नई दिल्ली। आज लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश हो रहा है लेकिन भाजपा की नज़र सिर्फ वक्फ बिल पर ही नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रिय चुनावी रिफॉर्म वन नेशन वन इलेक्शन पर भी है। भारतीय जनता पार्टी वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर देशव्यापी माहौल बनाने की तैयारी में है। इस मेगा चुनावी रिफॉर्म को लागू करने से पहले भाजपा की रणनीति इस विषय पर जनमानस का रूख भांपने और उसको लेकर उभरे संशयों को दूर करने की है। पार्टी ने इसकी बखूबी रणनीति भी बना ली है और उसे अंजाम देना शुरू कर दिया है।
भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी के सभी सांसदों को निर्देश दिया है कि प्रत्येक सांसद अपनी -अपनी लोकसभा सीट पर वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर एक-एक गोष्ठी ज़रूर करवाए, ताकि जनता को इस रिफॉर्म से होने वाले फायदों के बारे में समझाया जा सके, साथ ही विपक्षी प्रोपेगेंडा और गलतफहमियों का जवाब दिया जा सके। हालांकि नड्डा ने सांसदों से यह भी आग्रह किया है कि वे सीधे पार्टी प्लेटफार्म के जरिये यह गोष्ठी कराने के बजाय अपने-अपने क्षेत्र के सामाजिक संगठनों को जोड़कर उनके जरिये चर्चा आयोजित करवायें। दरअसल सामाजिक संगठनों के जरिये वन नेशन वन इलेक्शन पर परिचर्चा करवाने के पीछे भाजपा की रणनीति यह है कि वह इस मुददे पर सबसे पहले जनता का रूख भांप लेना चाहती है। साथ ही वो जनमानस में इसकी चर्चा करके इसके सकारात्मक पहलुओं को उनके बीच रखना चाहती है। ताकि संसद में इस बिल को पास कराने में विपक्ष पर वह दबाव बना सके। वैसे भी पीएम मोदी कोई भी इस तरह का परिवर्तनकारी कार्य करने से पहले जनता के बीच प्रचार-प्रसार और चर्चा के पक्षधर हैं।
सूत्रों के अनुसार सोमवार सायं 4 बजे भाजपा अध्यक्ष जेपी नडडा ने विडियो कांफ्रेंस के जरिये पार्टी के सभी सांसदों के सांसद बैठक की। और उनसे वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर प्रत्येक के क्षेत्र में गोष्ठी और चर्चा कराने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने सांसदों से विशेष आग्रह किया कि सभी सांसद अपने-अपने क्षेत्र में सामाजिक कार्य में जुटे युवाओं को इस गोष्ठी में जोडें और कोशिश करें की ये आयोजन सामाजिक संगठनों के बैनर पर ही आयोजित हों।