न डॉक्टर-न दवाएं…खस्ता हाल हैं पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं, साल भर में बढ़ गया ₹30 हजार करोड़ का कर्ज; CAG रिपोर्ट

भगवंत मान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान

पंजाब में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह लचर हैं। हॉस्पिटल में डॉक्टरों समेत अन्य स्टॉफ की भारी कमी है। हालांकि इसके बाद भी पंजाब सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय को दिए गए बजट को पूरी तरह से खर्च करना उचित नहीं समझा। आंकड़े कहते हैं कि सरकार ने स्वास्थ्य निधि का 20% बजट भी खर्च नहीं किया। यह खुलासा CAG रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पंजाब सरकार का कर्ज बढ़कर 3 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है।

दरअसल, पंजाब विधानसभा में अलग-अलग तरह की CAG रिपोर्ट पेश की गईं हैं। वित्तीय वर्ष 2016-17 से लेकर 2021-22 तक की स्वास्थ्य विभाग की CAG रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब स्वास्थ्य विभाग में 2016 से 2022 तक यानी 6 वर्षों के दौरान 68949 पद स्वीकृत किए गए थे। लेकिन इसमें से आधे से अधिक पद खाली ही रहे। इतना ही नहीं इस दौरान, हॉस्पिटल में इलाज के पर्याप्त सामग्री भी उपलब्ध नहीं थी। यहां तक कि पर्याप्त डॉक्टर, बिस्तर और आवश्यक दवाओं और मूलभूत उपकरणों की भी भारी कमी थी।

रिपोर्ट में सामने आया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि प्रत्येक 1000 व्यक्ति पर एक डॉक्टर होना चाहिए। लेकिन पंजाब में हालात इतने बुरे थे कि 7000 से अधिक व्यक्तियों पर एक डॉक्टर था। उदाहरण के लिए देखें तो CAG रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब के मोगा जिले में सबसे खराब स्थिति थी, जहां 7376 लोगों के लिए एक डॉक्टर का पद स्वीकृत किया गया था। वहीं, रूपनगर जिला सबसे बेहतर स्थिति में था, जहां 2377 व्यक्तियों पर एक डॉक्टर था।

इतना ही नहीं COVID-19 यानी कोरोना महामारी के दौरान भी पंजाब सरकार ठीक ढंग से काम नहीं कर पाई और हॉस्पिटल में आवश्यक उपकरणों, दवाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की लगातार कमी बनी रही।

CAG रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब सरकर ने एक तरह से स्वास्थ्य सेवाओं पर कम खर्च करने का मन बनाया हुआ था। राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटित बजट में से 6.5% से 20.74 प्रतिशत तक की धनराशि का भी उपयोग नहीं किया। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के तहत यह निर्धारित किया गया है कि राज्य सरकार अपने कुल बजट का 8% एवं राज्य की GDP का 2.50% खर्च स्वास्थ्य सेवाओं पर करेगी। लेकिन पंजाब सरकार ने कुल बजट का 3.11% और राज्य की GDP का महज 0.68% ही स्वास्थ्य में खर्च किया।

पंजाब की जनता पर बढ़ा कर्ज का बोझ

पंजाब की हालत लगातार खराब होती जा रही है। पहले कांग्रेस सरकार और भगवंत मान के नेत्रत्व वाली AAP सरकार में पंजाब की जनता पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। एक ओर जहां साल 2023 में राज्य सरकार पर 2.76 लाख करोड़ का कर्ज था। वहीं मार्च 2024 में यह कर्ज बढ़कर 3.06 लाख करोड़ तक पहुंच गया। सीधे शब्दों में कहें तो सिर्फ एक साल में पंजाब का कर्ज 30000 करोड़ रुपये बढ़ गया।

पंजाब की भगवंत मान सरकार आज भले ही विधानसभा में 2016 से 2022 तक की यानी कांग्रेस सरकार के दौरान की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर CAG रिपोर्ट पेश कर रही हो। लेकिन सूबे की व्यवस्थाओं का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि डॉक्टरों की संख्या में भारी कमी के चलते AAP विधायक देविंदरजीत सिंह ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या वह पाकिस्तान में रह रहे हैं?

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