खतरे की घंटी: गर्मी से लड़ने में कमज़ोर पड़ रहा इंसान, अभी नहीं चेते तो जीवित रहना होगा मुश्किल!

इंसानी शरीर अपना तापमान नियंत्रित करने में जितना सक्षम समझा जाता था, वह क्षमता उससे कम है: रिसर्चर

जैसे ही मार्च बीता और अप्रैल शुरू हुआ तो गर्मी ने भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। इस बीच एक नई स्टडी ने इस खतरे को और गंभीर बना दिया है। कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के ह्यूमन एंड एनवायरनमेंट फिजियोलॉजी रिसर्च यूनिट (HEPRU) ने अध्ययन में पाया गया है कि इंसान की गर्मी सहने की क्षमता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है। रिसर्च में शामिल वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन से इंसानी स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर तत्काल ध्यान की ओर ध्यान आकर्षित किया है।

‘जीवित रहना मुश्किल होगा’

इस रिसर्च में शामिल डॉ. केनी ने बताया कि हमारे अध्ययन ये बात सामने आई है कि इंसानी शरीर अपना तापमान नियंत्रित करने में जितना सक्षम समझा जाता था, वह क्षमता उससे कम है। यह ध्यान देने वाली बात है। क्योंकि, जलवायु परिवर्तन का असर दुनिया भर में महसूस किया जा रहा है और दुनिया में तापमान लगातार बढ़ रहा है। केनी के अनुसार, दुनिया के कई इलाके जल्द ही ऐसे तापमान और नमी के स्तर पर पहुंच जाएंगे जिसमें इंसानों का जीवित रहना मुश्किल हो जाएगा

जलवायु परिवर्तन के खतरनाक संकेत

अध्ययन जलवायु परिवर्तन के असर को सामने ला रहा है। इसमें बताया गया कि लंबे समय तक अधिक गर्मी के संपर्क में रहने से शारीरिक तनाव बढ़ता है। इसके साथ ही स्टडी में दुनिया के बड़े शहरों को चेताया गया है। इसमें कहा गया है कि भारी संख्या वाले बडे शहरों को भीषण गर्मी का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

कैसे हुई रिसर्च?

यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के रिसर्चर्स ने इस स्टडी के लिए थर्मल-स्टेप प्रोटोकॉल नाम की तकनीक का उपयोग किया। इसके जरिए शरीर में गर्मी बर्दाश्त करने की क्षमता को नापा जाता है। अध्ययन में 12 लोगों को शामिल किया गया था। इनको अलग-अलग गर्मी और ह्यूमिडिटी के स्तर पर रखा गया। रिसर्च में शामिल डॉ. मीड ने बताया कि प्रतिभागियों को 42°C तापमान और 57% ह्यूमिडिटी में रखा गया। यह स्थिति वास्तविक महसूस होने वाले तापमान के बराबर की है। हमने पाया कि इन हालातों में ज्यादातर लोगों के शरीर का तापमान लगातार बढ़ने लगा और वो इसे 9 घंटे भी नहीं झेल पाए

दक्षिण एशिया पर ज़्यादा खतरा

इसके अलावा नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि अगर शरीर का तापमान 40.2°C तक पहुंच जाए तो महज 10 घंटे में हीट स्ट्रोक हो सकता है। लंदन के किंग्स कॉलेज के अनुसार दुनिया की लगभग 6% ज़मीन पर भीषण गर्मी हो सकती है। इससे युवा तो बच निकलेंगे लेकिन बुजुर्गों के लिए ये खतरनाक है। ऐसे इलाकों में दक्षिण एशिया सबसे ऊपर है जहां तेज़ी से गर्मी बढ़ेगी।

कितने तैयार हैं हम?

इस अध्ययन ने यह तो साफ कर दिया है कि इंसान के शरीर की गर्मी सहने की क्षमता जितनी सोची गई थी, उससे कम है। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। उस पैमाने पर शरीर का अनुकूलन नहीं बढ़ पा रहा है। ऐसे में इस अध्ययन ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम भविष्य के लिए तैयार हैं? हालांकि, इसी रिपोर्ट में समस्याओं के संभावित समाधान भी बताए गए हैं। इसमें वैज्ञानिकों ने कहा गया है कि शारीरिक डेटा और जलवायु मॉडल को मिलाकर काम किया जाए तो इससे समस्याओं का हल निकाला जा सकता है।

रिसर्च के बाद साफ हो गया है कि ग्लोबल वॉर्मिंग से निपटने के लिए हमें पहले से बढ़िया नीतियां बनानी होंगी। इसके लिए सरकार, संस्थाओं और आम लोगों को साथ मिलकर काम करना होगा।

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