2022 में धाक जमाई, 2023 में भारत की कूटनीति कैसी रहेगी?

विदेश नीति के मोर्चे पर 2023 में भारत के सामने कई चुनौतियां हैं लेकिन इस वर्ष की भारतीय कूटनीति को देखें तो वो चुनौतियां छोटी दिखती हैं। इस लेख में समझिए कैसे।

India dominated geopolitics in 2022, but it was only a humble beginning

SOURCE TFI

वर्ष 2022 बीत चुका है, दुनिया नई संभावनाओं, महत्वाकाक्षाओं और नई उमंग के साथ वर्ष 2023 में प्रवेश कर चुकी है। बीते वर्ष विश्व कई घटनाओं का साक्षी बना। दुनिया ने जहां एक ओर रूस-यूक्रेन युद्ध देखा तो वहीं दूसरी ओर चीन और अमेरिका के बीच की बढ़ती तल्खी भी देखी। वहीं दुनिया की तमाम घटनाओं से इतर वैश्विक राजनीति में जो सबसे अप्रत्याशित व सकारात्मक घटना देखने को मिली वो थी वैश्विक कूटनीति में भारत का बढ़ता हुआ दबदबा। भारत ने दुनियाभर के तमाम राजनैतिक मंचों पर होने वाले बड़े से बड़े कार्यक्रमों में वर्ष 2022 में निर्णायक भूमिका निभाई। भारत के परिप्रेक्ष्य में यदि वर्ष 2023 को देखें तो स्थिति ऐसी जान पड़ती हैं कि भारत की विदेश नीति इस वर्ष और सुदृढ़ रहने वाली है? आइए, इसको समझने के लिए कुछ बिंदुओं पर ध्यान देते हैं।

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भारत का जी-20 सम्मेलन की अध्यक्षता करना

2022 में दुनिया के शक्तिशाली देशों के समूह जी-20 की कमान भारत को सौंपी गई, जिसके बाद वैश्विक पटल पर भारत एक नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा। दूसरी ओर 2023 में जी-20 की होने वाली बैठकों की स्थिति भी स्पष्ट दिखती है। जैस- कृषि क्षेत्र को लेकर अप्रैल में होने वाले सम्मेलन भारत के वाराणसी में हो सकते हैं। जी-20 की अध्यक्षता मिलने के बाद दुनिया के भविष्य को लेकर भारत से कई सवाल पूछे गए जिसके उत्तर में भारत का कहना है कि ग्लोबल साउथ के देशों की अर्थव्यवस्थाएं दुनिया की बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं इसलिए भारत का उद्देश्य ग्लोबल साउथ पर फोकस करना है जिसमें एशिया के कई देश शामिल हैं।

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डॉलर के आधिपत्य को चुनौती

2023 में वैश्विक पटल पर भारत के छाए रहने का दूसरा कारण होने वाला है डॉलर के आधिपत्य को चुनौती देना जिसके लिए प्रयास 2022 में ही भारत के द्वारा शुरू कर दिए गए थे। दरअसल, अधिकतर देश डॉलर में ही व्यापार करते हैं। लेकिन भारत ने बाजार में डॉलर के आधिपत्य को चुनौती देने के लिए श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों और रूस जैसे मित्र देश के साथ ही अफ्रीका के देशों में भी सीधा रुपये में व्यापार करने का निर्णय लिया। भारत ने पड़ोसी देशों के साथ ‘फ्री ट्रेड डील’ करने का भी निर्णय लिया जिसका लाभ इस वर्ष देखने को लिए मिलेगा।

रूपे कार्ड और यूपीआई

रूपे कार्ड और यूपीआई भी आने वाले समय में वैश्विक पटल पर भारत की स्थिति को मजबूत करने वाला है। दरअसल दुनियाभर के डिजिटल पेमेंट और कार्ड बाजार में मास्टर कार्ड और वीजा का दबदबा है लेकिन भारत ने जिस तरह से डिजिटल पेमेंट में तीव्र गति से विकास किया है उसे देखते हुए सउदी अरब जैसे दुनिया के कई देश भारत के रूपे कार्ड और यूपीआई को अपने देशों में अनुमति दे रहे हैं।

