हाल के वर्षों में भारत तेजी से डिजिटलाइजेशन की ओर अग्रसर हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों में भी तेज़ी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऑनलाइन ठगी और डिजिटल फ्रॉड के मामले चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुके हैं, जहां रोजाना लाखों लोग साइबर ठगों के निशाने पर आ रहे हैं।
इसी कड़ी में, अब वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार भी साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। ठगों ने उन्हें निशाना बनाते हुए लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। यह घटना न केवल डिजिटल सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियों को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि साइबर अपराधी किस तरह नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर आम नागरिकों से लेकर वरिष्ठ पेशेवरों तक को निशाना बना रहे हैं।
तीन बार में खाते से उड़ाए लगभग 2 लाख
साइबर ठगों ने वरिष्ठ पत्रकार अवधेश कुमार को निशाना बनाते हुए उनके पंजाब नेशनल बैंक (PNB) खाते से तीन बार में लगभग दो लाख रुपये उड़ा लिए। ये ठगी रविवार को हुई, जब उन्हें जल बोर्ड के नाम से एक फर्जी मैसेज भेजा गया। संदेश में दावा किया गया कि उनका पानी का बिल बकाया है और अगर तुरंत भुगतान नहीं किया गया तो रात 9 बजे तक कनेक्शन काट दिया जाएगा। घबराहट में वे ठगों के जाल में फंस गए और उनके खाते से लाखों रुपये निकाल लिए गए।
हाल ही में दिल्ली सरकार ने सार्वजनिक रूप से लोगों से अपील की थी कि वे जल्द से जल्द अपने पानी के बिल भर दें, अन्यथा उनके कनेक्शन काट दिए जाएंगे। इसी सूचना का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों ने सक्रिय होकर एक फर्जी ऐप तैयार किया और लोगों को लिंक भेजकर उसमें भुगतान करने के लिए कहा। ठगों ने फोन कर डराने की भी रणनीति अपनाई। ऐसा ही एक मैसेज अवधेश कुमार को भी मिला, जिससे वे इस साइबर जाल में फंस गए।
संदेश संदिग्ध लगने पर उन्होंने भाजपा नेता दिनेश प्रताप सिंह से इसकी सत्यता की पुष्टि करने को कहा। कुछ देर बाद दिनेश प्रताप ने उन्हें बताया कि दिल्ली जल बोर्ड से बात हो गई है और एक फॉर्म भरना होगा, जिससे मीटर का फ्रीज और डी-फ्रीज हो सकेगा। इसी बीच ठगों ने उन्हें एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा और बताया कि 14 रुपये का मामूली भुगतान करने के बाद प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। जैसे ही उन्होंने ऐप डाउनलोड कर उसमें जानकारी भरी और ओटीपी साझा किया, उनके खाते से तीन बार में (38,512 रुपये, 74,492 रुपये और 59,000 रुपये) कुल करीब दो लाख रुपये गायब हो गए।
सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि ठगों ने उनके मोबाइल का एक्सेस भी अपने कब्जे में ले लिया था, जिससे ट्रांजैक्शन अलर्ट तक नहीं आया और रकम निकलती रही। जब तक उन्हें ठगी का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अवधेश कुमार ने कहा कि अगर एक वरिष्ठ पत्रकार को इतनी आसानी से निशाना बनाया जा सकता है, तो आम जनता के लिए खतरा कितना बड़ा है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कर दी गई है और बैंक को भी सूचना दे दी गई है। यह घटना तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों और डिजिटल सुरक्षा में मौजूद खतरों की ओर इशारा करती है, जिससे सतर्क रहने की जरूरत है।