भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस Mk1A ने एक बड़ी परिचालन उपलब्धि हासिल की है। स्वदेशी रूप से विकसित Astra Mk1 बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) मिसाइल और ब्रिटेन निर्मित ASRAAM विदिन-विजुअल-रेंज (WVR) मिसाइल के कई सफल लाइव फायरिंग परीक्षणों के बाद तेजस Mk1A ने अपना पूरा एयर-टू-एयर मिसाइल एनवेलप सफलतापूर्वक क्लियर कर लिया है।इन सफल परीक्षणों से यह पुष्टि होती है कि तेजस Mk1A अब लंबी दूरी और नज़दीकी हवाई युद्ध, दोनों के लिए पूरी तरह से सुसज्जित है। यह उपलब्धि ऐसे समय में भारतीय वायुसेना (IAF) की हवाई युद्ध क्षमता को काफी मजबूत करती है, जब क्षेत्रीय हवाई खतरे लगातार बढ़ रहे हैं।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इन मिसाइल फायरिंग परीक्षणों के दौरान हथियार एकीकरण (Weapon Integration), एवियोनिक्स संगतता, रडार क्यूइंग, सीकर का प्रदर्शन और विभिन्न युद्ध परिदृश्यों में अंतिम चरण की सटीकता (Endgame Accuracy) को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया गया। यह परिणाम Mk1A के हथियार प्रमाणन प्रक्रिया के एक अहम चरण के पूरा होने को दर्शाते हैं, जिससे विमान फ्रंटलाइन स्क्वाड्रनों में पूर्ण परिचालन तैनाती के और करीब पहुंच गया है।
Astra Mk1 जहां लंबी दूरी से दुश्मन विमानों को मार गिराने की क्षमता प्रदान करता है, वहीं ASRAAM डॉगफाइट जैसी नज़दीकी लड़ाइयों में अत्यधिक घातक साबित होता है। इस संयोजन के साथ तेजस Mk1A अब एक मजबूत, बहु-स्तरीय हवाई प्रभुत्व पैकेज प्रदान करता है, जो बियॉन्ड-विजुअल-रेंज से लेकर क्लोज-कॉम्बैट तक पूरे हवाई युद्ध स्पेक्ट्रम में दुश्मन से मुकाबला कर सकता है।
यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत के रक्षा क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन देती है, क्योंकि Astra Mk1 भारत के स्वदेशी मिसाइल विकास पारिस्थितिकी तंत्र का उत्पाद है, जिसका नेतृत्व DRDO कर रहा है। वहीं, इसका सफल एकीकरण HAL और भारतीय वायुसेना की स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर जटिल हथियार प्रणालियों के एकीकरण में बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।
जैसे-जैसे भारतीय वायुसेना तेजस Mk1A की बड़ी संख्या में तैनाती की तैयारी कर रही है, यह सफल मिसाइल एकीकरण तेजस को एक पूरी तरह युद्ध-तैयार, नेटवर्क-सक्षम और घातक लड़ाकू विमान के रूप में स्थापित करता है, जो समकालीन क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है।


































