साल 2025 से लेकर 2026 तक के विमान हादसे के आंकड़े देखा जाए तो , रोंगटे खड़े हो जाएंगे, कई फ्लाइट क्रैश हो गए कितने घरों के चिराग बुझ गए, फ्लाइट हादसा कम होने का नाम नहीं ले रहा , कल असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भारतीय वायु सेना का सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर शहीद हो गए। वायु सेना ने दोनों पायलटों के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
विमान गुरुवार को रूटीन मिशन पर उड़ान भर रहा था, जब असम के कार्बी आंगलोंग जिले के पहाड़ी क्षेत्र में उसका रडार संपर्क अचानक टूट गया। इसके बाद भारतीय वायु सेना की सर्च एंड रेस्क्यू टीमों ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से देर रात लगभग एक बजे विमान का मलबा खोजा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दुर्घटना पर दुख व्यक्त किया और कहा कि देश के लिए उनके साहस और सेवा को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदनाएं प्रकट की और कहा कि पूरा देश इस कठिन समय में उनके साथ खड़ा है।
सुखोई एसयू-30 एमकेआई भारतीय वायु सेना का एक आधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा-से-हवा और हवा-से-जमीन मिशन दोनों में सक्षम है। इसके अलावा, सुखोई-30 विमान पहले भी दुर्घटनाओं का शिकार हो चुका है, लेकिन उस समय दोनों पायलट सुरक्षित बचने में सफल रहे थे।
अगस्त 2019 का हादसा
अगस्त 2019 में एक सुखोई-30 एमकेआई प्रशिक्षण मिशन के दौरान असम के तेजपुर के पास धान के खेत में दुर्घटना हुई। उस समय विमान का नियंत्रण अचानक बाधित हो गया था, लेकिन दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। इस हादसे ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्रशिक्षण मिशन भी गंभीर जोखिम लिए होते हैं।
मई 2015 का हादसा
इससे पहले मई 2015 में तेजपुर एयरफोर्स बेस से टेक-ऑफ के तुरंत बाद एक और सुखोई-30 एमकेआई क्रैश हुआ। यह हादसा टेक-ऑफ के दौरान तकनीकी या मानव त्रुटि के कारण हुआ माना गया। उस समय भी दोनों पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे थे।
विमान की विशेषताएं और जोखिम
सुखोई एमकेआई 30 एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा-से-हवा और हवा-से-जमीन दोनों तरह के मिशन कर सकता है। इसकी उड़ान और संचालन क्षमता अत्याधुनिक है, लेकिन चुनौतीपूर्ण मौसम, पहाड़ी इलाके और तकनीकी कारण कभी-कभी हादसों का कारण बन सकते हैं।
सुरक्षा उपाय और प्रशिक्षण
भारतीय वायु सेना ने सुखोई-30 एमकेआई के लिए विशेष प्रशिक्षण और नियमित निरीक्षण प्रक्रिया अपनाई है। दुर्घटनाओं के बावजूद, विमान और पायलटों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए प्रोटोकॉल बनाए जाते हैं। इन हादसों से मिली सीख विमान संचालन और प्रशिक्षण के लिए अहम साबित हुई है।
इस घटना की जांच भारतीय वायु सेना द्वारा की जाएगी, जिससे हादसे के सही कारणों का पता चल सके। स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश की बहादुरी और सेवा को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।































