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ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

जोन्स एक्ट, जिसे औपचारिक रूप से Merchant Marine Act of 1920 कहा जाता है, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण समुद्री कानून है, जिसे वर्ल्ड वॉर 1st के बाद लागू किया गया था।

Ayush Aman Rai द्वारा Ayush Aman Rai
19 March 2026
in चर्चित, विश्व
ईरान संकट के बीच ट्रंप का बड़ा कदम: क्यों हटाई 100 साल पुरानी जोन्स एक्ट की पाबंदी?

डोनाल्ड ट्रंप

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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में 100 साल पुराने जोन्स एक्ट में 60 दिनों की अस्थायी छूट देने का ऐलान किया है। इस फैसले का उद्देश्य बढ़ते ऊर्जा संकट के दौरान ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करना और घरेलू आपूर्ति को मजबूत करना है।

ईरान, इजराइल और US के बीच जारी संघर्ष ने वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर डाला है, खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा उत्पन्न होने से हालात और बिगड़ गए हैं। यह रणनीतिक समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी परिवहन का प्रमुख रास्ता है, जिसके प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।

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इस संकट से निपटने के लिए वॉशिंगटन ने जोन्स एक्ट में ढील देते हुए विदेशी जहाजों को 60 दिनों तक अमेरिकी बंदरगाहों के बीच जरूरी सामान ढोने की अनुमति दी है। आमतौर पर यह कानून केवल अमेरिकी जहाजों को ही इस तरह के परिवहन की इजाज़त देता है।

इसके साथ ही, अमेरिका ने अन्य बड़े कदम भी उठाए हैं जैसे वेनेजुएला के तेल निर्यात पर कुछ प्रतिबंधों में ढील और अपने रणनीतिक भंडार से बड़े पैमाने पर तेल जारी करना। ये सभी फैसले मिलकर वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने और सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव को कम करने की कोशिश का हिस्सा हैं।

जोन्स एक्ट क्या है और यह कैसे काम करता है?

जोन्स एक्ट, जिसे औपचारिक रूप से Merchant Marine Act of 1920 कहा जाता है, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण समुद्री कानून है, जिसे वर्ल्ड वॉर 1st के बाद लागू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य अमेरिका की घरेलू समुद्री परिवहन प्रणाली को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से एक सशक्त मर्चेंट मरीन बेड़ा बनाए रखना है।

यह कानून “कैबोटेज” को नियंत्रित करता है, यानी अमेरिका के भीतर एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक माल ढुलाई के नियम तय करता है। जोन्स एक्ट के तहत, किसी भी जहाज को अमेरिका के अंदर दो स्थानों के बीच सामान ले जाने के लिए चार सख्त शर्तें पूरी करनी होती हैं।

1. निर्माण : जहाज का निर्माण अमेरिकी शिपयार्ड में होना अनिवार्य है।
2. पंजीकरण : जहाज अमेरिकी झंडे के तहत रजिस्टर्ड होना चाहिए।
3. स्वामित्व : जहाज की मालिक कंपनी में कम से कम 75% हिस्सेदारी अमेरिकी नागरिकों की होनी चाहिए।
4. चालक दल : जहाज पर काम करने वाले अधिकांश कर्मचारी अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी होने चाहिए।

इन कड़े नियमों के कारण अमेरिका में घरेलू समुद्री व्यापार केवल सीमित संख्या में अमेरिकी जहाजों तक सिमट जाता है। विदेशी निर्मित या विदेशी स्वामित्व वाले जहाज इस व्यापार में हिस्सा नहीं ले सकते।

आलोचकों का मानना है कि इससे परिवहन लागत बढ़ती है और आपूर्ति में लचीलापन कम होता है, जबकि समर्थकों के अनुसार यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा, रोजगार और घरेलू शिपिंग उद्योग की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद यह कानून क्यों लाया गया?

