रोजगार सृजन के मामले में भारत ने बनाया रिकॉर्ड, EPFO में 12.2 मिलियन हुए नामांकन

वास्तविक नौकरियों की संख्या 12.2 मिलियन की दस गुना हो सकती है।

Source: TFI

कोरोना वायरस की महामारी में दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाएं ढह गईं। ख़ुद को तोप समझने वाले देशों की स्थिति दयनीय हो गई। ऐसे कठिन वक्त में भी भारत मजबूती से खड़ा रहा। हालिया आंकड़ों को अगर देखें तो साफ पता चलता है कि कोरोना महामारी के बाद भी भारत के विकास का रथ रुका नहीं है, बल्कि गति और बढ़ाने की तरफ बढ़ रहा है।

मोदी सरकार के अथक प्रयासों के बाद भारत में कोरोना वायरस नियंत्रण में है। ऐसे में भारत की अर्थव्यवस्था गतिमान हो रही है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों बताते हैं कि भारत में रोजगार के अच्छे अवसर पैदा हो रहे हैं।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के आंकड़ों के अनुसार 2021-22 में शुद्ध नए नामांकनों ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 2021-22 में शुद्ध नए नामांकन बढ़कर 12.2 मिलियन हो गए हैं। पिछले वर्षों में हुई बढ़ोतरी से अगर इसकी तुलना करें तो समझ आता है कि देश में औपचारिक रोजगार सृजन बढ़ रहा है। 2020-21 में यही नामांकन 7.71 मिलियन था। 2019-20 में 7.8 मिलियन और 2018-19 में 6.11 मिलियन था।

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महीने के अनुसार अगर देखें तो मार्च में शुद्ध नए नामांकन 1.53 मिलियन थे जोकि किसी महीने में हुए सबसे ज्यादा शुद्ध नए नामांकन हैं। इन आंकड़ों की अगर फरवरी से तुलना करें तो यह 19.5 फीसदी की छलांग है। फरवरी महीने में शुद्ध नए नामांकन 1.28 मिलियन हुए थे।

श्रम मंत्रालय ने शुक्रवार को EPFO के आंकड़े जारी किए हैं। इन आंकड़ों के अनुसार 0.118 मिलियन संस्थानों ने मार्च में पहली बार योगदान दिया, जबकि फरवरी में 78,133 संस्थानों ने योगदान दिया था।

श्रम मंत्रालय ने कहा कि महीने के दौरान जोड़े गए कुल 1.53 मिलियन शुद्ध सब्सक्राइबर्स में से लगभग 0.96 मिलियन नए सदस्य थे, जिन्हें पहली बार ईपीएफ और एमपी अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के तहत कवर किया गया है।

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लगभग 0.56 मिलियन ग्राहक बाहर निकल गए, लेकिन ईपीएफओ के तहत आने वाले प्रतिष्ठानों में फिर से शामिल हो गए। पेरोल डेटा की तुलना इंगित करती है कि मार्च, 2022 के दौरान 0.41 मिलियन की सबसे अधिक शुद्ध नामांकन दर्ज करके 22-25 वर्ष का आयु-समूह सबसे आगे रहा है। इसके बाद 29-35 वर्ष के आयु-समूह का स्थान है। महीने के दौरान 0.31 मिलियन शुद्ध ग्राहक जोड़े गए।

इसमें कहा गया है कि 18-25 साल के आयु समूह ने महीने के दौरान कुल शुद्ध नामांकन का लगभग 45.96% हिस्सा बनाया। जो दर्शाता है कि पहली बार नौकरी चाहने वाले बड़ी संख्या में संगठित क्षेत्र के कार्यबल में शामिल हुए हैं।

महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, हरियाणा और दिल्ली ने औपचारिक रोजगार सृजन का नेतृत्व किया है। छह राज्यों ने मिलकर महीने के दौरान लगभग 1.01 मिलियन शुद्ध ग्राहक जोड़े हैं, जो सभी आयु समूहों में कुल शुद्ध पेरोल वृद्धि का लगभग 66.18% है।

भारत में रोजगार सृजन को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि भारत ने COVID-19 के महामारी के दौरान नौकरियों और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में रणनीतिक कदम उठाए हैं।

आज जिस तरह से भारत ने EPFO में 12.2 मिलियन लोगों को जोड़ा है उससे यह साफ दिखता है कि भारत रोजगार पैदा करने के मामले में आगे चल रहा है। इसके साथ ही हमें यह भी ध्यान देना जरूरी है कि हमारे देश में लाखों लोग EPFO में खुद को नहीं जोड़ते हैं। कई संस्थान भी खुद को EPFO में नहीं जोड़ते हैं। ऐसे में अगर इन आंकड़ों को जोड़ा जाए तो यह 10 गुना अधिक होगा।

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