नवरात्रि के पावन दिन चल रहे हैं, और 6 अप्रैल को रामनवमी की भव्य शोभायात्राएँ पूरे देश में निकलने वाली हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल में यह सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का मुद्दा बन चुका है। भाजपा और टीएमसी के बीच इस बार भी सीधा संघर्ष देखने को मिल रहा है, खासकर धार्मिक आयोजनों को लेकर। हर साल की तरह इस बार भी बंगाल में तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि हिंदू त्योहारों पर होने वाली हिंसा और प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा नेता दिलीप घोष का आरोप है कि ममता सरकार में हिंदू त्योहारों के दौरान हमले, पथराव और दंगे आम हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि हिंदुओं को लगने लगा है कि अगर यही हालात रहे, तो शायद एक दिन उन्हें अपना ही राज्य छोड़ना पड़े। उधर, ममता बनर्जी ने हमेशा की तरह शोभायात्रा को लेकर वही पुराना रवैया अपनाया है। उन्होंने कहा कि, ‘मैं हिंदू भी हूं, मुसलमान भी, सिख और ईसाई भी हूं। उससे पहले मैं एक भारतीय हूं। विपक्षी दलों की राजनीति सिर्फ लोगों को बांटने की है। मैं ऐसा नहीं होने दूंगी। कुछ लोग राज्य में दंगे भड़काने की फिराक में हैं। उनके उकसावे में आने से बचें।’
लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या ये सच में दंगा रोकने के लिए कहा गया है या रामनवमी की शोभायात्रा को रोकने की एक और कोशिश है? बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति कोई नई बात नहीं है, लेकिन हिंदू समाज के त्यौहारों पर हर बार इस तरह की बंदिशें लगाना कहीं न कहीं एक गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। आखिर क्यों, बंगाल की वही धरती, जहाँ कभी दुर्गा पूजा और रामनवमी धूमधाम से मनाई जाती थी, आज हिंदू समाज को अपने ही त्योहार मनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है? क्या ममता सरकार का नया सेक्युलरिज़्म यही है कि एक खास वर्ग को खुश करने के लिए हिंदुओं को बार-बार निशाना बनाया जाए?
TMC पर तुष्टिकरण का आरोप, भाजपा का सीधा संदेश
भास्कर से बातचीत में भाजपा नेता दिलीप घोष ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा, “पिछले कई वर्षों से बंगाल के लोगों में रामनवमी को लेकर जबरदस्त उत्साह है, लेकिन टीएमसी सरकार में हिंदू त्योहारों पर हमले और दंगे आम हो गए हैं। हिंदुओं को लगने लगा है कि अगर यही हालात रहे, तो शायद एक दिन उन्हें बंगाल छोड़ना पड़ेगा।”
उन्होंने आगे कहा, “प्रदेश में जगह-जगह मुस्लिम बस्तियां और मस्जिदें बना दी गई हैं। राजनीतिक दबदबा भी उन्हीं का बढ़ रहा है, जिससे हिंदू समाज में असुरक्षा का भाव पैदा हो गया है। रामनवमी पर निकलने वाली शोभायात्रा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदू समाज के शक्ति प्रदर्शन का माध्यम बन चुकी है। लोग इसके बहाने एकजुट हो रहे हैं और यही कारण है कि अब आम जनता ने भी रामनवमी को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है।”
यही नहीं इसके साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर एक समुदाय विशेष को खुश करने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने सख्त लहजे में कहा, “टीएमसी सरकार अगर राज्यभर में रामनवमी की शोभायात्रा को रोकने की कोशिश करेगी, तो इसका कड़ा प्रतिरोध किया जाएगा। इस बार रामनवमी महाकुंभ वर्ष के साथ मेल खा रही है, जो इसे और भी गौरवशाली बनाती है। हम इसका भव्य और ऐतिहासिक आयोजन करेंगे। पुलिस को चेतावनी देंगे कि वे ममता बनर्जी के जाल में न फंसें, वरना उन्हें जनता को जवाब देना होगा। आप जय श्री राम के नारे को दबाने की ताकत नहीं रखते। लाखों लोग इन शोभायात्राओं में शामिल होंगे।”
अपनी बात को और आगे बढ़ाते हुए सुवेंदु अधिकारी ने ममता सरकार की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, “अगर ममता बनर्जी सत्ता में बनी रहीं, तो बंगाल की स्थिति जल्द ही बांग्लादेश जैसी हो जाएगी। उनके शासन के दिन अब गिने-चुने रह गए हैं। हिंदू समाज अब उनके खुलेआम तुष्टिकरण की नीति और रामनवमी उत्सव को कुचलने के प्रयासों को सहन नहीं करेगा।”
भाजपा नेता अधिकारी ने साफ ऐलान किया है कि इस साल 6 अप्रैल को रामनवमी के अवसर पर पूरे राज्य में 20,000 से अधिक शोभायात्राएँ निकाली जाएँगी, जिसमें अनुमानतः 1 करोड़ हिंदू श्रद्धालु भाग लेंगे।
वर्षों से कट्टरपंथियों का शिकार होती आई है रामनवमी
बता दें कि यह सिर्फ इस साल की समस्या नहीं है. बीते कई वर्षों से पश्चिम बंगाल में रामनवमी के दौरान हिंसा की घटनाएं होती आ रही हैं। और ममता सरकार द्वारा हर बार ही हिन्दुओं को ही शांत रहने की नसीहत दी जाती है। टीएमसी सरकार के कार्यकाल में हिंदू समाज को बार-बार यह संदेश दिया जाता है कि या तो वे अपने त्योहारों को चुपचाप मनाएं, या फिर हिंसा का शिकार होने के लिए तैयार रहें। रामनवमी पर हिंदू समाज जब अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के जयकारे लगाता है, तो बंगाल में मौजूद कट्टरपंथियों को यह बर्दाश्त नहीं होता यही कारण है कि जब शोभायात्रा निकलती है, तब हिंदुओं को चुन-चुनकर टारगेट किया जाता है।
2023 में हिंदू समाज पर हमले
30 मार्च से 2 अप्रैल 2023 के बीच पश्चिम बंगाल के हावड़ा, हुगली, इस्लामपुर और उत्तर दिनाजपुर में संगठित हमले किए गए।
- रामनवमी शोभायात्रा पर हिंसा और पथराव
- 1 हिंदू श्रद्धालु की मौत, 15 लोग- including पुलिसवाले-गंभीर रूप से घायल
- 10 से ज्यादा वाहन आग के हवाले
- 20 से अधिक दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट
- 162 लोगों के खिलाफ केस दर्ज, NIA ने जांच के बाद 16 गिरफ्तार
- सभी आरोपियों पर सांप्रदायिक हमले की साजिश रचने, दंगे भड़काने का आरोप
2024 में फिर दोहराया गया हिंदू विरोधी हिंसा का खेल
17 अप्रैल 2024 को मुर्शिदाबाद के शक्तिपुर में रामनवमी शोभायात्रा पर हमला हुआ।
- छतों से शोभायात्रा पर पथराव और बमबारी के आरोप लगे
- हिंसा में 2 बच्चे और पुलिस समेत 18 लोग घायल हुए
- पहले पुलिस, फिर CID और अंत में NIA को जांच सौंपी गई
- 13 अप्रैल 2024 को भी शक्तिपुर में शिवभक्तों के जुलूस पर हमला हुआ था