राजनीति के जानकारों की मानें तो काजोलकर को पद्म भूषण देने का फैसला उनके कांग्रेस से जुड़े पुराने निष्ठा और योगदान से प्रेरित था। कई आलोचकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस पार्टी की उस नीति का हिस्सा था, जिसके तहत डॉ. आंबेडकर के राजनीतिक और वैचारिक प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की गई।
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    शशि त्रिपाठी अपनी प्रदर्शनी में शहर और प्रकृति के सह-अस्तित्व को दर्शाती कला के साथ

    शशि त्रिपाठी की कला: शहर और प्रकृति के बीच का मौन संवाद

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: बलिदान और संघर्ष से जन्मा बांग्लादेश

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश के उदय की कहानी

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    रेल मंत्रालय की मंथन योजना शताब्दी एक्सप्रेस की जगह वंदे भारत चेयर कार

    शताब्दी एक्सप्रेस को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी, वंदे भारत चेयर कार कोचों का बड़ा प्लान

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान के ऐतिहासिक ध्वज का पुनरुत्थान: संस्कृति, बदलाव और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक

    ईरान का ऐतिहासिक ध्वज: संस्कृति, बदलाव और गर्व का प्रतीक

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या के खिलाफ सिंध में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी

    फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को ऑनलाइन हमलों का सामना

    ट्रंप की फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को MAGA समर्थकों के विरोध का सामना

    छात्रवृत्ति वापसी से प्रभावित यूके–यूएई अकादमिक संबंध

    मुस्लिम ब्रदरहुड विवाद के बीच यूके विश्वविद्यालयों से यूएई की छात्रवृत्ति वापस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    शशि त्रिपाठी अपनी प्रदर्शनी में शहर और प्रकृति के सह-अस्तित्व को दर्शाती कला के साथ

    शशि त्रिपाठी की कला: शहर और प्रकृति के बीच का मौन संवाद

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: बलिदान और संघर्ष से जन्मा बांग्लादेश

    ज़ंजीरों से आज़ादी तक: पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश के उदय की कहानी

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

    रेल मंत्रालय की मंथन योजना शताब्दी एक्सप्रेस की जगह वंदे भारत चेयर कार

    शताब्दी एक्सप्रेस को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी, वंदे भारत चेयर कार कोचों का बड़ा प्लान

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    हमसे दुश्मनी महंगी पड़ेगी: भारत की सतर्कता और बांग्लादेश की गलती, जानें बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ रही चोट

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था

    ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

    16 दिसंबर को पाकिस्तान के पूर्वी मोर्चे के कमांडर जनरल ए के नियाजी ने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर किया था

    ढाका सरेंडर: जब पाकिस्तान ने अपने लोगों की अनदेखी की और अपने देश का आधा हिस्सा गंवा दिया

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    संसद हमले की बरसी: आपको कॉन्स्टेबल कमलेश कुमारी याद हैं? 

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान के ऐतिहासिक ध्वज का पुनरुत्थान: संस्कृति, बदलाव और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक

    ईरान का ऐतिहासिक ध्वज: संस्कृति, बदलाव और गर्व का प्रतीक

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या के खिलाफ सिंध में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी

    फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को ऑनलाइन हमलों का सामना

    ट्रंप की फंडिंग फ्रीज़ रोकने के बाद भारतीय-अमेरिकी जज को MAGA समर्थकों के विरोध का सामना

    छात्रवृत्ति वापसी से प्रभावित यूके–यूएई अकादमिक संबंध

    मुस्लिम ब्रदरहुड विवाद के बीच यूके विश्वविद्यालयों से यूएई की छात्रवृत्ति वापस

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    क्यों PariPesa भारत रोमांचक एविएटर क्रैश गेम्स का अनुभव लेने के लिए सबसे बेहतरीन जगह है

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

दो-दो चुनावों में हरवाने से लेकर कोड़े मारने वाले कार्टून तक, जानिए कांग्रेस ने आंबेडकर का कब-कब किया अपमान

राजनीति के जानकारों की मानें तो काजोलकर को पद्म भूषण देने का फैसला उनके कांग्रेस से जुड़े पुराने निष्ठा और योगदान से प्रेरित था। कई आलोचकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस पार्टी की उस नीति का हिस्सा था, जिसके तहत डॉ. आंबेडकर के राजनीतिक और वैचारिक प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की गई।

himanshumishra द्वारा himanshumishra
20 December 2024
in इतिहास, चर्चित, ज्ञान, राजनीति
बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू

डॉ. आंबेडकर को राजनीतिक रूप से हाशिए पर रखने की यह परंपरा नेहरू के बाद उनकी बेटी इंदिरा गांधी के दौर में भी जारी रही

