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ओबीसी आरक्षण पर ‘गदर मचाना’ चाहते थे अखिलेश यादव, सीएम योगी आदित्यनाथ ने किस्सा ही खत्म कर दिया

अपने अबतक के राजनीतिक इतिहास में पहली बार अखिलेश यादव ने इतनी जल्दी किसी मुद्दे को लपका लेकिन दुर्भाग्य उन्हें उतनी ही जल्दी अपने हथियार डालने पड़े।

Chaman Kumar Mishra द्वारा Chaman Kumar Mishra
28 December 2022
in चर्चित
(OBC Reservation)

Source: India Today

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ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने आरक्षण पर एक फैसला दिया। अखिलेश यादव ने उसे लपक लिया। करीब 4-5 घंटे तक अखिलेश यादव ने उस पर राजनीति भी कर ली। अखिलेश माहौल बनाने में जुटे थे तब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक पासा फेंका और अखिलेश यादव को सांप सूंघ गया। अपने अबतक के राजनीतिक इतिहास में पहली बार अखिलेश यादव ने इतनी जल्दी किसी मुद्दे को लपका लेकिन दुर्भाग्य उन्हें उतनी ही जल्दी अपने हथियार डालने पड़े। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उतनी ही जल्द उनके मुंह से आरोपों का निबाला छीन लिया।

इस लेख में समझिए कैसे ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के मुद्दे को योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव के हाथों से कुछ ही घंटे में छीन लिया।

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तारीख थी 27 दिसंबर। लखनऊ को शीतलहर ने अपने कब्जे में ले रखा था। तापमान गिरावट का रिकॉर्ड बनाने जा रहा था कि तभी एक ख़बर से सियासी तापमान अचानक बढ़ गया। इलाहालाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उत्तर-प्रदेश के निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) को समाप्त कर देने का निर्णय दिया।

और पढ़ें: महंत अवैद्यनाथ – जिन्होंने युवा अजय बिष्ट को योगी आदित्यनाथ बनाया

इस फैसले का बाहर आना था कि सियासी गलियारों में हर तरफ बवाल मच गया। सोशल मीडिया से लेकर लोकभवन तक सियासी हलचल बढ़ गई। लखनऊ बेंच ने अपने आदेश में कहा कि ओबीसी आरक्षण को निर्धारित करने में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बताए गए ट्रिपल टेस्ट का पालन नहीं किया गया। इसलिए बिना ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के ही इस बार निकाय चुनाव करवाए जाएं। इस फैसले के आते ही अखिलेश यादव सक्रिय हो गए।

अखिलेश यादव ने ट्विटर पर लिखा, “आज आरक्षण विरोधी भाजपा निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के विषय पर घड़ियाली सहानुभूति दिखा रही है। आज भाजपा ने पिछड़ों के आरक्षण का हक़ छीना है, कल भाजपा बाबा साहब द्वारा दिए गये दलितों का आरक्षण भी छीन लेगी। आरक्षण को बचाने की लड़ाई में पिछडों व दलितों से सपा का साथ देने की अपील है।”

आज आरक्षण विरोधी भाजपा निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के विषय पर घड़ियाली सहानुभूति दिखा रही है। आज भाजपा ने पिछड़ों के आरक्षण का हक़ छीना है,कल भाजपा बाबा साहब द्वारा दिए गये दलितों का आरक्षण भी छीन लेगी।

आरक्षण को बचाने की लड़ाई में पिछडों व दलितों से सपा का साथ देने की अपील है।

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) December 27, 2022

 

अखिलेश यादव समझ गए थे यही वो मुद्दा है जिसका राजनीतिक फायदा वो उठा सकते हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने भी इस मुद्दे पर ट्विट किया। इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के दूसरे नेता भी इस नैरेटिव को सेट करने में जुट गए कि भाजपा की योगी आदित्यनाथ सरकार संघ के आदेशानुसार ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) को खत्म करने का षड्यंत्र कर रही है। आगे यही लोग एससी और एसटी का भी आरक्षण खत्म कर देंगे।

और पढ़ें: गिद्धों के महत्व को समझने वाले देश के पहले सीएम हैं योगी आदित्यनाथ

बस, फिर क्या था, देखते-देखते उत्तर-प्रदेश की सभी विपक्षी पार्टियां उतर आईं। सभी भाजपा और योगी आदित्यनाथ सरकार पर हमला बोलने लगे। बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी इसको लेकर ट्वीट किया। लेकिन तब तक योगी आदित्यनाथ सक्रिय हो चुके थे।

योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट करते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन के परिप्रेक्ष्य में एक आयोग गठित कर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नागरिकों को आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराएगी। इसके उपरान्त ही नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन को सम्पन्न कराया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के क्रम में सभी कानूनी पहलुओं पर विचार करके प्रदेश सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अपील भी करेगी।”

उत्तर प्रदेश सरकार नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन के परिप्रेक्ष्य में एक आयोग गठित कर ट्रिपल टेस्ट के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के नागरिकों को आरक्षण की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

इसके उपरान्त ही नगरीय निकाय सामान्य निर्वाचन को सम्पन्न कराया जाएगा।

— Yogi Adityanath (मोदी का परिवार) (@myogiadityanath) December 27, 2022

एक ट्वीट में ही अखिलेश यादव के हाथों से एक राजनीतिक मुद्दे को योगी आदित्यनाथ ने छीन लिया। इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर से साबित कर दिया कि भाजपा की आरक्षण विरोधी पार्टी की जो छवि विपक्षी पार्टियां बनाना चहती हैं, वो सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक हथकंडा है।

अब यहां सवाल यह है कि आखिरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच को ऐसा निर्णय क्यों देना पड़ा जिसमें कहा गया कि बिना ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के ही निकाय चुनाव कराए जाएं और क्यों सरकार को इस पर तुरंत एक्शन में आना पड़ा। दरअसल, इस बार निकाय चुनावो में ओबीसी आरक्षण के लिए सरकार ने ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले की तरह ही रैपिड सर्वे कराया था और उसके आधार पर ही इस महीने की शुरुआत में प्रदेश की 17 महापालिकाओं के मेयरों, 200 नगर पालिका और 545 नगर पंचायत अध्यक्षों के आरक्षण की प्रोविजनल लिस्ट जारी की थी।

और पढ़ें: लखनऊ का नाम नहीं बदलेंगे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इसी जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने रिजर्वेशन ड्राफ्ट खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की तरफ से निर्धारित ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले का पालन नहीं होता है तब तक आरक्षण नहीं माना जाएगा।

अब आपके मस्तिष्क में यह प्रश्न अवश्य उठ रहा होगा कि आखिरकार यह ट्रिपल टेस्ट होता क्या है? दरअसल, नगर निकाय चुनावों में ओबीसी का आरक्षण (OBC Reservation) तय करने से पहले एक आयोग का गठन किया जाता है। यह आयोग निकायों में पिछड़ेपन का आंकलन करता है। इसके बाद सीटों के लिए आरक्षण को प्रस्तावित किया जाता है। दूसरे चरण में ओबीसी की संख्या पता की जाती है। तीसरे चरण में सरकार के स्तर पर इसे सत्यापित किया जाता है।

ऐसे में अब यह स्पष्ट है कि उत्तर-प्रदेश सरकार इसी आधार पर दोबारा से आरक्षण की सूची जारी करेगी। योगी आदित्यनाथ सरकार ने कोर्ट के निर्णय को देखते हुए जितनी तेजी से कदम उठाए उससे ऐसा प्रतीत होता है मानो अखिलेश यादव फिर से मुद्दाविहीन हो गए हो। अब वो फिर से सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट करते हुए दिखेंगे क्योंकि और कोई मुद्दे तो उनके पास सरकार को घेरने के लिए हैं नहीं।

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Tags: Akhilesh Yadavobc reservation in uttar pradeshYogi Adityanathओबीसी आरक्षण
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