फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक करने वाले हैं। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब दुनिया व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दों का सामना कर रही है।
दोनों नेताओं के बीच आर्थिक विकास, मजबूत सप्लाई चेन, AI, निवेश साझेदारी और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। मंगलवार को सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान मोदी और ट्रंप की संक्षिप्त मुलाकात हुई थी। फरवरी 2025 के बाद यह उनकी पहली आमने-सामने की बातचीत होगी।
भारत इस बार 13वीं बार G7 सम्मेलन में अतिथि देश के रूप में शामिल हुआ है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी की यह लगातार सातवीं G7 भागीदारी है। 15 से 17 जून तक चल रहे इस सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं और साझेदार देश वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं।
वैश्विक भरोसे की कमी पर मोदी की चिंता
‘नई साझेदारियां और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता का पुनर्निर्माण’ विषय पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया में संसाधनों की नहीं, बल्कि भरोसे की कमी है। उन्होंने देशों से दाता-प्राप्तकर्ता (Donor-Recipient) मॉडल से आगे बढ़कर समानता, पारदर्शिता और आपसी सम्मान पर आधारित संबंध बनाने का आह्वान किया।
मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश सहायता नहीं, बल्कि सम्मानजनक साझेदारी चाहते हैं। उन्होंने अफ्रीका में कृषि, जल प्रबंधन, ऊर्जा, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में भारत के सहयोग का भी उल्लेख किया।
समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता और उसके वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में व्यवधान से वैश्विक व्यापार प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने भारतीय नागरिकों और नाविकों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की रक्षा पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।
कई देशों के नेताओं से हुई मुलाकात
ट्रंप से प्रस्तावित बैठक के अलावा मोदी ने कई अन्य नेताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने तकनीक, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर चर्चा की।
मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से भी मुलाकात की और व्यापार, ऊर्जा तथा तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की। इसके अलावा उन्होंने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ हाल ही में हुए भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के बाद आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के मुद्दे पर चर्चा की।
कर्ज, महत्वपूर्ण खनिज और AI पर फोकस
G7 सम्मेलन में विकासशील देशों पर बढ़ते कर्ज, महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) की आपूर्ति और AI के नियमन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। नेताओं ने विकासशील देशों की ऋण समस्याओं के समाधान और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सुधारों पर जोर दिया।
इसके साथ ही ऊर्जा, रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों के लिए जरूरी खनिजों की आपूर्ति में चीन पर निर्भरता कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन के अंतिम दिन AI और सोशल मीडिया से जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
ट्रंप के साथ होने वाली मोदी की बैठक को भारत-अमेरिका संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस मुलाकात से दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है।


































