दुनिया भर में मुसलमान ईद मना रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान में मुस्लिमों के एक वर्ग पर ईद मनाने पर प्रतिबंध क्यों है? अहमदिया मुस्लिम क्यों नहीं मना सकते ईद ?

 


दुनिया भर में आज ईद का त्योहार मनाया जा रहा है, ख़ासकर इस्लामिक मुल्कों या फिर वो देश जहां मुस्लिम समुदाय की संख्या काफी अच्छी है, वहां इस त्योहार को काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन ख़ुद को कलमे की बुनियाद पर बना दुनिया का इकलौता मुल्क बताने वाले पाकिस्तान में ही मुस्लिमों का एक वर्ग ऐसा है जो ईद के दिन जश्न मनाने की जगह घरों में दुबक कर बैठने को मजबूर है। 
वैसे तो हैं मुसलमान ही, लेकिन पाकिस्तान में इनके ईद मनाने, नमाज़ पढ़ने या फिर मस्जिदों में जाने पर रोक है। ये पाकिस्तान के अहमदिया मुस्लिम हैं, जिनके लिए पुलिस को सख्त निर्देश हैं कि अगर कोई अहमदिया इस्लामिक रीति-रिवाज से ईद मनाता, या फिर नमाज़ पढ़ता दिखे तो उसे गिरफ़्तार कर लिया जाए। 


दुनिया भर में आज ईद का त्योहार मनाया जा रहा है, ख़ासकर इस्लामिक मुल्कों या फिर वो देश जहां मुस्लिम समुदाय की संख्या काफी अच्छी है, वहां इस त्योहार को काफी उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन ख़ुद को कलमे की बुनियाद पर बना दुनिया का इकलौता मुल्क बताने वाले पाकिस्तान में ही मुस्लिमों का एक वर्ग ऐसा है जो ईद के दिन जश्न मनाने की जगह घरों में दुबक कर बैठने को मजबूर है। 
वैसे तो हैं मुसलमान ही, लेकिन पाकिस्तान में इनके ईद मनाने, नमाज़ पढ़ने या फिर मस्जिदों में जाने पर रोक है। ये पाकिस्तान के अहमदिया मुस्लिम हैं, जिनके लिए पुलिस को सख्त निर्देश हैं कि अगर कोई अहमदिया इस्लामिक रीति-रिवाज से ईद मनाता, या फिर नमाज़ पढ़ता दिखे तो उसे गिरफ़्तार कर लिया जाए।
पिछले वर्ष तो लाहौर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने पंजाब पुलिस को पत्र लिख कर कहा था कि अहमदिया समुदाय को ईद-उल-अजहा पर इस्लामी रीति-रिवाज (नमाज और कुर्बानी) से रोका जाए। अगर कोई कानून का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस्लामी रीति रिवाज के पालन पर 5 लाख का जुर्माना

यही नहीं पिछले वर्ष तो पाकिस्तान में अहमदी मुसलमानों से एक शपथपत्र भी जमा करवाए गए थे। जिसमें उन्होने प्रशासन के सामने ईद-बकरीद जैसे त्योहार नहीं मानने का वचन दिया था। 
इसके लिए सरकार द्वारा एक विशेष अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 298-बी और 298-सी का कड़ाई से पालन करने की बात कही गई थी। इन धाराओं में अहमदिया समुदाय को मुसलमान कहने या इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन करने की अनुमति नहीं है।  इसमें कहा गया है कि यदि अहमदिया जानवरों की बलि देता है या किसी अन्य इस्लामी रीति-रिवाज का पालन करता है तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पर 5 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

पाकिस्तान में लंबे समय से हो रहा है अत्याचार

पाकिस्तान की कुल आबादी इस समय करीब 24 करोड़ है। इसमें से 1 करोड़ लोग गैर मुसलमान है। पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो के आंकड़ों की मानें तो साल 2021 में कुल जनसंख्या का 96.47% मुसलमान हैं। इसके अलावा 2.14% हिंदू, 1.27% ईसाई, 0.09% अहमदिया और 0.02% अन्य अल्पसंख्यक लोग हैं। इसके बाद भी उनके साथ लगातार अत्याचार होता रहा है।
दरअसल अहमदिया समुदाय को पाकिस्तान मुसलमान मानने से इनकार कर रहा है। ऐसे में सवाल आता है कि अहमदिया मुसलमान हैं या नहीं आखिर उनका इतिहास क्या है?

जानिए अहमदियों का इतिहास?

अहमदिया समुदाय इस्लाम के भीतर ही एक संप्रदाय है। इसकी शुरुआत 1889 में मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद क़ादियानी ने की थी। उनका उद्देस्य मुस्लिम समाज में मौजूद सामाजिक और धार्मिक बुराइयों को दूर करना और शिक्षा को बढ़ावा देना था। उनका जन्म 13 फरवरी 1835 को ब्रिटिश भारत के पंजाब में हुआ था। उनका मानना था कि हज़रत मुहम्मद आखिरी नबी नहीं हैं और कुरान भी आखिर पुस्तक नहीं है।

वैसे ऐसा भी नहीं है कि इस्लाम में अहमदिया ही एक कोई अलग संप्रदाय हो

अहमदिया इस्लाम के 73 संप्रदायों में से एक हैं।
अहमदिया दुनिया के 200 से ज़्यादा देशों में रहते हैं।

दुनिया में इनका संख्या 20 मिलियन के आसपास है।

इस समुदाय के पास हज़ारों मस्जिदें, स्कूल और अस्पताल हैं।

अहमदिया समुदाय को मार्डन मुसलमान माना जाता है।

पाकिस्तान अहमदिया को मुसलमान क्यों नहीं मानता?

अहमदिया लोग पैगंबर हजरत मोहम्मद के साथ-साथ अपना आध्यात्मिक मार्गदर्शक मिर्जा गुलाम अहमद को भी मानते हैं। इसी मान्यता के चलते पारंपरिक इस्लामी समुदाय अहमदियों को इस्लाम धर्म का अनुयायी नहीं मानते। पाकिस्तान उन्हें आधिकारिक रूप से गैर-मुस्लिम करार दिया गया है। इसके लिए साल 1974 में पाकिस्तान की संसद प्रस्ताव भी पास हुआ था। दक्षिण एशिया के साथ ही अहमदी कई देशों में फैले हैं। इनकी सबसे अधिक संख्या पाकिस्तान में है। पहले पंजाब के रबवाह शहर में वैश्विक मुख्यालय मुख्यालय हुआ करता था। हालांकि, अब इसका इंग्लैंड से ऑपरेट किया जाता है। पाकिस्तान के बाद सबसे ज्यादा अहमदी मुसलमान नाइजीरिया में रहते हैं। इसके बाद भारत में इनकी आबादी सबसे अधिक है। वहीं जर्मनी, तंजानिया, केन्या में भी अहमदी समुदाय के लोग रहते हैं, लेकिन इनके खिलाफ सबसे ज्यादा अत्याचार के मामले पाकिस्तान से आते रहे हैं।

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