राजनीति के जानकारों की मानें तो काजोलकर को पद्म भूषण देने का फैसला उनके कांग्रेस से जुड़े पुराने निष्ठा और योगदान से प्रेरित था। कई आलोचकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस पार्टी की उस नीति का हिस्सा था, जिसके तहत डॉ. आंबेडकर के राजनीतिक और वैचारिक प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की गई।
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    आम आदमी पार्टी में बड़ा बदलाव: राज्यसभा में राघव चड्डा की भूमिका कम, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी

    आम आदमी पार्टी में बड़ा बदलाव: राज्यसभा में राघव चड्डा की भूमिका कम, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी

    पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR पर विवाद, विरोध-प्रदर्शन ने लिया उग्र रूप

    पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR पर विवाद, विरोध-प्रदर्शन ने लिया उग्र रूप

    दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल की बरी होने के खिलाफ ईडी की याचिका पर लिया संज्ञान, मांगा जवाब

    दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल की बरी होने के खिलाफ ईडी की याचिका पर लिया संज्ञान, मांगा जवाब

    पीएम मोदी ने लगाया कांग्रेस पर ईंधन अफवाह फैलाने की राजनीति का आरोप लगाया, कहा कि भारत मजबूती से खड़ा है

    पीएम मोदी ने लगाया कांग्रेस पर ईंधन अफवाह फैलाने की राजनीति का आरोप लगाया, कहा कि भारत मजबूती से खड़ा है

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    WTO बैठक में भारत की मजबूत पैरवी : न्यायसंगत और विकास-केंद्रित वैश्विक व्यापार ढांचे पर जोर

    WTO बैठक में भारत की मजबूत पैरवी : न्यायसंगत और विकास-केंद्रित वैश्विक व्यापार ढांचे पर जोर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    अप्रैल से बड़ा फैसला: TP-Link, Hikvision समेत चीनी CCTV कैमरों पर सख्ती की तैयारी

    अप्रैल से बड़ा फैसला: TP-Link, Hikvision समेत चीनी CCTV कैमरों पर सख्ती की तैयारी

    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    NASA का Artemis II मिशन: SLS रॉकेट के साथ इंसानों की चांद की ओर वापसी

    NASA का Artemis II मिशन: SLS रॉकेट के साथ इंसानों की चांद की ओर वापसी

    आइंस्टीन की थ्योरी से खुला ब्रह्मांड का रहस्य, वैज्ञानिकों ने खोजा सबसे शक्तिशाली स्पेस लेजर

    आइंस्टीन की थ्योरी से खुला ब्रह्मांड का रहस्य, वैज्ञानिकों ने खोजा सबसे शक्तिशाली स्पेस लेजर

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    आम आदमी पार्टी में बड़ा बदलाव: राज्यसभा में राघव चड्डा की भूमिका कम, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी

    आम आदमी पार्टी में बड़ा बदलाव: राज्यसभा में राघव चड्डा की भूमिका कम, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी

    पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR पर विवाद, विरोध-प्रदर्शन ने लिया उग्र रूप

    पश्चिम बंगाल के मालदा में SIR पर विवाद, विरोध-प्रदर्शन ने लिया उग्र रूप

    दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल की बरी होने के खिलाफ ईडी की याचिका पर लिया संज्ञान, मांगा जवाब

    दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल की बरी होने के खिलाफ ईडी की याचिका पर लिया संज्ञान, मांगा जवाब

    पीएम मोदी ने लगाया कांग्रेस पर ईंधन अफवाह फैलाने की राजनीति का आरोप लगाया, कहा कि भारत मजबूती से खड़ा है

    पीएम मोदी ने लगाया कांग्रेस पर ईंधन अफवाह फैलाने की राजनीति का आरोप लगाया, कहा कि भारत मजबूती से खड़ा है

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    पश्चिम एशिया वैश्विक कूटनीति की सबसे कठिन परीक्षा है, प्रधानमंत्री मोदी और भारत इस परीक्षा के लिए कितने तैयार हैं?

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    वैश्विक संकट के बीच ईंधन कर में कटौती: तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र ने उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम बढ़ाया

    WTO बैठक में भारत की मजबूत पैरवी : न्यायसंगत और विकास-केंद्रित वैश्विक व्यापार ढांचे पर जोर

    WTO बैठक में भारत की मजबूत पैरवी : न्यायसंगत और विकास-केंद्रित वैश्विक व्यापार ढांचे पर जोर

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    मेक इन इंडिया को बढ़ावा: सेंसर, टॉरपीडो और रॉकेट से लैस पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘मालवन’ नौसेना में शामिल

    अप्रैल से बड़ा फैसला: TP-Link, Hikvision समेत चीनी CCTV कैमरों पर सख्ती की तैयारी

    अप्रैल से बड़ा फैसला: TP-Link, Hikvision समेत चीनी CCTV कैमरों पर सख्ती की तैयारी

    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    “ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भारत अलर्ट, दो ‘ब्रह्मास्त्र’ तैनात, मिसाइल और ड्रोन के लिए बनेंगे काल”

    बिपिन रावत

    ‘इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड’: जनरल बिपिन रावत का सेना को लेकर देखा गया स्वप्न फ़िलहाल अधूरा ज़रूर है, लेकिन उसने सैन्य सुधार की एक मज़बूत नींव रख दी है

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    ट्रंप का बड़ा फैसला: अटॉर्नी जनरल पाम बोंडी को हटाया, अब ‘हिट लिस्ट’ में कौन?

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    क्या अमेरिका नाटो से अलग हो सकता है? ट्रंप के बयान और कानूनी पेचों की पूरी कहानी

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बिना ठोस समझौते के युद्ध विराम का खतरा: क्या ईरान और मजबूत होकर उभरेगा?

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    बगदाद में दिनदहाड़े अमेरिकी पत्रकार का अपहरण, CCTV में कैद सनसनीखेज वारदात

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

    NASA का Artemis II मिशन: SLS रॉकेट के साथ इंसानों की चांद की ओर वापसी

    NASA का Artemis II मिशन: SLS रॉकेट के साथ इंसानों की चांद की ओर वापसी

    आइंस्टीन की थ्योरी से खुला ब्रह्मांड का रहस्य, वैज्ञानिकों ने खोजा सबसे शक्तिशाली स्पेस लेजर

    आइंस्टीन की थ्योरी से खुला ब्रह्मांड का रहस्य, वैज्ञानिकों ने खोजा सबसे शक्तिशाली स्पेस लेजर

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत अलर्ट, CCS बैठक में बड़ी रणनीति

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Crazy Time Game tricks: What Really Works and What Doesn’t

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    Exploring Mostbet in Nepal – Making the Most of Bonuses and Taking Your Betting to the Next Level

    सुनील गावस्कर का सनग्रुप से तीखा सवाल

    सुनील गावस्कर का काव्या मारन की टीम से सीधा तीखा सवाल…कहां भारतीयों के खून का पैसा बर्बाद न करें

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

दो-दो चुनावों में हरवाने से लेकर कोड़े मारने वाले कार्टून तक, जानिए कांग्रेस ने आंबेडकर का कब-कब किया अपमान

राजनीति के जानकारों की मानें तो काजोलकर को पद्म भूषण देने का फैसला उनके कांग्रेस से जुड़े पुराने निष्ठा और योगदान से प्रेरित था। कई आलोचकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस पार्टी की उस नीति का हिस्सा था, जिसके तहत डॉ. आंबेडकर के राजनीतिक और वैचारिक प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की गई।

himanshumishra द्वारा himanshumishra
20 December 2024
in इतिहास, चर्चित, ज्ञान, राजनीति
बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू

डॉ. आंबेडकर को राजनीतिक रूप से हाशिए पर रखने की यह परंपरा नेहरू के बाद उनकी बेटी इंदिरा गांधी के दौर में भी जारी रही

Share on FacebookShare on X

मंगलवार (17 दिसंबर, 2024) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा संविधान चर्चा के दौरान ‘भारत रत्न’ बाबा साहेब आंबेडकर पर दिए गए बयान ने कांग्रेस की पाखंडी राजनीति को एक बार फिर उजागर कर दिया है। कांग्रेस, जो आज ‘आंबेडकर-आंबेडकर’ का राग अलाप रही है, असल में वही पार्टी है जिसने बाबासाहेब को हमेशा हाशिए पर रखा और उनके विचारों को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अमित शाह के बयान पर हंगामा मचाने वाली कांग्रेस ने नेहरू के काल से ही इतिहास में न केवल आंबेडकर का अपमान किया, बल्कि उनके खिलाफ चुनावी साजिशें रचीं और उनकी विरासत को मिटाने का प्रयास किया।

पीएम मोदी और अमित शाह ने इसे कांग्रेस की साजिश करार दिया, और यह सच भी है कि बाबासाहेब के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस ने ही उन्हें 2 बार चुनाव हरवाया और भारत रत्न से वंचित रखा। यह विवाद सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस की तुष्टीकरण और पाखंड की राजनीति का असली चेहरा उजागर करता है, जो लंबे समय से भारतीय राजनीति और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर भारी पड़ा है।

संबंधितपोस्ट

14 मार्च 2005 को चीन ने ताइवान के खिलाफ एंटी-सेसेशन कानून पारित कर अलगाववाद रोकने की दी चेतावनी

ओम बिरला को हटाने का प्रस्ताव: संसद में सरकार-विपक्ष आमने-सामने

एआई समिट विरोध के बाद असर: शर्टलेस प्रदर्शनों से देशभर में तनाव पैदा

और लोड करें

आंबेडकर Vs नेहरू: एक ऐतिहासिक विवाद

‘जय भीम’ का नारा अलापने वाली कांग्रेस आज तुष्टिकरण की राजनीति के तहत ‘आंबेडकर-आंबेडकर’ कर रही है, लेकिन इतिहास इसका एक अलग ही चेहरा दिखाता है। भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और डॉ. भीमराव आंबेडकर के बीच अनेक वैचारिक मतभेद थे, जो कई मौकों पर सार्वजनिक तौर पर उजागर हुए।

पहला आम चुनाव (1952)

देश के पहले आम चुनाव (1952) में यह वैचारिक विरोध चरम पर दिखा। नेहरू ने डॉ. आंबेडकर के खिलाफ बंबई (उत्तर-मध्य) लोकसभा सीट पर नारायण सदाशिव काजोलकर को खड़ा किया। काजोलकर एक साधारण पृष्ठभूमि से थे, जिन्हें नेहरू ने अपना पूरा समर्थन दिया। नेहरू के प्रभावशाली भाषणों और कांग्रेस के प्रचार तंत्र ने काजोलकर को बढ़त दिलाई। परिणामस्वरूप, डॉ. आंबेडकर इस चुनाव में हार गए और चौथे स्थान पर रहे। काजोलकर ने इस चुनाव में 1,38,137 वोट प्राप्त किए, जबकि आंबेडकर को केवल 1,23,576 वोट ही मिले। इस चुनाव के दौरान एक नारा बहुत प्रसिद्ध हुआ: “Ph.D. वाले आंबेडकर के सामने मक्खन बेचने वाला नौसिखिया काजोलकर।”

भंडारा उपचुनाव (1954)

पहले आम चुनाव की हार के बाद, डॉ. आंबेडकर ने भंडारा लोकसभा सीट से उपचुनाव (1954) लड़ा। लेकिन यहां भी उन्हें नेहरू का समर्थन नहीं मिला। कांग्रेस ने इस उपचुनाव में भी आंबेडकर के खिलाफ अपने उम्मीदवार को उतारा और नेहरू ने पूरी ताकत से प्रचार किया। नतीजतन, आंबेडकर को इस उपचुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा।

नेहरू का पत्र

नेहरू की आंबेडकर के प्रति असहमति उनकी निजी भावनाओं में भी झलकती थी। नेहरू ने एडविना माउंटबेटन को लिखे एक पत्र में आंबेडकर की हार पर अपनी खुशी जाहिर की थी।

संविधान सभा में विवाद

यह विवाद केवल चुनावों तक सीमित नहीं था। संविधान सभा के दौरान भी नेहरू और आंबेडकर के बीच मतभेद स्पष्ट थे। कुछ इतिहासकारों के अनुसार, नेहरू संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी में आंबेडकर को शामिल करने के खिलाफ थे। लेकिन महात्मा गांधी के दबाव के कारण आंबेडकर को यह जिम्मेदारी दी गई। इसके बावजूद, संविधान निर्माण के दौरान नेहरू और आंबेडकर के बीच कई मुद्दों पर टकराव होता रहा।

NCERT का कार्टून विवाद

संविधान निर्माण में आंबेडकर की धीमी प्रगति को लेकर नेहरू की नाराजगी 11वीं कक्षा की एनसीईआरटी की किताब में दिखाए गए एक कार्टून में भी नजर आती है। इसमें आंबेडकर को एक कछुए पर बैठे दिखाया गया है, जबकि नेहरू चाबुक लेकर उनकी निगरानी कर रहे हैं।

आंबेडकर के इस अपमानजनक कार्टून पर योगेंद्र यादव को देना पड़ा था इस्तीफा

नेहरू और आंबेडकर के बीच मतभेदों का यह इतिहास कांग्रेस की मौजूदा “जय भीम” राजनीति पर सवाल उठाता है। यह घटनाएं दिखाती हैं कि दलितों के अधिकारों और संविधान निर्माण के मुद्दे पर भी दोनों के बीच गहरी असहमति थी। कांग्रेस का वर्तमान “आंबेडकर प्रेम” केवल राजनीतिक तुष्टिकरण का प्रतीक है।

नसरुद्दीन अहमद Vs आंबेडकर

नेहरू ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं द्वारा भी आंबेडकर पर कई जघन्य आरोप लगाए गए हैं। इसमें एक नाम शामिल था संविधान सभा में मुस्लिमों का प्रतिनिधि करने वाले राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता नसरुद्दीन अहमद का। उनका मनना था कि आंबेडकर समेत ड्राफ्टिंग कमेटी के अन्य लोग जो संसद द्वारा दिए गए सुझावों संविधान में चेंज ही नहीं करते थे बल्कि अपने ही ढंग से संविधान को ड्राफ्ट करते थे और उनका आरोप यह भी था की ये ऐसे भी चीज़ें लिख देते थे जो संविधान सभा में डिसकस ही नहीं किया गया था.

इंदिरा गांधी Vs आंबेडकर: एक और उपेक्षा का अध्याय

पंडित नेहरू के बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने डॉ. भीमराव आंबेडकर को वह प्रसिद्धि और सम्मान नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे। डॉ. आंबेडकर को राजनीतिक रूप से हाशिए पर रखने की यह परंपरा इंदिरा गांधी के दौर में भी जारी रही।

काजोलकर को पद्म भूषण से सम्मानित करना (1971)

1952 के आम चुनाव में बंबई (उत्तर-मध्य) से डॉ. आंबेडकर को हराने वाले नारायण सदाशिव काजोलकर को इंदिरा गांधी सरकार ने 1971 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। यह सम्मान “सार्वजनिक सेवा” के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया।

राजनीतिक समीकरणों का प्रभाव

राजनीति के जानकारों की मानें तो काजोलकर को पद्म भूषण देने का फैसला उनके कांग्रेस से जुड़े पुराने निष्ठा और योगदान से प्रेरित था। कई आलोचकों का मानना है कि यह कदम कांग्रेस पार्टी की उस नीति का हिस्सा था, जिसके तहत डॉ. आंबेडकर के राजनीतिक और वैचारिक प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की गई।

कांग्रेस की राजनीति पर सवाल

इंदिरा गांधी के शासनकाल में काजोलकर को यह सम्मान देने को लेकर सवाल उठे कि क्या यह वास्तव में उनकी योग्यता का सम्मान था या डॉ. आंबेडकर के खिलाफ कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक दुश्मनी का हिस्सा। यह घटना कांग्रेस द्वारा दलित राजनीति को अपने फायदे के लिए मोड़ने की रणनीति की ओर इशारा करती है।

राहुल गांधी Vs आंबेडकर: विचारधारा और राजनीति का टकराव

पंडित नेहरू के कार्यकाल से लेकर इंदिरा गांधी और 2014 तक सत्ता में रही यूपीए सरकार ने डॉ. भीमराव आंबेडकर को वह सम्मान और स्थान नहीं दिया, जिसके वे असल हकदार थे। 2024 के आम चुनावों के प्रचार के दौरान भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी आंबेडकर की विचारधारा का नाम लेकर जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा दे रहे थे और इन दिनों भी वही कर रहे हैं।

जाति विनाश की आंबेडकर की विचारधारा

डॉ. आंबेडकर का जीवन जाति को खत्म करने के लिए समर्पित था। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “जाति का विनाश” (Annihilation of Caste) में उन्होंने जाति व्यवस्था की कड़ी आलोचना करते हुए इसे समाज और मानवता के लिए सबसे बड़ी बाधा बताया।
– आंबेडकर ने स्पष्ट किया कि जाति व्यवस्था समाज को बांटती है और समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे जैसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों को नकारती है।
– उन्होंने कांग्रेस पर यह आरोप लगाया था कि उसने कभी भी जातिवाद को खत्म करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, बल्कि इसे बनाए रखने का काम किया।

राहुल गांधी और जाति की राजनीति

आज राहुल गांधी, जिनका नारा “जाति जाति” करते नहीं थकता, उन्हीं डॉ. आंबेडकर के विचारों को नकारते हुए उनकी विरासत का उपयोग केवल चुनावी फायदे के लिए कर रहे हैं।
– कांग्रेस ने जाति और धर्म के आधार पर तुष्टिकरण की राजनीति का चलन शुरू किया, जो आज भी जारी है।
– राहुल गांधी की रैलियों में संविधान का प्रदर्शन और “आंबेडकर के भारत” का नारा केवल एक दिखावा है।

संविधान का दुरुपयोग

डॉ. आंबेडकर ने जिस संविधान का निर्माण किया, उसे कांग्रेस ने अपने तानाशाही रवैये से बार-बार कुचलने का काम किया।
– संविधान में मनमाने बदलाव और जनता के अधिकारों को कमजोर करने की राजनीति कांग्रेस के शासनकाल की प्रमुख पहचान रही है।
– राहुल गांधी की “संविधान की रक्षा” की बातें केवल एक राजनीतिक हथकंडा हैं।

नेहरू, इंदिरा, और राहुल की कांग्रेस का रवैया

पंडित नेहरू के दौर से शुरू हुई डॉ. आंबेडकर को अनदेखा करने की यह परंपरा इंदिरा गांधी के शासन में भी जारी रही और आज राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस भी उसी राह पर चल रही है।
– कांग्रेस ने आंबेडकर के विचारों को केवल चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल किया, लेकिन उनकी असली विरासत और योगदान को वह सम्मान कभी नहीं दिया, जिसके वे हकदार थे।

ऐसे में पंडित नेहरू के समय से शुरू हुई डॉ. आंबेडकर को नजरअंदाज करने की यह परंपरा इंदिरा गांधी के दौर में और भी गहराई, और आज राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस में यह पूरी तरह से स्थापित हो चुकी है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि कांग्रेस ने हमेशा डॉ. आंबेडकर के योगदान को केवल एक राजनीतिक हथकंडे के रूप में इस्तेमाल किया और उनके विचारों व संघर्षों को सही सम्मान और स्थान देने से कतराती रही। कांग्रेस की यह नीति न केवल आंबेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ है, बल्कि यह देश में जातिवाद और सामाजिक भेदभाव को बनाए रखने की उसकी रणनीति को भी उजागर करती है।

स्रोत: Babasahab Dr Bhimrao Ambedkar, बाबासाहब डॉ भीमराव आंबेडकर, Jawahar Lal Nehru, जवाहर लाल नेहरू, कांग्रेस, Congress, अमित शाह, Amit Shah
Tags: Babasaheb Dr Bhimrao AmbedkarCongressJawahar lal Nehruparliamentकांग्रेसजवाहरलाल नेहरूबाबासाहब डॉ भीमराव अंबेडकरसंसद
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

272 के पड़ गए लाले, फिर कैसे आएगा दो-तिहाई बहुमत? ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर संसद में दिखी कमजोरी दूर करे BJP

अगली पोस्ट

पोलियो से भी नहीं मानी हार, 5 बार CM रहे लेकिन बिखर गया परिवार: नहीं रहे ओम प्रकाश चौटाला, संभाली थी देवीलाल की विरासत

संबंधित पोस्ट

आम आदमी पार्टी में बड़ा बदलाव: राज्यसभा में राघव चड्डा की भूमिका कम, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी
राजनीति

आम आदमी पार्टी में बड़ा बदलाव: राज्यसभा में राघव चड्डा की भूमिका कम, अशोक मित्तल को नई जिम्मेदारी

2 April 2026

आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने संसदीय ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए राज्यसभा में अपने डिप्टी लीडर के पद से राघव चड्ढा को...

हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा
चर्चित

हनुमान जयंती 2026: जानिए पवनपुत्र हनुमान के जन्म की पौराणिक कथा

2 April 2026

चैत्र मास की पूर्णिमा का दिन हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसी दिन भगवान हनुमान का जन्मोत्सव बड़े श्रद्धा और उत्साह के...

सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?
ज्ञान

सरकारी ईमेल सिस्टम में बड़ा बदलाव: Gmail से Zoho Mail की ओर क्यों बढ़ा भारत?

2 April 2026

हाल के दिनों में यह खबर चर्चा में है कि भारत सरकार ने बड़ी संख्या में अपने आधिकारिक ईमेल अकाउंट्स को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

Ethanol, EVs and Solar- How India’s Energy Game Is Changing | Modi on LPG & Crude Oil | war| Hormuz

00:05:21

Truth of IRIS Dena: 8 Days That Changed Narrative | War zone Reality, Not an Indian Navy Exercise

00:08:02

300 Million Euros for SCALP: Strategic Necessity or Costly Dependency on France300

00:04:06

Tejas Mk1A: 19th aircraft coupled but Not Delivered: What Is Holding Back the IAF Induction?

00:07:21

Agni-3 Launch Decoded: Why Test an Active Nuclear Missile That’s Already Deployed?

00:05:05
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited