भाजपा की फायरब्रांड नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक PoK भारत में शामिल नहीं हो जाता, तब तक देश का उद्देश्य अधूरा है। समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि PoK को वापस लेना हर भारतीय की भावना है और “जब यह होगा तभी भारत का मकसद पूरा होगा।”
ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ, आलोचकों पर हमला
उमा भारती ने हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ करते हुए इसे भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस पर सवाल उठाने वाले लोग देश की बदनामी कर रहे हैं और वे “राजनीति करने के योग्य नहीं हैं।”
उन्होंने संसद द्वारा 1994 में पारित उस सर्वसम्मत प्रस्ताव का भी उल्लेख किया जिसमें PoK को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया गया था। उमा ने कहा, “हमारा अंतिम लक्ष्य पीओके को वापस लेना है। जो लोग ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वे न तो राष्ट्रीय गर्व समझते हैं और न ही भारतीय सैनिकों की वीरता का सम्मान करते हैं।”
पाकिस्तान और आतंकवाद पर कड़ा रुख
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने पाकिस्तान द्वारा आतंकियों को समर्थन देने पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देकर खुद ही अपने पतन की ओर बढ़ रहा है। जब तक वह इस रास्ते पर है, उसका भविष्य अंधकारमय है।” उमा ने दावा किया कि भारत ने हमेशा आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और आखिरकार हम ही इसे समाप्त करेंगे।
मालेगांव विस्फोट मामले पर टिप्पणी
साक्षात्कार में उमा भारती ने 2008 मालेगांव ब्लास्ट केस पर भी खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि यह एक “साजिश थी जिसका मकसद हिंदुओं को बदनाम करना और तुष्टिकरण की राजनीति को साधना था।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित जैसे निर्दोष लोगों को फंसाया गया और उन्हें बर्बर यातनाएं दी गईं।
उमा ने बताया कि साध्वी प्रज्ञा को इतनी यातनाएं दी गईं कि उनकी रीढ़ की हड्डी तक प्रभावित हो गई। “मेरे सुरक्षा निरीक्षक ने मुझे बताया था कि साध्वी को 100 से ज्यादा थप्पड़ मारे गए। उनके गाल काले पड़ गए और उस हालत में भी वह ‘ॐ’ का जाप करती रहीं,” उमा ने कहा। उन्होंने कर्नल पुरोहित के बारे में भी कहा कि उनकी पत्नी ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि जांच के दौरान उनके नाखून तक उखाड़ दिए गए।
नए सिरे से जांच की मांग
उमा भारती ने मालेगांव मामले में नए सिरे से जांच की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर असली दोषियों को पकड़ना ही मकसद था तो साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित जैसे नाम क्यों जोड़े गए? असली दोषी अब तक क्यों नहीं पकड़े गए?” गौरतलब है कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास बम विस्फोट हुआ था, जिसमें छह लोगों की मौत हुई और 95 लोग घायल हुए थे। लेकिन 31 जुलाई 2024 को मुंबई की विशेष NIA अदालत ने सबूतों के अभाव में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया।
उतार-चढ़ाव से भरा रहा उमा का राजनीतिक जीवन
उमा भारती का राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। 2003 में उन्होंने भाजपा को मध्य प्रदेश में प्रचंड जीत दिलाई थी, लेकिन आगे चलकर पार्टी में उनके और शिवराज सिंह चौहान के बीच खींचतान भी सामने आई। 2012 में उन्होंने यूपी विधानसभा चुनाव लड़ा, फिर 2014 में झांसी से सांसद बनीं और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहीं।
उमा भारती के ताजा बयान साफ करते हैं कि भाजपा PoK को लेकर अपने पुराने रुख पर कायम है। उन्होंने न सिर्फ पाकिस्तान और आतंकवाद पर कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया, बल्कि मालेगांव केस जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी अपनी बात बेबाकी से रखी। उनके इन बयानों से भाजपा का राष्ट्रवादी नैरेटिव और मजबूत होता है, खासकर उस वक्त जब सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दे फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं।