तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन में महाशिवरात्रि पर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाना था, जो हुआ भी। इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को शामिल होना था और कार्यक्रम से कुछ ही घंटे पहले यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह ने एक वीडियो जारी कर दिया। इस वीडियो में ईशा फाउंडेशन के प्रमुख और सनातन के नामचीन आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव उर्फ सद्गुरु पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। कई लोगों ने इस वीडियो की टाइमिंग पर सवाल उठाए थे और एक धड़े ने ईशा फाउंडेशन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग भी की थी। अब ईशा फाउंडेशन ने भी इस मामले पर चुप्पी तोड़ दी है।
ईशा फाउंडेशन ने क्या कहा?
ईशा फाउंडेशन ने शुक्रवार (28 फरवरी) को ‘X’ पर एक पोस्ट किया और ‘सद्गुरु व संस्था को बदनाम करने के संगठित प्रयास’ की कड़े शब्दों में निंदा की है। ईशा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए लिखा, “इस बार, जनता को गुमराह करने और हमें बदनाम करने के लिए फर्जी ईमेल का इस्तेमाल किया जा रहा है।” सद्गुरु की संस्था ने पोस्ट में आगे लिखा, “इस तरह के झूठ को फैलाना न केवल निंदनीय है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कुछ स्वार्थी तत्व अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किस हद तक गिर सकते हैं। आवश्यक कार्रवाई की जा रही है और इस फर्ज़ी सूचना के लिए जिम्मेदार लोगों पर कानून पूरी सख्ती से कार्रवाई करेगा।”
We strongly reject and condemn yet another concerted attempt to defame Sadhguru and Isha Foundation through false claims. This time, fabricated emails are being used in a desperate bid to mislead the public and malign us.
Pushing such falsehoods is not only deplorable but also…
— Isha Foundation (@ishafoundation) February 28, 2025
‘100 करोड़ का मानहानि का मुकदमा होना चाहिए’
ईशा फाउंडेशन के इस पोस्ट के बाद कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने श्याम मीरा सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। एक ‘X’ यूज़र ने लिखा, “सद्गुरु और ईशा फाउंडेशन के खिलाफ झूठ और बेबुनियाद दावे फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का समय आ गया है। बहुत हो गया।” एक अन्यू यू़ज़र ने तो मानहानि का मुकदमा कर करने की मांग कर दी। इस यूज़र ने लिखा, “सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत है और कम-से-कम 100 करोड़ का मानहानि का मुकदमा भी करना चाहिए।” वहीं, एक अन्य यूज़र ने ईशा फाउंडेशन के जवाब देने को सही ठहराते हुए लिखा, “यह एक स्वागत योग्य कदम है, दुर्भाग्य से विरोधियों को लगता है कि गरिमा के साथ चुप रहना कमज़ोरी का प्रतीक है। इस बकवास प्रचार का मुकाबला किया जाना चाहिए और इसे तार्किक निष्कर्ष पर ले जाना चाहिए।”
हालांकि, ईशा फाउंडेशन ने इस पोस्ट में किसी का नाम नहीं लिया है लेकिन स्पष्ट है कि ईशा ने ईमेल का ज़िक्र किया है और श्याम मीरा सिंह ने ईमेल को लेकर ही अपना वीडियो बनाया था। श्याम मीरा सिंह पर पहले भी फेक न्यूज़ को लेकर आरोप लगते रहे हैं। इस बार महाशिवरात्रि से ठीक पहले के इस वीडियो को लेकर कई लोगों ने तो यहां तक भी दावा किया कि यह वीडियो महाशिवरात्रि से ठीक पहले इसलिए लाया गया है ताकि अमित शाह, ईशा फाउंडेशन जाने का अपना कार्यक्रम रद्द कर दें। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ है और अमित शाह वहां पहुंचे थे। सिंह के वीडियो में किए गए दावों को लेकर कोई पुलिस रिपोर्ट हुई है या नहीं, इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है।
निश्चित तौर पर इनसे जुड़ी शिकायतों का संज्ञान एजेंसियां लेंगी और जांच को निष्कर्ष तक भी पहुंचाएंगी। अब जैसा ईशा फाउंडेशन ने दावा किया है कि ईमेल फर्ज़ी हैं। अगर ईशा फाउंडेशन का दावा सही है और सनातन से जुड़े धर्मगुरु की सिर्फ छवि को खराब करने के लिए यौन शौषण जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो निश्चित रूप से ऐसे आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत है, जैसे ईशा फाउंडेशन ने कहा भी है। जिस तरह यौन शोषण का मामला गंभीर है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए उसी तरह आरोपों की आड़ में किसी के खिलाफ भ्रम फैलाना भी कतई जायज़ नहीं हो सकता है और खासतौर पर एक एजेंडे के तहत ऐसा किया जाना ना केवल निंदनीय है बल्कि कानून का मजाक बनाने की कोशिश भी है।