‘विज्ञापन मिलता है तो आलोचना मत करो’, मीडिया की आवाज दबाने में लग गई हैं ममता बनर्जी

ममता ने पेश किया तानाशाही का एक और नमूना!

ममता

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यदि आपको भारत के लोकतांत्रिक वातावरण में चीन के तानाशाही का अनुभव लेना है तो आप भारत के एक राज्य का भ्रमण कर सकते हैं। हम बात कर रहे हैं पश्चिम बंगाल की एक ऐसा राज्य जहां विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं की हत्या और महिला कार्यकर्ताओं के साथ छेड़खानी तथा बलात्कार आम बात है। एक ऐसा राज्य जहां पूरे परिवार को घर सहित जिंदा जला दिया जाता है। और अब एक कदम आगे बढ़कर इस राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक नई उपलब्धि हासिल की है, उन्होंने अपने विरुद्ध खबर चलाने वाले समाचार समूह को धमकाना शुरू कर दिया है।

समाचार के अनुसार 11 अप्रैल, सोमवार को, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन मीडिया समूहों को धमकी दी है जो उनके अनुसार लगातार नकारात्मक खबरें चलाकर उनकी सरकार को बदनाम कर रहे हैं। उन्होंने कोलकाता के मिलन मेला के उद्घाटन के अवसर पर भाषण देते हुए कहा कि ‛कहीं पटाखा (चॉकलेट बम) फट गया है और मीडिया इसके लिए तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रहा है। कहानी का हर समय प्रसारण किया जा रहा है। और कोई अन्य मीडिया हाउस इस काम को आनंदबाजार पत्रिका से बेहतर नहीं कर रहा है,’

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मीडिया को ममता का रिमाइंडर

इसके बाद उन्होंने मीडिया समूहों को धमकाते हुए कहा “बहुत खूब, इसे (राज्य सरकार से) विज्ञापन मिलते हैं और केवल नकारात्मक बातों पर प्रकाश डाला जाता है याद रखें, आपको अपने लिए सीमाएँ निर्धारित करनी होंगी। उन्हें विज्ञापन देने वालों को विचार करना चाहिए कि क्या इसे जारी रखा जाना चाहिए” उनकी एक पंक्ति विशेष रूप से उल्लेखित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा है कि “बंगाल मीडिया ने बंगाल (सरकार) को बदनाम किया तो बीजेपी क्या करेगी?” अर्थात ममता बनर्जी को लगता है कि उनकी सरकार बंगाल की समानार्थी है। फ्रांस का एक तानाशाह शासक हुआ करता था जिसका नाम लुई 14th (लुई चौदहवां) था। उसकी एक प्रसिद्ध उक्ति है ‛मैं ही राज्य हूँ’ / I am the state, ऐसे बात इंदिरा गांधी के समय भी उठी थी। तब कहा जाता था कि इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा और अब ममता उसी मार्ग पर चल रही हैं। उनके अनुसार बंगाल की पहचान उनके दल और उनकी सरकार से जुड़ी हुई है। जो भी समाचार समूह ममता सरकार के विरुद्ध आवाज उठाते हैं वह बंगाल के विरोधी हैं।

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ममता बनर्जी का विवादित बयान

ममता बनर्जी ने लोगों से समाचार कम देखने के लिए कहा है। एक ओर ममता बनर्जी ऐसे बयान देती रहती है जो किसी सभ्य समाज द्वारा स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं दूसरी ओर उन्हें यह भी अपेक्षा है कि लोकतंत्र में उनके विरुद्ध कोई आवाज ना उठे। हाल ही में पश्चिम बंगाल में एक नाबालिग लड़की का सामूहिक बलात्कार करके उसकी हत्या कर दी। इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के बेटे का नाम सामने आया था। जब ममता बनर्जी ने इस मामले पर वक्तव्य दिया तो उन्होंने ऐसी ओछी बात कही जो किसी सभ्य समाज द्वारा स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा था “आप कैसे जानते हैं कि उसके साथ बलात्कार किया गया था? पुलिस अभी तक मौत के कारण का पता नहीं लगा पाई है। मैंने उनसे पूछा था। क्या वह गर्भवती थी या प्रेम संबंध था या बीमार थी? यहां तक ​​​​कि परिवार भी जानता था कि यह एक प्रेम संबंध था। अगर एक युगल एक रिश्ते में है, मैं उन्हें कैसे रोक सकती हूं?”

अपनी पार्टी के नेता के बेटे को बचाने के लिए ममता बनर्जी ने 14 वर्षीय नाबालिक लड़की के साथ हुए बलात्कार को प्रेम संबंध करार दे दिया। संभव है कि पुलिस जांच में भी मामला प्रेम संबंध का निकल जाए और यह भी सामने आ जाएगी लड़की के साथ ना तो बलात्कार हुआ था और ना ही उसकी हत्या की गई थी। संभव है उसने आत्महत्या कर ली। हमेशा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि यह मामला पश्चिम बंगाल का है और पश्चिम बंगाल में कुछ भी संभव है। अगर कोई पत्रिका या चैनल यह रिपोर्ट दिखाएं कि कैसे तृणमूल कांग्रेस के गुंडे और सरकार निरंकुशता की पराकाष्ठा पर पहुंच गए हैं, तो उन्हें भी मौन कराना सम्भव है, क्यों यह ममता का बंगाल है।

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