वर्ल्ड वॉर I के बाद अमेरिका ने अपनी समुद्री रणनीति पर गंभीरता से पुनर्विचार किया, युद्ध के दौरान यह साफ हो गया था कि विदेशी जहाजों पर निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जोखिम भरी हो सकती है खासतौर पर तब, जब आपूर्ति श्रृंखला और सैन्य परिवहन का सवाल हो, इसी पृष्ठभूमि में वेस्ली जोन्स जैसे नीति निर्माताओं ने एक मजबूत घरेलू मर्चेंट मरीन बेड़े की जरूरत पर जोर दिया। उनका मानना था कि अमेरिका के पास अपने जहाज और प्रशिक्षित नाविक होने चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति या युद्ध के समय देश आत्मनिर्भर रह सके।
यही सोच आगे चलकर जोन्स एक्ट के रूप में सामने आई। इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि अमेरिका के पास पर्याप्त संख्या में जहाज और कुशल समुद्री कर्मी उपलब्ध हों, जो जरूरत पड़ने पर सैन्य अभियानों, रसद और जरूरी आपूर्ति को बिना किसी बाहरी निर्भरता के संभाल सकें।
संक्षेप में, यह कानून सिर्फ व्यापारिक नियम नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार रहने की एक रणनीतिक पहल थी।

ट्रंप ने जोन्स ऐक्ट में छूट क्यों दी?

पश्चिम एशिया के संघर्ष ने दुनिया के ऊर्जा मार्केट पर तत्काल और गहरा प्रभाव पड़ा है. एक बड़ा मोड़ तब आया जब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से होने वाले समुद्री यातायात को रोक दिया, जिससे फारस की खाड़ी से तेल और गैस की आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग कट गया. अनुमान के अनुसार इस क्षेत्र में उत्पादन का नुकसान 70 लाख से 1 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक हो सकता है, जो वैश्विक स्तर पर होने वाली मांग का लगभग 10 प्रतिशत है.

60 दिनों की छूट में क्या क्या शामिल है ?

ऊर्जा संकट और तेजी से बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने जोन्स एक्ट में 60 दिनों की अस्थायी छूट देकर आपूर्ति तंत्र को राहत देने की कोशिश की है। इस फैसले को “राष्ट्रीय रक्षा के हित” में उठाया गया कदम बताया गया है, क्योंकि वैश्विक हालात के चलते अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें कुछ ही हफ्तों में 25% से अधिक बढ़ चुकी हैं।

इस छूट का सबसे बड़ा असर यह है कि अब सीमित समय के लिए विदेशी जहाज भी अमेरिकी बंदरगाहों के बीच जरूरी सामान ढो सकेंगे, जिससे घरेलू शिपिंग नेटवर्क पर दबाव कम होगा और आपूर्ति तेज हो सकेगी।

60 दिनों की इस छूट में शामिल प्रमुख वस्तुएं:

1. कच्चा तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद. जैसे- पेट्रोल, डीजल, जेट ईंधन.
2. प्राकृतिक गैस और उसके डेरिवेटिव.
3. फर्टिलाइजर, जो वर्तमान कृषि सीजन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.
4. कोयला और अन्य ऊर्जा से संबंधित सामग्री.

अब आगे क्या?

वैश्विक ऊर्जा बाजार में दखल और नीतिगत फैसलों के बावजूद अनिश्चितता अभी भी खत्म नहीं हुई है। ईरान, United States और इजराइल के बीच जारी तनाव का सीधा असर तेल आपूर्ति और कीमतों पर पड़ रहा है, जिससे बाजार में भारी उतार-चढ़ाव बना हुआ है, आपूर्ति में रुकावट के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और फ्यूचर मार्केट में भी अनिश्चितता का माहौल है, भले ही इराक और लीबियाजैसे देशों से तेल उत्पादन और निर्यात बढ़ाने के प्रयास कुछ हद तक सफल रहे हैं, लेकिन यह राहत सीमित ही साबित हो रही है।

इसकी सबसे बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की रणनीतिक अहमियत है, दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी की सप्लाई इसी मार्ग से गुजरती है। ऐसे में खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुई किसी भी बाधा की पूरी भरपाई करना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है।

कुल मिलाकर, जब तक इस अहम समुद्री मार्ग पर स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता, ऊंची कीमतें और अनिश्चितता बनी रहने की पूरी संभावना है।

 

 

 

 

 

Tags: American maritime policycabotage law USAdomestic shipping law AmericaJones ActJones Act explainedMerchant Marine Act 1920US maritime lawUS merchant marine historyUS shipping regulationsWorld War 1 aftermath laws
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