बिहार की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ सुर्खियों में है। कांग्रेस इसे जनता के हक की लड़ाई बता रही है, लेकिन इस यात्रा की सबसे बड़ी चर्चा किसी रचनात्मक संदेश से नहीं, बल्कि दरभंगा की घटना से जुड़ी है। दरअसल, यात्रा के दौरान आयोजित सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी मां के नाम से गाली दी गई। यह घटना न केवल कांग्रेस की राजनीति पर भारी पड़ गई, बल्कि भाजपा के लिए चुनावी संजीवनी साबित हो रही है।
दरभंगा की घटना में टूट गईं मर्यादाएं
बिहार के दरभंगा में राहुल गांधी की यात्रा के दौरान मंच से दिए गए भाषण में प्रधानमंत्री मोदी को मां के नाम से गाली दी गई। यह कोई साधारण बयान नहीं था, बल्कि भारतीय समाज की सांस्कृतिक और भावनात्मक मर्यादा को लांघने वाला कदम था।
भारत में मां को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है। “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की परंपरा में पले-बढ़े समाज में किसी की मां का अपमान राजनीतिक असहमति से कहीं आगे बढ़कर व्यक्तिगत और नैतिक अपराध जैसा माना जाता है। इस घटना के बाद भाजपा ने पूरे जोर-शोर से यह प्रचार किया कि कांग्रेस अब इतनी हताश हो चुकी है कि उसके पास प्रधानमंत्री पर सीधा हमला करने के बजाय उनकी मां को गाली देने का सहारा लेना पड़ रहा है।
भाजपा का नैतिक पलटवार
भाजपा नेताओं ने दरभंगा की इस घटना को हाथों-हाथ लिया। पार्टी ने जनता के बीच यह संदेश फैलाया कि कांग्रेस की असली सोच और मानसिकता अब उजागर हो गई है। भाजपा ने कहा कि यह केवल मोदी का अपमान नहीं है, बल्कि हर उस भारतीय का अपमान है जो मां को पूजनीय मानता है।
नेताओं ने राहुल गांधी से सार्वजनिक माफी की मांग की, लेकिन कांग्रेस की ओर से बचाव की कोशिशों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर बताया कि कांग्रेस की राजनीति अब गाली-गलौज और अपमान पर टिक गई है। नतीजा यह हुआ कि राहुल गांधी की यात्रा से जो थोड़ी-बहुत सहानुभूति कांग्रेस को मिल सकती थी, वह भी उलटी भाजपा की झोली में चली गई।
जनता की प्रतिक्रिया: आक्रोश और सहानुभूति
दरभंगा की घटना ने बिहार की जनता को झकझोर दिया। यहां का समाज परंपराओं और रिश्तों के सम्मान के लिए जाना जाता है। किसी की मां को गाली देना इस संस्कृति में अस्वीकार्य है। ग्रामीण इलाकों में लोग कहने लगे कि “नेता तो आते-जाते रहते हैं, लेकिन मां का अपमान किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं।”
महिलाओं के बीच यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया। उन्होंने इसे केवल मोदी का अपमान नहीं, बल्कि हर मां का अपमान माना। युवाओं के बीच भी यह चर्चा तेजी से फैली कि राहुल गांधी अगर जनता की तकलीफों पर बात नहीं कर सकते, तो क्या गाली-गलौज ही राजनीति का तरीका है? इस आक्रोश का सीधा असर कांग्रेस के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में दिखाई देने लगा।
मोदी की छवि और मां का सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि “मैं जो भी हूं, अपनी मां के आशीर्वाद से हूं।” गुजरात के वडनगर की झोपड़ी से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक की उनकी यात्रा में उनकी मां ही उनकी प्रेरणा रही हैं।
ऐसे में जब दरभंगा की सभा में उनकी मां को गाली दी गई, तो जनता ने इसे सीधे मोदी की मां का अपमान नहीं, बल्कि पूरे भारतीय संस्कारों का अपमान माना। भाजपा ने इसी भावनात्मक जुड़ाव को अपने प्रचार का हिस्सा बनाया।
विपक्ष की मुश्किलें और भाजपा का लाभ
राहुल गांधी की यात्रा का मकसद कांग्रेस को बिहार में फिर से खड़ा करना था, लेकिन दरभंगा की घटना ने इसे उल्टा कर दिया। महागठबंधन पहले से ही अस्थिर है। नीतीश कुमार के अलग होने से विपक्ष कमजोर हुआ है।
अब राहुल गांधी की इस यात्रा ने विपक्ष की नैतिक साख पर और चोट पहुंचाई है। कांग्रेस का वोट बैंक पहले ही सिमटा हुआ था, अब गाली-गलौज की राजनीति ने उसकी छवि को और नुकसान पहुंचाया। इसके विपरीत भाजपा इस घटना को भुनाकर खुद को सकारात्मक, मर्यादित और संस्कारी राजनीति का प्रतीक बता रही है।
चुनावी रणनीति में भाजपा की बढ़त
भाजपा ने दरभंगा की घटना को अपने चुनावी अभियान में केंद्रीय मुद्दा बना लिया है। सभाओं में नेता यह कहते हैं कि कांग्रेस के पास न तो कोई योजना है, न कोई दृष्टि—उसके पास सिर्फ मोदी और उनकी मां को गाली देना बचा है।
सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो और बयान वायरल कराए जा रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ता इसे गांव-गांव, चौपालों और मोहल्लों में ले जाकर कांग्रेस की छवि गिराने का काम कर रहे हैं। इसका असर यह हुआ कि जनता की सहानुभूति मोदी और भाजपा के साथ और मजबूत हो गई है। राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ का मकसद कांग्रेस को पुनर्जीवित करना था, लेकिन दरभंगा में प्रधानमंत्री मोदी को मां के नाम से गाली देने की घटना ने कांग्रेस की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। इस घटना ने जनता के मन में गहरी नाराजगी पैदा की। भाजपा ने इसे अपने चुनावी प्रचार का सबसे बड़ा हथियार बना लिया। बिहार की संस्कृति और समाज के लिए यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि नैतिक और भावनात्मक मुद्दा बन गया।
आज स्थिति यह है कि राहुल गांधी की यात्रा कांग्रेस को मजबूत करने की बजाय भाजपा के लिए वरदान बन गई है। दरभंगा की गाली ने यह साबित कर दिया कि कांग्रेस की राजनीति अब केवल अपमान और नकारात्मकता पर टिकी है, जबकि भाजपा मर्यादा और विकास का विकल्प बनकर जनता के बीच और ज्यादा मजबूत हो रही है।