ओशो का नाता कई विवादों से रहा जिनमें अमरीका प्रवास को लेकर उठा विवाद बेहद प्रमुख है। साल 1981 से 1985 के बीच वो अमेरिका में रहे। अमरीकी प्रांत ओरेगॉन में उन्होंने आश्रम की स्थापना की तथा इस आश्रम की विशेषता ये थी कि यह 65,000 एकड़ में फैला था।
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    सीएम योगी ने जताई बच्चों के भविष्य की चिंता, स्मार्टफोन मां बाप बच्चों को न दें।

    सीएम योगी ने बच्चों की भविष्य की जताई चिंता कहा- स्माटफोन है खतरनाक

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों को मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल के पावन अवसर पर शुभकामनाएं दीं

    पीेेेएम मोदी ने देशवासियों को दी मकर संक्राति , माघ बिहू और पोंगल की शुभकामनाएं कहा-सूर्यदेव सबका कल्याण करें

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    आईआईटी मद्रास ने रैमजेट तकनीक से चलने वाले 155 मिमी के तोप के गोले विकसित किए हैं

    रैमजेट पावर्ड शेल ? तोप का ये गोला क्यों साबित होने वाला है गेमचेंजर ?

    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ , भारत पर क्या पड़ेगा असर?

    चीन में 10 जनवरी 2026 को छठा पुलिस दिवस

    10 जनवरी छठा चीनी पुलिस दिवस: विदेशों तक फैल रहा चीन का दमन, तिब्बत के बाद ताइवान पर नया निशाना

    ईरान के ऐतिहासिक ध्वज का पुनरुत्थान: संस्कृति, बदलाव और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक

    ईरान का ऐतिहासिक ध्वज: संस्कृति, बदलाव और गर्व का प्रतीक

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या के खिलाफ सिंध में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    सीएम योगी ने जताई बच्चों के भविष्य की चिंता, स्मार्टफोन मां बाप बच्चों को न दें।

    सीएम योगी ने बच्चों की भविष्य की जताई चिंता कहा- स्माटफोन है खतरनाक

    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देशवासियों को मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल के पावन अवसर पर शुभकामनाएं दीं

    पीेेेएम मोदी ने देशवासियों को दी मकर संक्राति , माघ बिहू और पोंगल की शुभकामनाएं कहा-सूर्यदेव सबका कल्याण करें

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    PMAY U 2.0 और आवास फायनेंसियर्स: आसान EMI के साथ अपना घर कैसे बनाए?

    खनन क्षेत्र में बेहतरीन काम के लिए केंद्र सरकार ने धामी सरकार की तारीफ की

    खनन सुधारों में फिर नंबर वन बना उत्तराखंड, बेहतरीन काम के लिए धामी सरकार को केंद्र सरकार से मिली 100 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    तेल, हीरे और हिंदुस्तान की नई भू-राजनीति: जब अफ्रीका की धरती पर एक साथ गूंजेगी भारत की सभ्यता, रणनीति और शक्ति की आवाज

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    80% खेती सिंधु पर, तालाब भी नहीं बचे! भारत की जल-नीति और अफगानिस्तान के फैसले ने पाकिस्तान को रेगिस्तान में धकेला, अब न पानी होगा, न रोटी, न सेना की अकड़

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    भारत के लिए राफेल की डील होनी बड़ी सफलता है।

    भारत–फ्रांस के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों पर बड़ी सहमति, नागपुर में बनेगी असेंबली लाइन

    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    आईआईटी मद्रास ने रैमजेट तकनीक से चलने वाले 155 मिमी के तोप के गोले विकसित किए हैं

    रैमजेट पावर्ड शेल ? तोप का ये गोला क्यों साबित होने वाला है गेमचेंजर ?

    वेनेजुएला के मामले में भारत की नपी-तुली प्रतिक्रिया रही है

    वेनेजुएला-अमेरिका संघर्ष पर भारत का संतुलित रुख क्या दर्शाता है ?

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ

    ईरान से कारोबार करने वाले देशों पर अमेरिका का 25% टैरिफ , भारत पर क्या पड़ेगा असर?

    चीन में 10 जनवरी 2026 को छठा पुलिस दिवस

    10 जनवरी छठा चीनी पुलिस दिवस: विदेशों तक फैल रहा चीन का दमन, तिब्बत के बाद ताइवान पर नया निशाना

    ईरान के ऐतिहासिक ध्वज का पुनरुत्थान: संस्कृति, बदलाव और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक

    ईरान का ऐतिहासिक ध्वज: संस्कृति, बदलाव और गर्व का प्रतीक

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या के खिलाफ सिंध में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन

    पाकिस्तान में हिंदू लड़के की हत्या पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    भारतीय संविधान और मौलिक अधिकार

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकार बाहर से नहीं आए, इनकी संकल्पना भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से मौजूद है

    भारतीय संविधान

    हमारा संविधान: मौलिक अधिकारों की संकल्पना हमारे लिए नई नहीं है, ये भारतीय ज्ञान परंपरा का अभिन्न हिस्सा है

    औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था

    वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

    गुरु गोबिंद सिंह जी ने मुगल शासक औरंगज़ेब की अधीनता स्वीकार करने से इंकार कर दिया

    वीर बाल दिवस: उत्सवों के बीच साहिबज़ादों के अमर बलिदान को नमन

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    आतंक के खिलाफ बड़ा कदम: J&K में 5 सरकारी कर्मचारियों की सेवा समाप्त

    जम्मू कश्मीर में 5 सरकारी कर्मचारी सेवा से बर्खास्त , जानें क्यों मनोज सिन्हा ने लिया यह फैसला?

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    The Rise of Live Dealer Games in Asia: Why Players Prefer Real-Time Interaction

    शोले फिल्म में पानी की टंकी पर चढ़े धर्मेंद्र

    बॉलीवुड का ही-मैन- जिसने रुलाया भी, हंसाया भी: धर्मेंद्र के सिने सफर की 10 नायाब फिल्में

    नीतीश कुमार

    जेडी(यू) के ख़िलाफ़ एंटी इन्कंबेसी क्यों नहीं होती? बिहार में क्यों X फैक्टर बने हुए हैं नीतीश कुमार?

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

बचपन में ही मृत्यु को देखा, डेढ़ लाख पुस्तकें पढ़ डालीं…मध्य प्रदेश के चंद्रमोहन जैन ऐसे बन गए थे ओशो

'संभोग से समाधि की ओर' पुस्तक में ओशो ने काम ऊर्जा का विश्लेषण कर उसे अध्यात्म की यात्रा में सहयोगी बताया है

architsingh द्वारा architsingh
11 December 2024
in इतिहास, चर्चित
ओशो ने 'लाआत्सु पुस्तकालय' नाम से अपनी एक लाइब्रेरी भी बनाई थी

ओशो ने 'लाआत्सु पुस्तकालय' नाम से अपनी एक लाइब्रेरी भी बनाई थी

Share on FacebookShare on X

दुनिया में अलग–अलग समय पर अनेक ऐसी विभूतियाँ हुईं जिन्होंने अपनी विलक्षणता के कारण इस विश्व में अपनी अलग पहचान स्थापित की। इन महान विभूतियों ने अपने विचारों के माध्यम से तत्कालीन समाज को तो जाग्रत किया है आज भी इनके विचार मनुष्य के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्हीं अनेक महान व्यक्तित्वों में से एक थे ओशो। आज उनकी जयंती के अवसर पर हम अपनी चर्चा उन्हीं के इर्द गिर्द केंद्रित करेंगे।

ओशो व आचार्य रजनीश के नाम से प्रसिद्ध इस महान विचारक व दार्शनिक का जन्म 11 दिसंबर 1931 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गाँव कुचवाड़ा में हुआ था। बचपन में इनका नाम चंद्रमोहन जैन था। इनके जन्म के संबंध में एक रोचक प्रसंग हमें मिलता है। अपने जन्म के तीन दिनों तक ओशो न तो रोए तथा न ही हंसे। ओशो के नाना–नानी इस बात को लेकर काफी चिंतित थे किन्तु तीन दिन बाद जब ओशो हंसे तथा रोए, तब इनके नाना–नानी ने राहत की सांस ली। ओशो के नाना–नानी ने नवजात अवस्था में ही इनके चेहरे पर एक अद्‌भुत आभामण्डल देखा था। जन्म से जुड़े इस प्रसंग का जिक्र ओशो ने अपनी किताब ‘स्वर्णिम बचपन की यादें‘ (‘ग्लिप्सेंस ऑफड माई गोल्डन चाइल्डहुड’) में किया है।

संबंधितपोस्ट

अधर्म पर धर्म की विजय के पर्व विजयदशमी को भागवद्गीता की दृष्टि से देखने पर क्या मिलता है?

लेह हिंसा में कांग्रेस का हाथ? क्या भाजपा कार्यालय में आगजनी सुनियोजित हमला था, दो पार्षदों की क्या है भूमिका?

सुहागरात पर हो गई दूल्हा-दुल्हन की मौत, बेड पर पत्नी-फंदे पर लटका मिला पति का शव…एक ही चिता पर हुआ अंतिम संस्कार

और लोड करें

ओशो के बचपन की चर्चा करते समय एक और रोचक प्रसंग हमें मिलता है जो इनकी कुंडली से जुड़ा है। बनारस के जिस ब्राह्मण ने ओशो की कुंडली बनाई उसने जन्म के समय कहा था कि यह बालक सात वर्ष की आयु तक ही जीवित रहेगा, यदि उससे अधिक आयु तक जीवित रह तो जरूर कोई महान व्यक्तित्व बनेगा। अतः उसने जन्म के समय ओशो की कुंडली इसीलिए नहीं बनाई कि सात वर्ष बाद उसका कोई लाभ नहीं रहता। कहा जाता है कि जन्म के सात वर्ष पश्चात ओशो को मृत्यु का अहसास हुआ किन्तु वे बच गए। सात वर्ष पश्चात जब पंडित ने कुंडली बनाई तो उसने कहा कि जीवन के 21 वर्ष तक प्रत्येक सातवें वर्ष में इस ओशो को मृत्यु का योग है।

ओशो अपने नाना और नानी से अत्यधिक प्रेम करते थे तथा उन्हीं के पास अधिकांश समय व्यतीत किया करते थे। जब ओशो 14 वर्ष के हुए तो उन्हें इस बात की जानकारी थी कि पंडित ने कुण्डली में मृत्यु का उल्लेख किया हुआ है। इसी को ध्यान में रखकर ओशो शक्कर नदी के पास स्थित एक पुराने शिव मंदिर में चले गए और सात दिनों तक वहाँ लेटकर मृत्यु की प्रतीक्षा करते रहे। सातवें दिन मंदिर में ओशो को एक सर्प दिखा तो उन्हें ऐसा प्रतीत हुआ कि यही उनकी मृत्यु है किन्तु सर्प वहाँ से चला गया। इस घटना के माध्यम से ओशो का मृत्यु से प्रत्यक्ष साक्षात्कार हुआ तथा उन्हें मृत्युबोध हुआ।

इनका बचपन इनके नाना–नानी के साथ गाडरवारा में बीता तथा इनकी उच्च शिक्षा जबलपुर में हुई। शिक्षा पूरी करने के बाद वे जबलपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भी रहे। कुछ समय पश्चात ही उन्होंने नौकरी त्याग दी और सन्यासी जीवन की ओर अग्रसर हुए। वास्तव में यहीं से ओशो के व्यक्तित्व का वह हिस्सा उभर कर आया जिसे आज कोई आध्यात्मिक गुरु तो कोई भगवान रजनीश या आचार्य रजनीश के नाम से जानता है।

सन्यासी जीवन में प्रवेश करने के पश्चात ओशो के आध्यात्मिक विचारों ने क्रांति फैला दी। कई बार ये विवादों में भी घिरे किन्तु इनकी ख्याति भारत से लेकर विदेशों तक में फैलती रही। ओशो को समझने के लिए ओशो को पढ़ना और सुनना आवश्यक हो जाता है। इनके द्वारा लिखा गया अधिकांश साहित्य वस्तुतः इनके प्रवचनों का ही संकलन है। आज भी डिजिटल मीडिया पर ओशो के विचारों को सुना जा सकता है तथा सच तो ये है कि वर्तमान में भी इनके अनेक अनुयायी हैं। ओशो को समझने के लिए बाजार में इनकी अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं, यहाँ यह जान लेना भी अपेक्षित है कि इनकी पुस्तकें वास्तव में लोगों के मध्य खूब लोकप्रिय हैं। हालाँकि इनके प्रवचनों पर आधारित अनेक पुस्तकें आज उपलब्ध हैं किंतु यहाँ हम उनकी कुछ प्रमुख पुस्तकों पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।

‘ध्यान योग, प्रथम और अंतिम मुक्ति‘ नामक शीर्षक से उपलब्ध यह पुस्तक ओशो द्वारा ध्यान पर दिए गए गहन प्रवचनों का संकलन है। इसमें ध्यान की अनेक विधियों का वर्णन है, जो हमारी सहायता कर सकती हैं। इस पुस्तक को ध्यान के लिए मार्गदर्शक की तरह प्रयोग किया जा सकता है किंतु यह तभी सम्भव होगा जब इसे प्रथम से अंतिम पृष्ठ तक पढा जाएगा। 

‘कृष्ण स्मृति‘ शीर्षक से प्रकाशित एक पुस्तक ओशो द्वारा कृष्ण के बहु–आयामी व्यक्तित्व पर दी गई 21 वार्ताओं और नवसंन्यास पर दिए गए एक खास उद्बोधन का विशेष संकलन है। यही वह प्रवचनमाला है, जिसके दौरान ओशो के साक्षित्व में संन्यास ने नए शिखर को छूने के लिए उत्प्रेरणा ली और ‘नव–संन्यास अंतरराष्ट्रीय‘ की संन्यास दीक्षा का सूत्रपात हुआ। इस दृष्टि से यह ओशो की महत्वपूर्ण पुस्तकों में से एक है। 

‘प्रेम–पंथ ऐसो कठिन‘ ओशो की यह पुस्तक प्रेम के तीन रूपों – प्रेम में गिरना, प्रेम में होना और प्रेम ही हो जाना को बहुत सटीकता के साथ स्पष्ट करती है। ओशो एक प्रश्नोत्तर प्रवचनमाला शुरू करते हैं और प्रेम व जीवन से जुड़े सवालों की गहरी थाह में श्रोताओं/पाठकों को गोता लगवाने लिए ले चलते हैं। यह विरह की, पीड़ा की, आनंद की, अभीप्सा की तथा तृप्ति की एक इंद्रधनुषी यात्रा जैसी है। आज भी युवाओं से लेकर प्रत्येक वर्ग में यह पुस्तक बेहद लोकप्रिय है।

इनकी कुछ पुस्तकें विवादित भी रहीं। ‘संभोग से समाधि की ओर‘ इनकी ऐसी ही एक बहुचर्चित और विवादित पुस्तक है, जिसमें ओशो ने काम ऊर्जा का विश्लेषण कर उसे अध्यात्म की यात्रा में सहयोगी बताया है। साथ ही यह किताब काम और उससे संबंधित सभी मान्यताओं और धारणाओं को एक सकारात्मक दृष्टिकोण देती है। बतौर ओशो ‘काम पाप नहीं है बल्कि यह भगवान तक पहुंचने का पहला पायदान है।‘

चूँकि ओशो ने अनेक पुस्तकें लिखीं ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि ओशो ने कितनी पुस्तकें पढ़ी हैं। एक डॉक्यूमेंट्री में ओशो खुद बताते हैं कि उन्होंने लगभग डेढ़ लाख पुस्तकों का अध्ययन किया। उन्होंने ‘लाआत्सु पुस्तकालय‘ नाम से अपनी एक लाइब्रेरी भी बनाई। ओशो अपने वक्तव्यों में कई बार उपनिषदों आदि के संदर्भ भी देते हैं, उन्होंने अनेक भारतीय विचारकों से लेकर प्लेटो, अरस्तू, नीत्शे आदि पाश्चात्य दार्शनिकों को भी पढ़ा। उन्होंने हिंदी साहित्य के एक प्रमुख साहित्यकार सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय‘ का उपन्यास ‘नदी के द्वीप‘ भी पढ़ा, जिससे वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने इसकी काफी प्रशंसा भी की। उनके शब्दों में ही कहें तो बतौर ओशो ‘इस हिन्दी उपन्यास का अब तक अंग्रेजी में अनुवाद नहीं हुआ है। ये अजीब है कि मेरे जैसा आदमी इसका जिक्र कर रहा है। इसका हिन्दी टाइटल नदी के द्वीप है, ये अंग्रेजी में ‘आईलैंड्स ऑफ अ रिवर बाय सच्चिदानंद हीरानंद’ नाम सेे हो सकता है। ये किताब उनके लिए है, जो ध्यान करना चाहते हैं। ये योगियों की किताब है। इसकी तुलना न तो टालस्टाय के किसी उपन्यास से हो सकती है और न ही चेखव के। इसका दुर्भाग्य यही है कि इसे हिन्दी में लिखा गया है। ये इतनी बेहतरीन है कि मैं इसके बारे में कुछ कहने से अधिक इसे पढ़कर इसका आनंद लेना उचित होगा। इतनी गहराई में जाकर बात करना बहुत मुश्किल है।’

निश्चित रूप से ओशो की ये पुस्तकें हमें ओशो के विचारों से अवगत कराती हैं, किन्तु इनकी फेहरिस्त बहुत लंबी है। ओशो को जानने के इच्छुक लोग इनके प्रवचनों पर आधारित पुस्तकों को तो पढ़ ही सकते हैं साथ ही ओशो के जीवन पर लिखी गयी अनेक पुस्तकों का अध्ययन भी कर सकते हैं। वसंत जोशी द्वारा लिखी ओशो की जीवनी ‘द ल्यूमनस रेबेल लाइफ़ स्टोरी ऑफ़ अ मैवरिक मिस्टिक’ में ओशो के जीवन के अनेक पक्ष हमारे सामने आते हैं। ओशो की सचिव रहीं आनंद शीला की आत्मकथा ‘डोंट किल हिम, द स्टोरी ऑफ़ माई लाइफ़ विद भगवान रजनीश’ को भी पढ़ा जा सकता है। इन पुस्तकों के अतिरिक्त भी अनेक पुस्तकें ओशो के जीवन पर लिखी गईं, जिन्हें पढ़कर ओशो के जीवन के अनेक अनछुए, अनसुने पक्षों को भी जाना जा सकता है।

ओशो का नाता कई विवादों से रहा जिनमें अमरीका प्रवास को लेकर उठा विवाद बेहद प्रमुख है। साल 1981 से 1985 के बीच वो अमेरिका में रहे। अमरीकी प्रांत ओरेगॉन में उन्होंने आश्रम की स्थापना की तथा इस आश्रम की विशेषता ये थी कि यह 65,000 एकड़ में फैला था। ओरेगॉन में ओशो के शिष्यों ने उनके आश्रम को रजनीशपुरम नाम से एक शहर के तौर पर रजिस्टर्ड कराना चाहा किन्तु स्थानीय लोगों ने तथा वहाँ के शासन ने इसका काफी विरोध किया। अमेरिकी सरकार ने उनपर अप्रवास नियमों का उल्लंघन करने के मामले में कई केस भी दर्ज किए, जिसके तहत उन्हें वहाँ जेल भी जाना पड़ा। कहा जाता है कि इसी दौरान उन्हें जेल में अधिकारियों ने थेलियम नामक धीरे असर वाला जहर दे दिया था। इसके बाद ओशो अमेरिका छोड़कर भारत लौट आए और पूना के आश्रम में रहने लगे। साल 1990 की 19 जनवरी को यहीं ओशो ने अंतिम सांस ली।

स्रोत: ओशो, आचार्य रजनीश, कृष्ण, ओशो पुस्तकें, ओशो के विचार, ओशो जीवनी, मृत्यु, संभोग से समाधि की ओर, Osho, Acharya Rajneesh, Krishna, Osho books, Osho's thoughts, Osho biography, death, sambhog se samadhi ki Aur,
Tags: Acharya RajneeshdeathKrishnaOshoOsho biographyOsho booksOsho's thoughtssambhog se samadhi ki Aurआचार्य रजनीशओशोओशो के विचारओशो जीवनीओशो पुस्तकेंकृष्णमृत्युसंभोग से समाधि की ओर
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

अतुल सुभाष आत्महत्या मामले में पत्नी और उसके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज, जांच में जुटी बंगलुरु और महाराष्ट्र पुलिस, प्रारंभिक जांच में हुआ खुलासा

अगली पोस्ट

बीआरएस नेता चेन्नमनेनी रमेश को घोषित किया गया जर्मन नागरिक, चुनावी धोखाधड़ी में ₹30 लाख का जुर्माना

संबंधित पोस्ट

समीर दास की हत्या से उजागर हुई बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की मुश्किलें
चर्चित

समीर दास की हत्या: बांग्लादेश में भीड़ की हिंसा और अल्पसंख्यक असुरक्षा

13 January 2026

बांग्लादेश में 28 साल के हिंदू ऑटो चालक समीर दास की निर्मम हत्या ने फिर से यह सवाल उठाया है कि देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों,...

डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस का महानिदेशक नियुक्त किया था
चर्चित

ब्रह्मोस एयरोस्पेस के DG & CEO की नियुक्ति रद्द,  ट्रिब्यूनल ने DRDO की चयन प्रक्रिया को बताया मनमाना

29 December 2025

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), हैदराबाद पीठ ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस के महानिदेशक (DG) की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। अधिकरण ने पाया कि रक्षा अनुसंधान...

औरंगज़ेब ने जोरावर सिंह और फतेह सिंह को दीवार मे ज़िंदा चुनवाने का आदेश दिया था
इतिहास

वीर बाल दिवस: क्रिसमस-नववर्ष का जश्न तो ठीक है लेकिन वीर साहिबजादों का बलिदान भी स्मरण रहे

26 December 2025

यह सप्ताह, वर्ष का अंतिम सप्ताह है। नए साल की दहलीज़ पर खड़े इस सप्ताह का इंतज़ार सबको ही रहता है, क्योंकि पहले क्रिसमस का...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

An Quiet Dialogue Between Nature and the City|Ft. Shashi Tripathi | Art| Indian Navy

00:03:24

Ramjet-Powered Shell: A Potential Game Changer for Indian Artillery| IIT Madra

00:06:25

Trump makes false apache deal claims, runs down India US relations

00:05:44

Captured Turkish YIHA drone Showed by the Indian Army |Defence News| Operation Sindoor

00:00:58

A War Won From Above: The Air Campaign That Changed South Asia Forever

00:07:37
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited