TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    बीजेपी में बदलाव

    हिमाचल नगर निगम चुनाव में भाजपा का दबदबा, 4 में से 3 नगर निगमों पर जमाया कब्जा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    राजीव गांधी

    जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

    Cockroach Janta Party

    Cockroach Janta Party ने दिल्ली प्रदर्शन से पहले तीन प्रवक्ताओं का किया ऐलान, नेताओं की पृष्ठभूमि पर छिड़ी बहस

    रुद्रम-2 मिसाइल

    रुद्रम-2 मिसाइल के सफल परीक्षण से भारत की रक्षा ताकत बढ़ी, दुश्मन के रडार सिस्टम को 300 किमी दूर से कर सकती है तबाह

    बीजेपी में बदलाव

    हिमाचल नगर निगम चुनाव में भाजपा का दबदबा, 4 में से 3 नगर निगमों पर जमाया कब्जा

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भी तेजी से बढ़ रहा

    UPI ने मई में 29.9 लाख करोड़ रुपये के लेनदेन के साथ बनाया नया रिकॉर्ड, भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था हुई और मजबूत

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    $40 अरब का ऐतिहासिक निवेश, सेमीकंडक्टर और एआई: पीएम मोदी की 5 देशों की यात्रा से भारत को क्या हासिल हुआ?

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    रुपये की गिरावट रोकने को आरबीआई देगा ‘कड़वी दवाई’: रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, बढ़ सकती हैं ब्याज दरें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    सोने-चांदी के भाव धड़ाम: क्या वाकई फूट गया चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड स्तर से ₹1.92 लाख तक टूटी कीमतें

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    ब्रह्मोस मिसाइल

    ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए बढ़ी भारत की रक्षा ताकत, वियतनाम से समझौता, इंडोनेशिया के साथ सौदा अंतिम चरण में

    अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना का नेतृत्व करने के बाद अजय कोचर ने वाइस चीफ का पद संभाला

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0

    ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

    एनडीए के कई पूर्व छात्र देश के बड़े सैन्य

    एनडीए की 150वीं पासिंग आउट परेड आज, 77 साल के इतिहास का खास पल

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल,

    तुलसी गबार्ड के इस्तीफे से वॉशिंगटन में सियासी भूचाल, निजी संकट या व्हाइट हाउस का दबाव?

    कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस

    चीन को ‘कैंसर’ बताने पर घिरीं ईयू प्रमुख कैलस, बयान बना वैश्विक कूटनीतिक विवाद

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    ‘अगर मैं गया तो मारा जाऊंगा’, क्या ईरान के डर से बेटे की शादी में नहीं जा रहे ट्रंप, किस बात का खौफ?

    एक फोन कॉल और बढ़ती नाराज़गी—भारत को लेकर ट्रंप क्यों खफा

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूस से तेल आयात जारी रखेगा भारत, ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का सख्त रुख

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    गोवा राज्य स्थापना दिवस

    गोवा राज्य स्थापना दिवस 2025: जानिए इतिहास, महत्व और इस दिन से जुड़ी खास बातें

    1950 में जेल से रिहा किए जाने के बाद सावरकर (चित्र: savarkar.org)

    अंग्रेज़ों की ही नहीं, नेहरू सरकार की कैद में भी महीनों रहे थे सावरकर

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    हर चौथे छात्र ने मांगी अपनी आंसर शीट, CBSE के डिजिटल चेकिंग सिस्टम से उठा भरोसा?

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    मिथिलांचल के लिए ऐतिहासिक दिन: अटल सरकार में मिली थी संवैधानिक पहचान, अब मोदी सरकार में CBSE पाठ्यक्रम में शामिल हुई मैथिली!

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल

    ड्रोन रूट, स्लीपर सेल और IED का जाल: National Investigation Agency ने 4 राज्यों में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क पर कसा शिकंजा

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    भारत वैश्विक क्रिप्टो रेस में कहाँ खड़ा है?

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    हेयर किट की कीमतें अलग-अलग ब्रांड्स में क्यों बदलती हैं?​

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज शिप

    कैरिबियन प्रिंसेस क्रूज पर नोरोवायरस का हमला: 3116 यात्रियों वाले क्रूज शिप पर 115 लोग बीमार

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

जब अंग्रेजों ने पहली बार भारत में देखा नारी-शक्ति का शौर्य: घोड़े पर सवार होकर रानी चेनम्मा ने छुड़ाए छक्के, कित्तूर में ढेर हुए कई आक्रांता

Shiv Chaudhary द्वारा Shiv Chaudhary
23 October 2024
in चर्चित
जब अंग्रेजों ने पहली बार भारत में देखा नारी-शक्ति का शौर्य: घोड़े पर सवार होकर रानी चेनम्मा ने छुड़ाए छक्के, कित्तूर में ढेर हुए कई आक्रांता
Share on FacebookShare on X

झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की बहादुरी के किस्से भारत में हर किसी की जबान पर हैं लेकिन रानी लक्ष्मीबाई से कहीं पहले दक्षिण भारत की एक वीरांगना रानी चेन्नम्मा अंग्रेजों ने लड़ाई लड़ रही थीं। नारी शक्ति की प्रतीक चेन्नम्मा का जन्म आज ही के दिन (23 अक्टूबर) 1778 में कर्नाटक के वर्तमान बेलगावी जिले के एक छोटे से गांव कागती में हुआ था। इतिहासकार नंदिता कृष्णा ने रानी चेन्नम्मा को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह का नेतृत्व करने वाली पहली भारतीय शासक बताया है। चेन्नम्मा ने कित्तूर के राजा मल्ल्सर्ज से शादी की और वह कित्तूर की रानी बन गईं। मल्ल्सर्ज पहले से शादीशुदा थे लेकिन चेन्नम्मा ने उनसे वादा किया कि वह उनकी पहली पत्नी को अपनी बड़ी बहन की तरह मानेंगी और उन्होंने आजीवन इस प्रण को निभाया।

बाघ का शिकार और चेन्नम्मा-मल्ल्सर्ज की मुलाकात

चेन्नम्मा और मल्ल्सर्ज की पहली मुलाकात की कहानी भी किसी वीरता के किस्से से कम नहीं है। सदाशिव वाडियार ने अपनी किताब ‘रानी चेन्नम्मा’ में इस मुलाकात का दिलचस्प वाक्या साझा किया है। कहानी बेलगावी के कित्तूर के गांवों के नजदीक शुरू होती है। उस दौर में इन गांवों में एक नरभक्षी बाघ का आतंक फैला हुआ था और इस आतंक से निपटने के लिए राजा ने बाघ को मारने की ठान ली थी। जनता को परेशान देख राजा कुछ लोगों के साथ बाघ को मारने के लिए जंगल में निकल पड़े।

संबंधितपोस्ट

‘भारत पर इस्लामी आक्रमण होगा, तो किस तरफ होंगे सेना के मुस्लिम’? अंबेडकर को था संदेह, लिखा – इस्लाम के लिए हमारा देश दारुल हर्ब

आज से ही के दिन तालिबान ने तोड़ी थीं बुद्ध की 2 हजार वर्ष पुरानी प्रतिमाएं, लेकिन भीम-मीम एकता के अनुयायी इस कृत्य पर 25 वर्ष बाद भी कुछ लिख बोल नहीं सकते

‘शिवायण’: भ्रांतियों से सत्य की ओर जाने का रास्ता बताती पुस्तक

और लोड करें

राजा को जैसे ही बाघ नजर आया उन्होंने एक ही तीर में उसे ढेर कर दिया और वे बाघ को देखने के लिए उसके नजदीक पहुंचे। राजा ने वहां पहुंचकर देखा कि बाघ पर एक नहीं, बल्कि दो–दो तीर लगे हुए थे। तभी एक युवती राजा के पास आई आकर बोली कि बाघ उसके तीर से मरा है। युवती की बहादुरी देख राजा मोहित हो गए। यह युवती चेन्नम्मा थी और राजा ने इसके बाद चेन्नम्मा से शादी करने का तय कर लिया था।

मल्ल्सर्ज की मृत्यु

रानी चेन्नम्मा जिस दौर में राजनीति में कदम रख रही थीं उस दौर में ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रभाव भारत पर बढ़ रहा था। रानी चेन्नम्मा जिस राजवंश से थी वे पेशवाओं के जागीरदार थे। क्वीनी प्रधान अपनी किताब ‘रानीज़ ऐंड द राज’ में लिखती हैं, “1813 में करों के भुगतान पर विवाद के कारण मल्ल्सर्ज को पेशवाओं के आदेश पर बंदी बना लिया गया था। लगभग 3 साल तक जेल में रहने के बाद वे बीमार हो गए थे। यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मृत्यु जेल में रहते हुए हुई या उनकी गंभीर स्थिति के कारण उन्हें रिहा कर दिया गया और कित्तूर पहुंचने पर उनकी मृत्यु हुई।”

मल्लसर्ज के पहली रानी से दो पुत्र शिवलिंगरूद्र सर्जा और वीररूद्र सर्जा थे जबकि रानी चेन्नम्मा से उनके पुत्र शिवा बसवराज थे। मल्लसर्ज की मृत्यु के बाद शिवलिंगरूद्र सर्जा गद्दी पर बैठे तब तक उनके दोनों भाइयों को निधन हो गया था। शिवलिंगरूद्र ने 1818 में तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध में अंग्रेजों की मदद करने का फैसला किया क्योंकि वे पेशवा को अपने पिता की मौत के लिए जिम्मेदार मानते थे। अंग्रेजों ने युद्ध जीतकर पेशवाओं के इलाके कब्जा लिए और वे कित्तूर के मालिक बन गए।

इस बीच अंग्रेजों ने कित्तूर के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत उन्हें अंग्रेजों को सालाना कर देना था और बदले में अंग्रेजों ने उनके काम में हस्तक्षेप न करने और शिवलिंगरूद्र के बेटों को कित्तूर की विरासत की गारंटी दी। इस दौरान चेन्नम्मा अपने सौतेले बेटे के साथ कित्तूर का शासन चला रही थीं। 1824 में शिवलिंगरूद्र को TB हो गया, उनके कोई बच्चा नहीं था तो तय किया गया कि उनके उत्तराधिकारी को गोद लिया जाएगा। सिंतबर में जब वह बुरी तरह बीमार हो गए तो उन्होंने बच्चा गोद लेने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया।

उत्तराधिकारी का संकट

अर्चना गरोडिया गुप्ता ने अपनी किताब ‘वुमन हू रूल्ड इंडिया: लीडर्स, वॉरियर्स, आइकन्स’ में लिखती हैं, “12 सितंबर को शिवलिंगरूद्र के एक विश्वास पात्र ने ब्रिटिश राजनीतिक एजेंट क्षेत्र के कलेक्टर सेंट जॉन ठाकरे को एक पत्र लिखकर अपनी बीमारी और उत्तराधिकारी गोद लेने की जानकारी दी। ठाकरे ने तुरंत एक सर्जन को वहां भेजा लेकिन तब तक राजा की मौत हो चुकी थी।” अर्चना गरोडिया गुप्ता लिखती हैं कि ठाकरे ने दावा किया कि राजा का किसी को गोद लेने का कोई इरादा नहीं था और उन्हें भेजे गए पत्र पर किए गए हस्ताक्षर नकली थे। ठाकरे का मानना था कि अब राज को अंग्रेजों को सौंप दिया जाना चाहिए।

अंग्रेज अधिकारियों ने इसके बाद तय कि वे कित्तूर के खजाने और सरकार पर नियंत्रण रखेंगे और वे यह जांच करेंगे की बच्चे को गोद लिया जाना सही थी या नहीं। अंग्रेजों के इस व्यवहार से नाराज चेन्नमा ने 8 अक्टूबर 1824 को बॉम्बे के गवर्नर माउंट स्टुअर्ट ऐलफिन्सटन के पास वकील भेजा लेकिन उनकी शासन चलाने से जुड़ी याचिका का कोई असर नहीं हुआ। ठाकरे के व्यवहार से दुखी चेन्नमा अलग-अलग ब्रिटिश अधिकारियों को पत्र लिखती रहीं लेकिन उनकी कहीं नहीं सुनी गई।

चेन्नम्मा की अंग्रेजों से पहली लड़ाई

अर्चना गरोडिया गुप्ता लिखती हैं, “18 अक्टूबर को चेन्नम्मा ने अपने विश्वास पात्रों की एक बैठक बुलाकर एलान कर दिया कि ‘कित्तूर के लोगों को जिंदगी से ज्यादा आजादी प्यारी है। लोग ब्रिटिश के गुलाम बनने से ज्यादा मरना पसंद करेंगे।” ठाकरे ने इसे गंभीरता से ना लेते हुए हथियारों के प्रदर्शन से कित्तूर की जनता को डराने की सोची और कलधागी से बेलगाम जा रहे ब्रिटिश सैनिकों को कित्तूर से होकर जाने को कह दिया जिससे वह लोगों में दहशत पैदा कर सके। 20 अक्टूबर को सैनिक कित्तूर पहुंचे और उन्होंने ठाकरे के आदेश पर चेन्नम्मा के सरदारों को पकड़ने की नियत से किले पर हमला कर दिया लेकिन उन्हें मुंह की खाना पड़ी। कित्तूर के सैनिकों ने कई अंग्रेज सैनिकों को बंदी बना लिया। इसके बाद ठाकरे ने ऑफर दिया कि अगर चेन्नम्मा सरेंडर करती हैं तो वह उन्हें 11 गांव देने के लिए तैयार है। हालांकि, चेन्नम्मा ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया और ठाकरे से मुलाकात भी नहीं की। 23 अक्टूबर 1824 को अंग्रेज सैनिकों ने एक बार फिर किले पर हमला किया और तोप से दरवाजा उड़ा दिया। किले के भीतर करीब 5000 सैनिक मौजूद थे और उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों पर हमला बोल दिया। किले की प्राचीर से घोड़े पर सवार चेन्नमा इस लड़ाई का नेतृत्व कर रही थीं, इसमें ठाकरे समेत सैकड़ों ब्रिटिश सैनिक मारे गए थे।

