भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हिंद महासागर में हुए एक विवादित घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत ने एक ईरानी नौसैनिक जहाज़ को अपने बंदरगाह में शरण देकर मानवता के आधार पर सही फैसला किया।
यह बयान उन्होंने रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान दिया। दरअसल, हाल ही में अमेरिका ने दावा किया था कि उसकी एक पनडुब्बी ने हिंद महासागर में ईरान के एक युद्धपोत को हमला करके डुबो दिया। यह घटना श्रीलंका के गॉल शहर के पास बताई गई थी। उस जहाज़ में करीब 130 लोग सवार थे और वह भारत में एक सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने आ रहा था।
इस घटना के बाद भारत की समुद्री सुरक्षा और सरकार की चुप्पी को लेकर विपक्ष और कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे।
तकनीकी खराबी के कारण भारत आया दूसरा जहाज़
जयशंकर ने बताया कि ईरान की तरफ से भारत को संदेश मिला था कि उनका एक जहाज़ तकनीकी खराबी के कारण भारत के बंदरगाह में आना चाहता है। वह उस समय भारतीय सीमा के सबसे करीब था, इसलिए भारत ने 1 मार्च को उसे अनुमति दे दी।
कुछ दिनों बाद वह जहाज़ कोच्चि बंदरगाह पहुंचा। माना जा रहा है कि इस जहाज़ का नाम आईआरआईएस लावन (IRIS Lavan) है।
डूबे जहाज़ को नहीं बचाया जा सका
जयशंकर ने यह भी कहा कि डूबे हुए दूसरे ईरानी जहाज़ की स्थिति श्रीलंका के पास भी खराब थी, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। उन्होंने कहा कि भारत ने इस पूरे मामले को कानूनी विवाद से अलग रखते हुए इंसानियत के नजरिए से देखा और मदद करने का फैसला किया।
हिंद महासागर की वास्तविकता समझने की जरूरत
जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर में सिर्फ क्षेत्रीय देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई बड़े देश भी अपनी सैन्य मौजूदगी रखते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि डिएगो गार्सिया जैसे सैन्य ठिकाने कई दशकों से यहां मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि भारत इस क्षेत्र में नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका निभाता है, लेकिन यहां की वास्तविकता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अमेरिका के बयान पर भी दिया जवाब
रायसीना डायलॉग में अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा था कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार बढ़ाते समय चीन के साथ हुई पुरानी गलतियों को नहीं दोहराएगा। इस पर जयशंकर ने कहा कि भारत की तरक्की को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी देश की प्रगति उसके अपनी ताकत और नीतियों से तय होती है, न कि दूसरे देशों की गलतियों से।































