ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक सुरक्षा माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया है। इस बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है, भारतीय सेना ने अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं खासतौर पर पाकिस्तान और चीन से लगती सीमाओं पर रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की दिशा में तेजी ला दी है। इसी कड़ी में भारत अपने दो स्वदेशी “ब्रह्मास्त्र” यानी अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों की तैनाती की तैयारी कर रहा है। ये सिस्टम खास तौर पर दुश्मन के छोटे मिसाइल, रॉकेट और ड्रोन जैसे खतरों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम माने जाते हैं, आधुनिक युद्ध में जहां ड्रोन और प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार तेजी से गेम-चेंजर बन रहे हैं, वहां भारत का यह कदम उसकी रक्षा रणनीति को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ये स्वदेशी सिस्टम न सिर्फ सीमाओं की सुरक्षा को कई गुना बढ़ाएंगे, बल्कि भविष्य के हाई-टेक युद्धों में भारत को रणनीतिक बढ़त भी देंगे।
क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रही है? ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है। ऐसे वैश्विक तनाव और पाकिस्तान-चीन सीमा पर बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को तेज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना ने एक और पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर रेजिमेंट को ऑपरेशनल कर लिया है और इस साल के अंत तक एक और रेजिमेंट शामिल करने की तैयारी में है। इसके साथ ही अब सेना के पास कुल 7 पिनाका रेजिमेंट तैनात हो चुकी हैं, जो मुख्य रूप से संवेदनशील सीमाओं पर सक्रिय हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आठवीं रेजिमेंट के लिए आधे से ज्यादा उपकरण प्राप्त हो चुके हैं और इसे 2026 के अंत तक पूरी तरह ऑपरेशनल करने का लक्ष्य रखा गया है। इतना ही नहीं, अगले साल दो और रेजिमेंट शामिल करने की योजना है, जिससे कुल संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी।
भारतीय सेना का दीर्घकालिक लक्ष्य 22 पिनाका रेजिमेंट तैयार करना है, जिनमें नई लंबी दूरी वाली गाइडेड मिसाइलों से लैस आधुनिक संस्करण शामिल होंगे। ये सिस्टम न केवल पुराने प्लेटफॉर्म्स की जगह लेंगे, बल्कि दुश्मन के छोटे मिसाइलों और ड्रोन हमलों का भी प्रभावी और सटीक जवाब देने में सक्षम होंगे।
चीन-पाक सीमा पर भारत की मजबूत सैन्य तैयारी, पिनाका बना नई ताकत का केंद्र
भारत की पाकिस्तान से सटी पश्चिमी और चीन से लगी उत्तरी सीमाएं लंबे समय से रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रही हैं। खासतौर पर गलवान घाटी झड़प के बाद भारतीय सेना ने अपनी आर्टिलरी क्षमता को तेजी से मजबूत करने का फैसला लिया।
इसी दिशा में, भारतीय सेना ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड, टाटा पावर और लार्सन एंड तुबरो के साथ लगभग 2,580 करोड़ रुपये का समझौता किया, जिसके तहत छह पिनाका रेजिमेंट तैयार की जा रही हैं। अब इनका उत्पादन और सीमाओं पर तैनाती तेज गति से की जा रही है।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य, खासकर ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान ड्रोन और मिसाइल स्वार्म अटैक की रणनीति को देखते हुए, पिनाका सिस्टम की अहमियत और बढ़ गई है। आधुनिक युद्ध में जहां एक साथ कई लक्ष्यों पर तेज और सटीक हमला करना जरूरी हो गया है, वहीं पिनाका जैसे मल्टीपल रॉकेट लॉन्च सिस्टम भारतीय सेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने में सक्षम हैं।
यही कारण है कि भारत अब अपनी सेना को ऐसे अत्याधुनिक हथियारों से लैस कर रहा है, जो भविष्य के हाई-टेक युद्ध में निर्णायक भूमिका निभा सकें।
पिनाका को ‘देसी ब्रह्मास्त्र’ क्यों कहा जाता है? जानिए इसकी ताकत और खासियत
पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम भारत का एक अत्याधुनिक स्वदेशी मल्टी-बारेल रॉकेट लॉन्चर है, जिसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। इसे भारतीय सेना का ‘देसी ब्रह्मास्त्र’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बेहद कम समय में व्यापक क्षेत्र में भारी तबाही मचाने की क्षमता रखता है।
पिनाका पारंपरिक 122 मिमी रॉकेट सिस्टम की तुलना में अधिक शक्तिशाली और सटीक है। यह एक साथ 12 रॉकेट दाग सकता है और कुछ ही सेकंड में दुश्मन के बड़े इलाके को निशाना बना सकता है। इसकी मारक क्षमता 40 से 75 किलोमीटर तक है, जबकि इसके नए गाइडेड वर्जन 120 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम हैं।
यह सिस्टम GPS और INS आधारित गाइडेंस तकनीक से लैस है, जिससे इसकी सटीकता कई गुना बढ़ जाती है। इसे खासतौर पर दुश्मन के ठिकानों, बंकरों, कमांड सेंटर और आर्टिलरी पोजीशन को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।
पिनाका की सबसे बड़ी खासियत इसकी “शूट एंड स्कूट” क्षमता है—यानी हमला करने के तुरंत बाद अपनी पोजीशन बदल लेना, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचा जा सके। यही वजह है कि आधुनिक युद्ध में यह भारतीय सेना के लिए एक गेम-चेंजर हथियार बन चुका है।
पिनाका की ताकत: क्यों भारतीय सेना का ‘देसी ब्रह्मास्त्र’ माना जाता है ये सिस्टम?
पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम आधुनिक युद्ध में भारतीय सेना की एक बेहद शक्तिशाली आर्टिलरी प्रणाली है, जिसकी खासियतें इसे खास बनाती हैं:
- मल्टी-बैरल लॉन्च सिस्टम: एक साथ 12 रॉकेट दागने की क्षमता, जिससे बड़े इलाके पर एकसाथ हमला संभव।
- तेज फायरिंग क्षमता: कुछ ही सेकंड में पूरा सल्वो फायर कर देता है, जिससे दुश्मन को प्रतिक्रिया का समय नहीं मिलता।
- लंबी मारक क्षमता: शुरुआती वर्जन 40 किमी तक, जबकि आधुनिक गाइडेड वर्जन 70–75 किमी या उससे अधिक दूरी तक सटीक हमला कर सकते हैं।
- उच्च सटीकता: GPS और INS आधारित गाइडेंस से टारगेट पर बेहद सटीक प्रहार।
- “शूट एंड स्कूट” तकनीक: फायरिंग के तुरंत बाद पोजीशन बदलने की क्षमता, जिससे जवाबी हमले से बचाव होता है।
- सैचुरेशन फायर पावर: बड़े क्षेत्र में भारी मात्रा में रॉकेट बरसाकर दुश्मन के बंकर, ठिकाने और सैनिक जमावड़े को नष्ट करने में सक्षम।
- हाई मोबिलिटी: ऑल-टेरेन व्हीकल पर आधारित, जिससे पहाड़, रेगिस्तान और कठिन इलाकों में भी तैनाती आसान।
- तेज तैनाती: कम समय में ऑपरेशनल होकर तुरंत हमला करने की क्षमता।
- ड्रोन और हल्के लक्ष्यों के खिलाफ प्रभावी: बड़े पैमाने पर फायरिंग से ड्रोन स्वार्म और छोटे मिसाइल सिस्टम को भी निष्क्रिय कर सकता है।
- पूरी तरह स्वदेशी तकनीक: भारत में विकसित, जिससे विदेशी निर्भरता कम और रखरखाव आसान।
- कम लागत, ज्यादा असर: भारी मिसाइल सिस्टम की तुलना में कम लागत में बड़े इलाके को नुकसान पहुंचाने की क्षमता।
- भविष्य के अपग्रेड: लंबी दूरी और अधिक सटीक गाइडेड वर्जन लगातार विकसित किए जा रहे हैं, जिससे इसकी ताकत और बढ़ेगी।