कुछ अंग्रेजों को बंधक बना लिया गया और अधिकारियों से पत्र लिखकर मांग की गई कि अंग्रेज बच्चे को गोद लिए जाने से जुड़ी मंजूरी दें। इससे अंग्रेजों के मन में डर पैदा हो गया कि कहीं इससे पूरे दक्षिण क्षेत्र में बगावत की शुरुआत ना हो जाए। अंग्रेजों ने चेन्नम्मा की मांगों को मानने से इनकार कर दिया और पूरे दक्कन क्षेत्र से 25,000 सैनिकों को कित्तूर रवाना कर दिया।

चित्तूर में निर्णायक लड़ाई

25 नवंबर तक 25,000 सैनिकों ने कित्तूर को घेर लिया। इस दौरान बातचीत करने आए एक अंग्रेज अधिकारी ने चेन्नम्मा के वकील को आश्वासन दिया कि यदि बचे हुए 2 ब्रिटिश बंधको को रिहा कर दिया जाता है, तो वह युद्ध रोक देंगे। 2 दिसंबर की रात बंधकों को रिहा कर दिया गया लेकिन अंग्रेज अपने वादे से पलट गए और चेन्नम्मा को आत्मसमर्पण के लिए अगली सुबह 10 बजे तक का वक्त दिया। चेन्नम्मा ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और इस तरह एक निर्णायक युद्ध की शुरुआत हुई। अलग-अलग जगहों पर ब्रिटिश और कित्तूर के सैनिकों की लड़ाइयां हुई लेकिन वे हार गए।

आखिरकार 4 दिसंबर को अंग्रेजों को इस लड़ाई में निर्णायक सफलता मिली और चेन्नम्मा समेत कई सरदारों को पकड़ लिया गया। चेन्नम्मा के मुख्य सलाहकार गुरुसिदप्पा समेत कई लोगों को फांसी दे दी गई। अंग्रेजों ने उनके महल को ध्वस्त कर दिया और उसके मलबे को 5 रुपये प्रति गाड़ी के हिसाब से बेच दिया गया। चेन्नम्मा से कित्तूर को अंग्रेजों को सौंपने के लिए एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए गए और उन्हें बैलहोंगल के किले में कैद कर दिया गया। जेल में कैद महिलाओं को हर साल 40,000 रुपये की पेंशन दी जाती थी। करीब 4 वर्षों बाद 1829 में चेन्नम्मा की मृत्यु हो गई और उन्होंने अपने जीवन के आखिरी वर्ष जेल में धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेते हुए बिताए थे।

स्रोत: Kittur Chennamma, Chennamma, History, British Raj, कित्तूर, चेन्नम्मा, इतिहास,
Tags: British RajChennammaHistoryKittur Chennammaइतिहासकित्तूरचेन्नम्मा
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

धर्मांतरण कार्यक्रम में शामिल थी भारत की स्टार क्रिकेटर? वीडियो वायरल; सोशल मीडिया पर आई मीम्स की बाढ़

अगली पोस्ट

उत्सव में उत्पात: पैरों से गिराए दीये, रंगोली को किया बर्बाद… जामिया मिलिया में ‘फिलिस्तीन जिंदाबाद’ के नारे

संबंधित पोस्ट

हेलीकॉप्टर के सामने पायलट ने किया प्रपोज
चर्चित

हेलीकॉप्टर के सामने पायलट ने किया प्रपोज, गर्लफ्रेंड को रिंग पहनाते ही गूंज उठीं तालियां

4 June 2026

महाराष्ट्र के नासिक में आयोजित एक सैन्य पायलट ग्रेजुएशन समारोह उस समय और भी यादगार बन गया, जब एक युवा सैन्य अधिकारी ने अपनी ट्रेनिंग...

राजीव गांधी
चर्चित

जब राजीव गांधी ने दूरदर्शन को दिए थे तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की कवरेज न करने के निर्देश

4 June 2026

आज जब दुनिया तियानआनमेन स्क्वायर नरसंहार की 37 वीं बरसी को याद कर रही है, तो टैंकों के सामने खड़े उस शख्स (जिसे दुनिया में...

NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी ने की आत्महत्या
चर्चित

NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में लिखा- ‘मम्मी-पापा, मुझे माफ कर दीजिए’

4 June 2026

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी का सपना था कि वह डॉक्टर बनकर अपने परिवार की गरीबी दूर करे। लेकिन यह...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Rudram 2 Success: Made in India Missile Ready To Crush Enemy Radars| DRDO’s Big Breakthrough

Rudram 2 Success: Made in India Missile Ready To Crush Enemy Radars| DRDO’s Big Breakthrough

00:03:46

From Runways to Warships: India’s Firefighting Warrior Built for Bases & Battles| IAF | VayuShakti

00:05:40

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited