गोल्डन होराइजन’ मिसाइल पर भारत की नजर: 2,000 किमी तक मार करने वाली इज़राइली हाइपरसोनिक हथियार से बढ़ेगी डीप-स्ट्राइक ताकत

भारत ने अग्नि श्रृंखला के तहत लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित की हैं, जिनमें परमाणु क्षमता वाली अग्नि-5 भी शामिल है। अब भारत एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जो उसकी हवाई हमले की क्षमता को और बढ़ा सकता है।

मिसाइल पर भारत की नजर

मिसाइल पर भारत की नजर

हजारों किलोमीटर तक मार करने वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों से लेकर सटीक निशाना लगाने वाली सामरिक (टैक्टिकल) प्रणालियों तक, दुनिया की बड़ी ताकतें ऐसी “स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक” क्षमता में भारी निवेश कर रही हैं, जो दुश्मन के इलाके के भीतर गहराई में बने मजबूत ठिकानों को निशाना बना सके।

रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने अग्नि श्रृंखला के तहत लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें विकसित की हैं, जिनमें परमाणु क्षमता वाली अग्नि-5 भी शामिल है। अब भारत एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रहा है जो उसकी हवाई हमले की क्षमता को और बढ़ा सकता है।

बताया जा रहा है कि इज़राइल ने भारत को **‘गोल्डन होराइजन’ एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM)** देने का प्रस्ताव रखा है। यह एक लंबी दूरी की मिसाइल है, जिसे जमीन के अंदर बने मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।

कहा जाता है कि यह मिसाइल इज़राइल की पहले इस्तेमाल की गई **‘सिल्वर स्पैरो’** मिसाइल पर आधारित है, जिसे मिसाइल रक्षा परीक्षणों के दौरान लक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। अब इसे एक वास्तविक हमलावर हथियार के रूप में विकसित किया गया है, जिसे लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है।

हालांकि इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रक्षा रिपोर्टों के अनुसार इसकी मारक क्षमता 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच हो सकती है। यदि इसे भारतीय वायुसेना में शामिल किया जाता है, तो इसे संभवतः सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ा जाएगा। इससे वायुसेना की दूर से हमला करने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।

 एक नई श्रेणी का रणनीतिक हथियार

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल भारत की मौजूदा सामरिक मिसाइलों से अलग श्रेणी में होगी।

इज़राइल पहले भी भारत को LORA (लगभग 400 किमी रेंज) और Rampage (करीब 250 किमी रेंज) जैसी मिसाइलें दे चुका है। ये मुख्य रूप से युद्धक्षेत्र में रडार स्टेशन, एयर डिफेंस सिस्टम, कमांड सेंटर और गोला-बारूद डिपो जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए होती हैं।

लेकिन ‘गोल्डन होराइजन’ को खास तौर पर जमीन के अंदर बने बंकर, मजबूत सैन्य ढांचे और परमाणु से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया बताया जा रहा है।

आजकल कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने मोटी कंक्रीट और भूमिगत निर्माण से सुरक्षित किए जाते हैं। ऐसे में उन्हें नष्ट करने के लिए बहुत तेज गति और गहराई तक भेदन (पैठ) करने की क्षमता वाले हथियार की जरूरत होती है।

एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल होने के कारण, यह मिसाइल विमान से छोड़े जाने के बाद ऊंचाई पर जाएगी और फिर बैलिस्टिक रास्ते से अपने लक्ष्य की ओर बहुत तेज गति से गिरेगी।

रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि अंतिम चरण में इसकी गति मैक-5 (ध्वनि की गति से पांच गुना ज्यादा) से भी अधिक हो सकती है। इतनी तेज गति के कारण इसे रोकना पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों के लिए कठिन हो सकता है। इसकी अत्यधिक गतिज ऊर्जा इसे मजबूत संरचनाओं को भेदने में मदद कर सकती है।

 भारत की रणनीतिक क्षमता पर असर

अगर भारत इस मिसाइल को हासिल करता है, तो यह उसकी रणनीतिक मारक क्षमता में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह अग्नि मिसाइल श्रृंखला के साथ मिलकर वायुसेना की पहुंच को और आगे तक बढ़ा सकती है।

यह मिसाइल पारंपरिक युद्धक्षेत्र के लक्ष्यों से अलग, गहराई में बने और मजबूत ठिकानों को निशाना बनाने के लिए उपयोगी हो सकती है। इससे भारत की रोकथाम (डिटरेंस) और सटीक हमले की क्षमता मजबूत हो सकती है।

हालांकि, इससे क्षेत्र में हथियारों की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ सकती है। ऐसे में कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

साथ ही, इस तरह की उन्नत प्रणाली को शामिल करने के लिए विशेष प्रशिक्षण, मजबूत ढांचा और सुरक्षित कमांड व्यवस्था की जरूरत होगी, ताकि इसका उपयोग जिम्मेदारी से किया जा सके और अनावश्यक तनाव न बढ़े।

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