Share on FacebookShare on X

मंगलवार (17 दिसंबर, 2024) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संविधान चर्चा के दौरान ‘भारत रत्न’ बाबा साहेब आंबेडकर पर दिए गए बयान ने कांग्रेस की पाखंडी राजनीति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। कांग्रेस, जो आज ‘आंबेडकर-आंबेडकर’ का राग अलाप रही है, असल में वही पार्टी है जिसने बाबासाहेब को हमेशा हाशिए पर रखा और उनके विचारों को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अमित शाह के बयान पर हंगामा मचाने वाली कांग्रेस ने नेहरू के काल से ही इतिहास में न केवल आंबेडकर का अपमान किया, बल्कि उनके खिलाफ चुनावी साजिशें रचीं और उनकी विरासत को मिटाने का प्रयास किया।

पीएम मोदी और अमित शाह ने इसे कांग्रेस की साजिश करार दिया, और यह सच भी है कि बाबासाहेब के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस ने ही उन्हें 2 बार चुनाव हरवाया और भारत रत्न से वंचित रखा। यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की तुष्टीकरण और पाखंड की राजनीति का असली चेहरा उजागर करता है, जो लंबे समय से भारतीय राजनीति और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर भारी पड़ा है।

संबंधितपोस्ट

विधेयकों को मंजूरी देने के लिए समयसीमा से बाध्य नहीं हैं राष्ट्रपति और राज्यपाल , प्रेसिडेंट मुर्मू के सवालों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या जवाब दिया, और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?

जन्मदिवस विशेष: नाभा जेल में नेहरू की बदबूदार कोठरी और बाहर निकलने के लिए अंग्रेजों को दिया गया ‘वचनपत्र’

जनता की ज़मीन, सत्ता की जागीर नहीं: मानेसर लैंड डील में भूपेंद्र हुड्डा को झटका, न्याय ने कांग्रेस के ‘विकास मॉडल’ की खोल दी पोल

और लोड करें

आंबेडकर Vs नेहरू: एक ऐतिहासिक विवाद

‘जय भीम’ का नारा अलापने वाली कांग्रेस आज तुष्टिकरण की राजनीति के तहत ‘आंबेडकर-आंबेडकर’ कर रही है, लेकिन इतिहास इसका एक अलग ही चेहरा दिखाता है। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव आंबेडकर के बीच अनेक वैचारिक मतभेद थे, जो कई मौकों पर सार्वजनिक तौर पर उजागर हुए।

पहला आम चुनाव (1952)

देश के पहले आम चुनाव (1952) में यह वैचारिक विरोध चरम पर दिखा। नेहरू ने डॉ. आंबेडकर के खिलाफ बंबई (उत्तर-मध्य) लोकसभा सीट पर नारायण सदाशिव काजोलकर को खड़ा किया। काजोलकर एक साधारण पृष्ठभूमि से थे, जिन्हें नेहरू ने अपना पूरा समर्थन दिया। नेहरू के प्रभावशाली भाषणों और कांग्रेस के प्रचार तंत्र ने काजोलकर को बढ़त दिलाई। परिणामस्वरूप, डॉ. आंबेडकर इस चुनाव में हार गए और चौथे स्थान पर रहे। काजोलकर ने इस चुनाव में 1,38,137 वोट प्राप्त किए, जबकि आंबेडकर को केवल 1,23,576 वोट ही मिले। इस चुनाव के दौरान एक नारा बहुत प्रसिद्ध हुआ: “Ph.D. वाले आंबेडकर के सामने मक्खन बेचने वाला नौसिखिया काजोलकर।”

भंडारा उपचुनाव (1954)

पहले आम चुनाव की हार के बाद, डॉ. आंबेडकर ने भंडारा लोकसभा सीट से उपचुनाव (1954) लड़ा। लेकिन यहां भी उन्हें नेहरू का समर्थन नहीं मिला। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में भी आंबेडकर के खिलाफ अपने उम्मीदवार को उतारा और नेहरू ने पूरी ताकत से प्रचार किया। नतीजतन, आंबेडकर को इस उपचुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा।

नेहरू का पत्र

नेहरू की आंबेडकर के प्रति असहमति उनकी निजी भावनाओं में भी झलकती थी। नेहरू ने एडविना माउंटबेटन को लिखे एक पत्र में आंबेडकर की हार पर अपनी खुशी जाहिर की थी।

संविधान सभा में विवाद

यह विवाद केवल चुनावों तक सीमित नहीं था। संविधान सभा के दौरान भी नेहरू और आंबेडकर के बीच मतभेद स्पष्ट थे। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, नेहरू संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी में आंबेडकर को शामिल करने के खिलाफ थे। लेकिन महात्मा गांधी के दबाव के कारण आंबेडकर को यह जिम्मेदारी दी गई। इसके बावजूद, संविधान निर्माण के दौरान नेहरू और आंबेडकर के बीच कई मुद्दों पर टकराव होता रहा।

NCERT का कार्टून विवाद

संविधान निर्माण में आंबेडकर की धीमी प्रगति को लेकर नेहरू की नाराजगी 11वीं कक्षा की एनसीईआरटी की किताब में दिखाए गए एक कार्टून में भी नजर आती है। इसमें आंबेडकर को एक कछुए पर बैठे दिखाया गया है, जबकि नेहरू चाबुक लेकर उनकी निगरानी कर रहे हैं।

आंबेडकर के इस अपमानजनक कार्टून पर योगेंद्र यादव को देना पड़ा था इस्तीफा

नेहरू और आंबेडकर के बीच मतभेदों का यह इतिहास कांग्रेस की मौजूदा “जय भीम” राजनीति पर सवाल उठाता है। यह घटनाएं दिखाती हैं कि दलितों के अधिकारों और संविधान निर्माण के मुद्दे पर भी दोनों के बीच गहरी असहमति थी। कांग्रेस का वर्तमान “आंबेडकर प्रेम” केवल राजनीतिक तुष्टिकरण का प्रतीक है।

नसरुद्दीन अहमद Vs आंबेडकर

नेहरू ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं द्वारा भी आंबेडकर पर कई जघन्य आरोप लगाए गए हैं। इसमें एक नाम शामिल था संविधान सभा में मुस्लिमों का प्रतिनिधि करने वाले राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता नसरुद्दीन अहमद का। उनका मनना था कि आंबेडकर समेत ड्राफ्टिंग कमेटी के अन्य लोग जो संसद द्वारा दिए गए सुझावों संविधान में चेंज ही नहीं करते थे बल्कि अपने ही ढंग से संविधान को ड्राफ्ट करते थे और उनका आरोप यह भी था की ये ऐसे भी चीज़ें लिख देते थे जो संविधान सभा में डिसकस ही नहीं किया गया था.

इंदिरा गांधी Vs आंबेडकर: एक और उपेक्षा का अध्याय

पंडित नेहरू के बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने डॉ. भीमराव आंबेडकर को वह प्रसिद्धि और सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे। डॉ. आंबेडकर को राजनीतिक रूप से हाशिए पर रखने की यह परंपरा इंदिरा गांधी के दौर में भी जारी रही।

काजोलकर को पद्म भूषण से सम्मानित करना (1971)

1952 के आम चुनाव में बंबई (उत्तर-मध्य) से डॉ. आंबेडकर को हराने वाले नारायण सदाशिव काजोलकर को इंदिरा गांधी सरकार ने 1971 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह सम्मान “सार्वजनिक सेवा” के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया।

राजनीतिक समीकरणों का प्रभाव

राजनीति के जानकारों की मानें तो काजोलकर को पद्म भूषण देने का फैसला उनके कांग्रेस से जुड़े पुराने निष्ठा और योगदान से प्रेरित था। कई आलोचकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस पार्टी की उस नीति का हिस्सा था, जिसके तहत डॉ. आंबेडकर के राजनीतिक और वैचारिक प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की गई।

कांग्रेस की राजनीति पर सवाल

इंदिरा गांधी के शासनकाल में काजोलकर को यह सम्मान देने को लेकर सवाल उठे कि क्या यह वास्तव में उनकी योग्यता का सम्मान था या डॉ. आंबेडकर के खिलाफ कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक दुश्मनी का हिस्सा। यह घटना कांग्रेस द्वारा दलित राजनीति को अपने फायदे के लिए मोड़ने की रणनीति की ओर इशारा करती है।

राहुल गांधी Vs आंबेडकर: विचारधारा और राजनीति का टकराव

पंडित नेहरू के कार्यकाल से लेकर इंदिरा गांधी और 2014 तक सत्ता में रही यूपीए सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर को वह सम्मान और स्थान नहीं दिया, जिसके वे असल हकदार थे। 2024 के आम चुनावों के प्रचार के दौरान भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी आंबेडकर की विचारधारा का नाम लेकर जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा दे रहे थे और इन दिनों भी वही कर रहे हैं।

जाति विनाश की आंबेडकर की विचारधारा

डॉ. आंबेडकर का जीवन जाति को खत्म करने के लिए समर्पित था। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “जाति का विनाश” (Annihilation of Caste) में उन्होंने जाति व्यवस्था की कड़ी आलोचना करते हुए इसे समाज और मानवता के लिए सबसे बड़ी बाधा बताया।
– आंबेडकर ने स्पष्ट किया कि जाति व्यवस्था समाज को बांटती है और समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे जैसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों को नकारती है।
– उन्होंने कांग्रेस पर यह आरोप लगाया था कि उसने कभी भी जातिवाद को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, बल्कि इसे बनाए रखने का काम किया।

