने अपने संबोधन में कहा कि 8 मार्च को या शायद उससे पहले 7 मार्च को, हमें अमेरिका से एक संदेश मिला| अमेरिका से मेरे कहने का मतलब किसी अन्य विदेशी देश से है, पत्र में कहा गया है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो पाकिस्तान को माफ कर दिया जाएगा और अगर उनकी सरकार बनी रही तो इसके परिणाम उन्हें भुगतने होंगे।
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अमेरिका ने साजिश के आरोपों का खंडन किया
हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग ने पाक पीएम के आरोपों को खारिज किया है, इमरान खान के हालात ‘चोरी भी और सीनाजोरी भी’ वाले कहावत को पूर्ण रूप से चरितार्थ करते हैं| यह सत्तालोलुपता, मूर्खता, धूर्तता और कायरता का मानद उदाहरण है| अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने पाक पीएम द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा- कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है, उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की संवैधानिक प्रक्रिया और कानून के शासन का सम्मान करता है, और उसका समर्थन करता है। व्हाइट हाउस के संचार निदेशक ने भी कहा कि खान के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है |
अपनी विफलता को छुपा रहे हैं इमरान खान
इमरान खान ना तो महंगाई रोकने में कारगर साबित हुए और ना ही गरीबी हटाने में, साथ ही वह पाकिस्तान को FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने में भी कामयाब नहीं रहे| कूटनीति और विदेशनीति में भी वह पूर्णतः विफल रहे, अपने राजनयिकों को वेतन देने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं थे| CPEC परियोजना के खतरे में पड़ने से चीन भी नाराज है, रूस का भी समर्थन प्राप्त नहीं हुआ | मुस्लिम उम्माह का मुखिया बनने के ख्वाब देखने के चलते अब अरब देश भी नाराज है | भारत ने अनुच्छेद 370 हटाते हुए 2 बार सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, आए दिन पाकिस्तान में बमबारी की घटनाएं बढ़ी है ,देश में बलूच लिबरेशन पहले से काफी मजबूत हुआ है |. चीन के साथ भी इमरान की दोस्ती कोई काम नहीं आयी और पाकिस्तान पूर्ण रूप से चीनी कर्ज में डूब कर अपनी संप्रभुता के साथ समझौता कर चुका है |
अगर, किसी प्रशासक का इस तरह का कार्यकाल रहा हो तो यह विफलता नहीं तो और क्या है, और इस विफलता के बावजूद भी अगर वह त्यागपत्र नहीं देते तो, यह उनकी धूर्तता और मूर्खता नहीं तो और क्या है? इमरान खान ने अपने निजी स्वार्थ और सत्ता लोलुपता के कारण अमेरिका पर आरोप लगा उसे और भी नाराज किया है, और साथ ही साथ पाकिस्तान अंदर से कितना खोखला और कमजोर है, यह भी उजागर कर दिया |
