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मध्यस्थ के रूप में भारत

2022 में भारत वैश्विक मंच पर कई बार मध्यस्थ के रूप में दिखा है। उदाहरण के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बातचीत हुई। इसके बाद 1 जुलाई 2022 को भी दोनों नेताओं के बीच फोन पर बात हुई। इसके बाद उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए SCO सम्मेलन से इतर पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता भी हुई। पीएम मोदी ने यहां पुतिन से जो कहा वो दुनियाभर में चर्चा का विषय बना रहा। पुतिन से बातचीत करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “यह दौर युद्ध का नहीं है.” यहां तक की यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमीर जेलेंस्की और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगातार प्रधानमंत्री मोदी से बीते वर्ष संपर्क में बने रहे हैं। अब 2023 में पूरी-पूरी संभावनाएं हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध को रुकवाने में भारत की भूमिका बड़ी होने वाली हैं।

चीन सीमा विवाद

2022 में भारत और चीन के संबंध ठीक नहीं रहे। उदाहरण के लिए हम अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन के सैनिकों की हिंसक झड़प को देख सकेत हैं। लेकिन भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) के 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी। इस प्रस्ताव के अंतर्गत माउंटेड गन सिस्टम, बख्तरबंद वाहन और रडार की खरीद करने जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं। भारत का यह फैसला आने वाले समय की तैयारी को दर्शाता है। हालांकि जिस प्रकार एस. जयशंकर और अन्य नेताओं ने वैश्विक पटल पर चीन को लताड़ते हुए भारत की बात रखी है। इस वर्ष उसमें विकास देखने के लिए मिलेगा।

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भारत और पाकिस्तान

भारत पाकिस्तान को वैसे तो कई वर्षों से आतंकवाद के मुद्दे पर लताड़ता आ रहा है लेकिन 2022 में हुए यूएनएसी सम्मेलन में जब पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने कश्मीर को लेकर भारत का घेराव करने का प्रयास किया तब एस. जयशंकर ने बिलावाल भुट्टो को सख्ती के साथ चुप करा दिया था। भारत पाकिस्तान को लेकर हमेशा से मुखर रहा है, चाहे वह पीओके का मुद्दा हो या फिर आतंकवाद का मुद्दा हो या फिर संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान जैसे देश को आर्थिक सहायता देने पर वोट न करना हो। इस वर्ष भी ऐसे ही पाकिस्तान को भारत उसकी औकात दिखाता रहेगा और आर्थिक और व्यापारिक रूप से उसका पूरी तरह से विरोध करता रहेगा।

अमेरिका और पाकिस्तान

अमेरिका पाकिस्तान का साथ देकर कैसे पर्दे के पीछे से आतंकवाद को बढ़ावा देने का माध्यम बन रहा है, यह किसी से नहीं छिपा है। अभी हाल ही में उसने महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता को स्थापित करने के नाम पर पाकिस्तान को 200 मिलियन डॉलर देने का फैसला किया है। पहले भी उसने बाढ़ ग्रस्त पाकिस्तान को तीन करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता राशि देने की घोषणा की थी। कुछ महीने पहले तो उसने पाकिस्तान को 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर के F-16 लड़ाकू जेट बेड़े के रखरखाव कार्यक्रम को मंजूरी दे दी है। इन राशियों का उपयोग पाकिस्तान अपने किन नापाक इदारों को साधने के लिए करेगा यह समझना बहुत सरल है। भारत और रूस की नजदीकियों से तिलमिलाए अमेरिका ने ऐसे कई कदम भारत को नीचा दिखाने के लिए उठाए हैं। लेकिन 2022 में जिस तरह से भारत हर मोर्चे पर दृढ़ता से अमेरिका और पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देता रहा है, 2023 में भी वह इसी दृढ़ता के साथ अपने हित में फैसले लेता रहेगा।

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