राहुल गांधी और जाति की राजनीति

आज राहुल गांधी, जिनका नारा “जाति जाति” करते नहीं थकता, उन्हीं डॉ. आंबेडकर के विचारों को नकारते हुए उनकी विरासत का उपयोग केवल चुनावी फायदे के लिए कर रहे हैं।
– कांग्रेस ने जाति और धर्म के आधार पर तुष्टिकरण की राजनीति का चलन शुरू किया, जो आज भी जारी है।
– राहुल गांधी की रैलियों में संविधान का प्रदर्शन और “आंबेडकर के भारत” का नारा केवल एक दिखावा है।

संविधान का दुरुपयोग

डॉ. आंबेडकर ने जिस संविधान का निर्माण किया, उसे कांग्रेस ने अपने तानाशाही रवैये से बार-बार कुचलने का काम किया।
– संविधान में मनमाने बदलाव और जनता के अधिकारों को कमजोर करने की राजनीति कांग्रेस के शासनकाल की प्रमुख पहचान रही है।
– राहुल गांधी की “संविधान की रक्षा” की बातें केवल एक राजनीतिक हथकंडा हैं।

नेहरू, इंदिरा, और राहुल की कांग्रेस का रवैया

पंडित नेहरू के दौर से शुरू हुई डॉ. आंबेडकर को अनदेखा करने की यह परंपरा इंदिरा गांधी के शासन में भी जारी रही और आज राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस भी उसी राह पर चल रही है।
– कांग्रेस ने आंबेडकर के विचारों को केवल चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन उनकी असली विरासत और योगदान को वह सम्मान कभी नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे।

ऐसे में पंडित नेहरू के समय से शुरू हुई डॉ. आंबेडकर को नजरअंदाज करने की यह परंपरा इंदिरा गांधी के दौर में और भी गहराई, और आज राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस में यह पूरी तरह से स्थापित हो चुकी है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कांग्रेस ने हमेशा डॉ. आंबेडकर के योगदान को केवल एक राजनीतिक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल किया और उनके विचारों व संघर्षों को सही सम्मान और स्थान देने से कतराती रही। कांग्रेस की यह नीति न केवल आंबेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि यह देश में जातिवाद और सामाजिक भेदभाव को बनाए रखने की उसकी रणनीति को भी उजागर करती है।

स्रोत: Babasahab Dr Bhimrao Ambedkar, बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर, Jawahar Lal Nehru, जवाहर लाल नेहरू, कांग्रेस, Congress, अमित शाह, Amit Shah
Tags: Babasaheb Dr Bhimrao AmbedkarCongressJawahar lal Nehruparliamentकांग्रेसजवाहरलाल नेहरूबाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकरसंसद
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

272 के पड़ गए लाले, फिर कैसे आएगा दो-तिहाई बहुमत? ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर संसद में दिखी कमजोरी दूर करे BJP

अगली पोस्ट

पोलियो से भी नहीं मानी हार, 5 बार CM रहे लेकिन बिखर गया परिवार: नहीं रहे ओम प्रकाश चौटाला, संभाली थी देवीलाल की विरासत

संबंधित पोस्ट

शशि त्रिपाठी अपनी प्रदर्शनी में शहर और प्रकृति के सह-अस्तित्व को दर्शाती कला के साथ
राजनीति

शशि त्रिपाठी की कला: शहर और प्रकृति के बीच का मौन संवाद

10 January 2026

शशि त्रिपाठी, नेवी वेलफेयर और वेलनेस एसोसिएशन (NWWA) की अध्यक्ष, एक जानी-मानी और संवेदनशील दृश्य कलाकार हैं, जिनका काम प्रकृति और शहरीकरण के बीच एक...

ज़ंजीरों से आज़ादी तक: बलिदान और संघर्ष से जन्मा बांग्लादेश
भारत

ज़ंजीरों से आज़ादी तक: पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश के उदय की कहानी

10 January 2026

बांग्लादेश का जन्म इतिहास का कोई साधारण अध्याय नहीं था। यह एक ऐसा घाव था जो कभी पूरी तरह भर नहीं सका, और साथ ही...

पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता
भारत

पूर्व पीएम हसीना ने अलार्म बजाया: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता और कानून की विफलता

9 January 2026

हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय को लक्षित करके हुई कई लिंचिंग, हत्याओं और हिंसक हमलों के बाद, बर्खास्त प्रधानमंत्री शेख हसीना ने...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37

‘Mad Dog’ The EX CIA Who Took Down Pakistan’s A.Q. Khan Nuclear Mafia Reveals Shocking Details

00:06:59

Dhurandar: When a Film’s Reality Shakes the Left’s Comfortable Myths

00:06:56
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited