वर्क फोर्स, वर्क लाइफ बैलेंस और वर्क वीक को लेकर चर्चा कोई नई नहीं है। हालांकि, AI के बाद रोजगार और काम के घंटों के साथ क्वालिटी को लेकर सकारात्मक और नकारात्मक चर्चाएं तेजी से बढ़ी है। कई दिग्गज 70 से 90 घंटे तक काम की सिफारिश करते हैं। इस बीच माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स के एक पॉडकास्ट ने सनसनी मचा दी है। इसे उन्होंने फरवरी में दिया था जो अब वायरल हो रहा है। गेट्स ने इसमें AI के बढ़ते विकास पर चर्चा करते हुए इस बात की ओर इशारा किया है कि आने वाले समय में वर्क वीक 2 दिन का हो सकता है। हालांकि, इससे पहले भी उन्होंने 3 दिन के वर्क वीक की संभावना जताई थी।
बिल गेट्स ने फरवरी में ‘The Tonight Show’ में बातचीत के दौरान बताया कि AI तेजी से एडवांस हो रही है। इससे कई इंडस्ट्री तेजी से ऑटोमेशन की ओर जा रही हैं। इससे आने वाले समय में काम के घंटे कम होंगे। हो सकता है कि इसके बाद कर्मचारियों के केवल 2 दिन ही काम करना पड़े। उन्होंने कहा कि AI कई समस्याओं को सॉल्व कर सकता है लेकिन इससे समाज में कई बड़े बदलाव भी आएंगे। हालांकि, अभी ये क्लियर नहीं है कि ये बदलाव कैसे होंगे।
क्या बदल जाएगा वर्क कल्चर?
गेट्स पहले भी काम के तरीकों में बदलाव की बात करते रहे हैं। 2023 में बिल गेट्स ने ट्रेवर नोआ के ‘व्हाट नाउ?’ पॉडकास्ट में 3 दिन के वर्कवीक की भविष्यवाणी की थी। तब उन्होंने कहा था कि AI की मदद से मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और फूड प्रोडक्शन जैसे तमाम क्षेत्रों में ऑटोमेशन बढ़ेगा। इस कारण आने वाले समय में फुल-टाइम जॉब्स की जरूरत में काफी कमी आएगी। अब उन्होंने 2 दिन के वर्कवीक की बात कहकर नई चर्चा को जन्म दिया है। हालांकि, गेट्स ने यह भी कहा है कि स्पोर्ट के क्षेत्र में AI का कुछ खास असर नहीं होगा। इस कारण अब यह सवाल पैदा हो गया है कि क्या वाकई में अगले कुछ वर्षों में वर्क कल्चर इतना बदल जाएगा।
फ्री टाइम का इस्तेमाल कैसे होगा?
ट्रेवर नोआ के साथ बातचीत में गेट्स ने कहा था कि अगर आप बड़े नजरिए से देखें, तो जिंदगी का मकसद मात्र काम करना नहीं है। हालांकि, अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि अगर सारा काम AI से होने लगेगा तो लोग फ्री टाइम का क्या करेंगे? यह एक बड़ा सवाल है, जिसका जवाब अभी स्पष्ट नहीं है।
जापान ने किया सुधार
दुनिया के कई देशों में वर्क लाइफ बैलेंस करने के लिए काम के दिन घटाने के लिए चर्चा होती रही है। कई देशों में ऐसा है भी। कुछ समय तक काम के अधिक लोड को लेकर बदनाम जापान ने इसमें काफी सुधार किया है। अब जापान कम वर्क वीक की ओर बढ़ रहे हैं। टोक्यो में बर्थ रेट बढ़ाने के लिए सरकार ने 4 दिन के वर्क वीक की पहल की है।
इन देशों में काम के घंटे काफी कम
दुनिया में सबसे कम वर्क वीक वाले देशों में वानुअतु का नाम सबसे ऊपर आता है। यहां हफ्ते में औसतन 24.7 घंटे ही काम करना पड़ता है। इसके बाद किरिबाती का नंबर आता है। जहां काम के घंटे 27.3 है। वहीं नीदरलैंड में लोगों को 31.6 घंटे ही काम करना पड़ता है। इसके अलावा इस लिस्ट में सबसे कम औसत घंटे वाली लिस्ट में माइक्रोनेशिया-30.5 घंटे, रवांडा- 30.4 घंटे, सोमालिया- 31.5 घंटे, इथियोपिया- 31.9 घंटे, ऑस्ट्रेलिया- 32.3 घंटे, नार्वे- 27 घंटे शामिल है। इन तमाम देशों में 5 या 4 दिन का वर्क वीक है। इसके साथ ही इनके रोजाना काम के घंटे काफी कम है। बता दें ये आंकड़े वर्ल्ड पॉपुलेशन सर्वे द्वारा दुनिया भर में सालाना काम के घंटों को आधार मानकर साप्ताहिक औसत पर आधारित हैं।
अब सवाल यह है कि क्या एआई सच में 2 दिन का वर्कवीक लेकर आएगी या यह सिर्फ एक कल्पना है? इसका जवाब तो भविष्य में ही मिलेगा लेकिन एक बात तय है कि AI आने वाले समय में वर्कफोर्स का पूरा तरीका बदलने वाली है। इस बीच बिल गेट्स की भविष्यवाणी ने संभावनाओं के साथ आशंकाओं को भी जन्म दिया है। इसे लेकर अब चर्चा होने लगी है।