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‘चप्पल पहनकर’ पहुंचे संसद, मणिपुर की चर्चा बीच में छोड़कर भागे; सवालों में राहुल गांधी का रवैया

हमेशा से मणिपुर-मणिपुर का राग अलापने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पर चर्चा के दौरान लोकसभा से नदारद रहे

TFI Desk द्वारा TFI Desk
3 April 2025
in राजनीति
'चप्पल पहनकर' संसद पहुंचे राहुल गांधी

'चप्पल पहनकर' संसद पहुंचे राहुल गांधी

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देश के इतिहास में 2-3 अप्रैल की रात एक दुर्लभ मौका आया जब संसद की कार्रवाई सुबह करीब 4 बजे तक चलती रही। इस ऐतिहासिक रात में 1 बजकर 59 मिनट पर वक्फ संशोधन विधेयक सदन में पास हुआ। इस दौरान संसद में हो-हल्ला होता रहा। हालांकि, इस विधेयक पास होने के बाद भी कार्रवाई नहीं रुकी। इसके बाद करीब 1 घंटे 40 मिनट की चर्चा के बाद 3 बजकर 40 मिनट पर मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाने के प्रस्ताव को पास करा लिया गया। हालांकि, इस दौरान गौर करने वाली सबसे बड़ी बात ये रही कि हमेशा से मणिपुर-मणिपुर का राग अलापने वाले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस पर चर्चा के दौरान सदन से नदारद रहे। इतना ही नहीं कांग्रेस के आला नेता भी मणिपुर को लेकर हो रहे इस बड़े फैसले के दौरान संसद में नज़र नहीं आए।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वक्फ संशोधन विधेयक पास होने के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन से संबंधित वैधानिक प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय में मणिपुर में कोई हिंसा की घटना नहीं घटी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हालात अभी पूरी तरह से संतोषजनक नहीं हैं लेकिन वे नियंत्रण में हैं। अमित शाह ने राष्ट्रपति शासन को अनुमोदित कराने के लिए यह प्रस्ताव रखते हुए सभी से इसका समर्थन करने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर तंज़ भी कसा।

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सवालों में राहुल की लापरवाही

संसद में वक्फ बिल पास होने को था। हालांकि, पूरा दिन सदन में रहने के स्थान पर राहुल गांधी बहस में भाग लेने देर पहुंचे थे। हालांकि, वो अपने पहनावे को लेकर ट्रोल हो गए। लोगों ने कहा कि राहुल पायजामा और स्लीपर में देर रात संसद पहुंच गए थे। वक्फ बिल पास होने के बाद सदन में मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को लेकर प्रस्ताव का अनुमोदन होना था। हालांकि, इससे पहले राहुल गांधी सदन से चले गए थे। उनके इस लापरवाही को लेकर भी लोगों ने सवाल किया है। क्योंकि वो लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं।

बीते रोज राहुल गांधी अपने एक और बयान को लेकर निशाने पर थे। जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद में उन्हें बोलने नहीं दिया जाता है। इसके बाद जगदंबिका पाल ने राहुल पर पलटवार किया था। उन्होंने कहा कि वह देश को गुमराह कर रहे राहुल, संसदीय प्रणाली में रुचि नहीं है। इसके बाद देर रात संसद पहुंचने और मणिपुर को लेकर प्रस्ताव सदन में आने से पहले वो चले गए। इससे उनकी ट्रोलिंग और बढ़ गई।

थरूर ने राहुल की अनुपस्थिति पर क्या कहा?

मणिपुर और वक्फ संशोधन बिल से जुड़ी पूरी कार्रवाई में भाग ना लेने को लेकर सोशल मीडिया राहुल गांधी पर हमलावर था। इसी दौरान जब मीडिया ने कांग्रेस नेता शशि थरूर से इस संबंध में सवाल किया तो उनके मज़ाकिया जवाब ने राहुल गांधी पर हमला बोलने के लिए एक और मौका सबको दे दिया है। जब थरूर से सवाल किया गया कि मणिपुर को लेकर चर्चा के दौरान राहुल गांधी नहीं थे। तो उन्होंने कहा, “आप समझ सकते हैं। यह रात में 2:30 बजे की बात है। ये दिन काफी लंबा खिंच गया था।”

क्या सही है नेता प्रतिपक्ष का रवैया?

बीते रोज राहुल गांधी के रवैये के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या नेता प्रतिपक्ष का ऐसा करना सही है। वो सदन में देरी से आएं और बाहर ये बयान दे कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता। उसके बाद जब सदन में कोई ऐतिहासिक बिल पास होने जाता है तो वो आराम ने सोकर संसद पहुंचते हैं। इतनी ही नहीं वो कार्यवाही स्थगित होने से पहले सदन से बाहर चले जाते हैं जबकि उस दौरान मणिपुर को लेकर चर्चा होनी थी। राहुल गांधी पर सवाल इस लिए भी खड़े होते हैं क्योंकि, वो पिछले 2 साल से मणिपुर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं और सरकार को घेर रहे हैं। हालांकि, जब इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा होती है तो वो सदन में नहीं रहते। इसके बाद उनकी ही पार्टी के नेता दिन को लंबा बता कर बचाव करते हैं। ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या बस राहुल गांधी के लिए ही दिन लंबा और थकाऊ था। बाकी सदस्य सदन में थे वो थके नहीं थी। नेता प्रतिपक्ष होते हुए उनका ऐसा करना लोगों को कतई उचित नहीं लग रहा है।

हिंसा के बाद 3 बार मणिपुर गए हैं राहुल

मणिपुर में हिंसा भड़कने के बाद करीब 1 साल में राहुल गांधी ने 3 बार राज्य के दौरे पर जा चुके हैं। पहली बार उन्होंने हिंसा के कुछ दिनों बाद 30 जून 2023 को मणिपुर दौरा किया था। इस दौरान वो चुराचांदपुर जैसे प्रभावित जिलों में पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने जनवरी 2024 में अपने ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान प्रदेश का दौरा किया था। तीसरी और आखिरी बार वो 8 जुलाई 2024 को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मणिपुर का दौरा करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने राहत शिविरों में लोगों से मुलाकात की थी।

पहले से प्रदेश में लागू है राष्ट्रपति शासन

मणिपुर में 2022 के चुनावों के बाद एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि, उनके शासन काल में हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई थी। इसके बाद केंद्र की सहायता से प्रदेश में शांति बहाल की गई। कुछ दिनों बाद 13 फरवरी 2025 को एन बीरेन सिंह ने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। इसे राष्ट्रपति ने 13 फरवरी को जारी किया था।

राष्ट्रपति शासन जारी तो संसद में प्रस्ताव क्यों?

मणिपुर में फरवरी से राष्ट्रपति शासन लगा है। हालांकि, इसके बाद संसद में इसे अनुमोदन करना की जरूरत पड़ी। क्यों कि भारत के संविधान के अनुसार, किसी राज्य में केंद्र सरकार राष्ट्रपति शासन लागू कर सकती है। हालांकि, इसे 2 माह के भीतर संसद से अनुमोदित कराना होता है। इसके बाद राष्ट्रपति शासन अगले 6 माह के लिए लागू हो जाता है। इसे और भी आगे बढ़ाने के लिए हर 6 महीने के अंतराल में संसद से अनुमोदित कराना जरूरी होता है। इसी कारण मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के संबंध का प्रस्ताव संसद में पेश किया गया।

स्रोत: राहुल गांधी, लोकसभा, वक्फ संशोधन विधेयक, मणिपुर, शशि थरूर, Rahul Gandhi, Lok Sabha, Wakf Amendment Bill, Manipur, Shashi Tharoor,
Tags: Lok SabhaManipurRahul GandhiShashi TharoorWakf Amendment Billमणिपुरराहुल गाँधीलोकसभावक्फ संशोधन विधेयकशशि थरूर
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