ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दो भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित रूप से गुजरने की अनुमति मिल गई है। हालांकि युद्ध जैसे हालात के कारण ज्यादातर जहाज अभी भी इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं, क्योंकि उन्हें हमलों की चपेट में आने का डर है। यह तनाव 28 फरवरी से शुरू हुआ था।
सूत्रों के अनुसार, दोनों भारतीय जहाज बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच सुरक्षित तरीके से इस समुद्री रास्ते से निकल गए। हालांकि इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
इससे पहले एक लाइबेरिया के झंडे वाला तेल टैंकर, जिसमें सऊदी अरब का कच्चा तेल था और जिसका कप्तान भारतीय था, वह भी सुरक्षित रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर मुंबई बंदरगाह पहुंच गया था। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पैदा हुए तनाव के बीच यह पहला जहाज था जो इस रास्ते से सुरक्षित भारत पहुंचा।
इस बीच भारत के विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi से फोन पर बात कर पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की।
करीब दो हफ्तों से चल रहे अमेरिका-ईरान टकराव के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य एक अहम विवाद का केंद्र बन गया है। ईरान का कहना है कि इस रास्ते पर उसका नियंत्रण है, जबकि अमेरिका इस दावे को नहीं मानता। अमेरिका और इज़राइल के हमलों के बाद से इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही काफी कम हो गई है।
ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज इस रास्ते से गुजरना चाहता है, उसे पहले ईरान से अनुमति लेनी होगी। ईरानी नौसेना के कमांडर Alireza Tangsiri ने कहा कि दो जहाजों ने चेतावनी नहीं मानी, इसलिए उन्हें निशाना बनाया गया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां से हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता है, जो दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में एलएनजी भी भेजी जाती है।
अगर इस रास्ते में रुकावट आती है तो इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार, सप्लाई चेन और आम लोगों के खर्च पर भी पड़ सकता है।






























