नेपाल में संसद चुनाव के लिए मतदान शुरू, महीनों की अशांति के बाद जनता ने डाले वोट

नेपाल में सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ और पूरे दिन देशभर के हजारों मतदान केंद्रों पर जारी रहेगा। लगभग 3 करोड़ आबादी वाले इस हिमालयी देश में लोग संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के 275 सदस्यों को चुन रहे हैं।

नेपाल में संसद चुनाव के लिए मतदान शुरू

नेपाल में संसद चुनाव के लिए मतदान शुरू

गुरुवार सुबह नेपाल भर में मतदान शुरू हो गया। लोग नई संसद चुनने के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। यह हाल के वर्षों में देश के सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित चुनावों में से एक माना जा रहा है।

यह चुनाव उस समय हो रहा है जब कुछ महीने पहले भ्रष्टाचार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों ने राजनीतिक व्यवस्था को हिला दिया था और पिछली सरकार गिर गई थी। अब इस चुनाव में पारंपरिक नेताओं और युवाओं के नेतृत्व वाले नए राजनीतिक आंदोलन के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है।

नेपाल में सुबह 7 बजे से मतदान शुरू हुआ और पूरे दिन देशभर के हजारों मतदान केंद्रों पर जारी रहेगा। लगभग 3 करोड़ आबादी वाले इस हिमालयी देश में लोग संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के 275 सदस्यों को चुन रहे हैं।

अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने काठमांडू के धापासी में मतदान किया। देशभर में कई बड़े नेताओं और उम्मीदवारों ने भी सुबह ही वोट डाले।

श्र्रम संस्कृति पार्टी के अध्यक्ष हर्कराज सम्पांग ने सुनसरी जिले के इनरुवा में वोट दिया, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी के नेता माधव कुमार नेपाल ने रौतहट जिले के गौर में मतदान किया।

चुनाव अधिकारियों को उम्मीद है कि कम से कम 65 प्रतिशत लोग मतदान करेंगे, जिससे पता चलता है कि लोगों में चुनाव को लेकर काफी उत्साह है।

कई महीनों के अशांति के बाद चुनाव

यह चुनाव पिछले साल सितंबर में काठमांडू में शुरू हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद हो रहा है।

शुरुआत में हजारों युवाओं ने भ्रष्टाचार के खिलाफ, बेहतर शासन और कानून का सख्ती से पालन कराने की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए थे। लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए।

अगले दिन प्रदर्शन और उग्र हो गए। भीड़ ने प्रधानमंत्री कार्यालय, संसद, कई मंत्रालयों और सुप्रीम कोर्ट जैसे सरकारी भवनों को निशाना बनाया। कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों में आग लगा दी गई। एक पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी, जो उस समय विदेश मंत्री थीं, पर भी हमला किया गया।

काठमांडू के बाहर भी हिंसा फैल गई। भीड़ ने कई सरकारी दफ्तरों, नेताओं के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर हमला किया। कुछ जगहों पर जेल तोड़ दी गई और कैदी भाग गए।

इन घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पद से हटना पड़ा। तीन दिन बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी और वे नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।

इन प्रदर्शनों में कुल 77 लोगों की मौत हुई और 2300 से ज्यादा लोग घायल हुए।

प्रमुख उम्मीदवार और युवा नेता की चुनौती

इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुकाबले की है, वह पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और युवा नेता बालेन्द्र शाह के बीच है।

74 वर्षीय ओली दोबारा राजनीति में वापसी करना चाहते हैं। उनके सामने 35 वर्षीय बालेन्द्र शाह हैं, जो पहले एक रैपर थे और बाद में राजनेता बने। वे पहले काठमांडू के मेयर भी रह चुके हैं। बालेन्द्र शाह 2022 में तब चर्चा में आए जब उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर काठमांडू के मेयर का पद हासिल किया। उन्होंने नेपाली कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों को हराकर 61,767 वोट हासिल किए थे। झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में लगभग 1.63 लाख मतदाता हैं। यहीं से तय होगा कि ओली अपनी सीट बचा पाते हैं या शाह पहली बार राष्ट्रीय संसद में पहुंचते हैं।

प्रधानमंत्री पद के एक और दावेदार गगन थापा हैं, जो 49 वर्ष के हैं और हाल ही में नेपाल की सबसे पुरानी पार्टी नेपाली कांग्रेस के प्रमुख बने हैं। उन्होंने कहा है कि नेपाल की राजनीति में पुराने नेताओं के प्रभुत्व को खत्म होना चाहिए।

राजनीति में पीढ़ियों का बदलाव

यह चुनाव नेपाल की राजनीति में पीढ़ियों के बीच बढ़ते अंतर को भी दिखाता है। चुनाव में हिस्सा लेने वाले 3400 से ज्यादा उम्मीदवारों में लगभग एक-तिहाई की उम्र 40 साल या उससे कम है। करीब 8 लाख नए मतदाता भी इस बार पहली बार वोट डालने के पात्र हैं। इनमें से कई वही युवा हैं जिन्होंने सरकार गिराने वाले प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। काठमांडू में सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर लोग लाइन में खड़े दिखाई दिए, जबकि सुरक्षा बल पूरे चुनाव की निगरानी कर रहे हैं।

चुनाव प्रणाली और आगे क्या होगा

नेपाल में चुनाव मिश्रित प्रणाली से होता है। इसमें कुछ सीटों पर सीधे उम्मीदवार जीतते हैं और कुछ सीटें पार्टियों को उनके कुल वोट के आधार पर मिलती हैं।

कुल 275 सीटों में से

मतदाता चुनाव के दिन दो वोट डालते हैं—

  1. एक किसी उम्मीदवार के लिए

  2. दूसरा किसी राजनीतिक पार्टी के लिए

शाम 5 बजे मतदान खत्म होगा। लेकिन अनुपातिक प्रणाली के कारण वोटों की गिनती में ज्यादा समय लग सकता है, इसलिए अंतिम परिणाम तुरंत आने की संभावना कम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल है, इसलिए सरकार बनाने के लिए गठबंधन की जरूरत पड़ सकती है।

चुनाव के मुख्य मुद्दे

इस चुनाव में भ्रष्टाचार के अलावा रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों के अनुसार नेपाल की लगभग 20 प्रतिशत आबादी गरीबी में जीवन जी रही है, जबकि युवाओं में बेरोजगारी भी काफी ज्यादा है। नेपाल के पड़ोसी देशों भारत और चीन के साथ संबंध भी चुनावी बहस का अहम विषय हैं। नेपाल का लगभग दो-तिहाई अंतरराष्ट्रीय व्यापार भारत के साथ होता है, जबकि चीन का हिस्सा करीब 14 प्रतिशत है। चीन नेपाल को 130 मिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज भी दे चुका है।

चुनाव के दिन का माहौल

सुरक्षा कारणों से 4 मार्च की रात से लेकर मतदान खत्म होने तक सार्वजनिक और निजी वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी।

मतदान से पहले लाखों लोग अपने गृह जिलों में वोट डालने के लिए लौटे। अधिकारियों के अनुसार बुधवार सुबह तक लगभग 8 लाख लोग काठमांडू घाटी छोड़ चुके थे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना आमतौर पर नेपाल के सबसे बड़े त्योहार दशैं के समय ही देखा जाता है।

कई मतदाताओं ने उम्मीद जताई कि यह चुनाव देश में सकारात्मक बदलाव लाएगा। काठमांडू के एक मतदाता ने कहा कि वे चाहते हैं कि नई सरकार देश के विकास पर काम करे और लोगों का जीवन बेहतर बनाए।

एक महत्वपूर्ण परीक्षा

पूरे देश में मतदान जारी है और इसे नेपाल की राजनीति के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। यह चुनाव बताएगा कि क्या नेपाल की राजनीतिक व्यवस्था भ्रष्टाचार को लेकर जनता के गुस्से का समाधान कर सकती है और बदलाव चाहने वाली नई पीढ़ी को जगह दे सकती है।

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