IPL के मैचों के दौरान ये काफी जाना-पहचाना चेहरा बन चुका है, ख़ासकर हैदराबाद के मैचों के दौरान। ये चेहरा कोई और नहीं, सनराइजर्स हैदराबाद फ्रेंचाइजी की CEO काव्या मारन हैं, जो अक्सर अपनी टीम को सपोर्ट करने के लिए मैदान में नज़र आती हैं।
फ़िलहाल अपनी एक दूसरी फ्रेंचाइजी टीम में पाकिस्तानी खिलाड़ी अबरार अहमद को खरीदने के बाद से ही काव्या मारन विवादों में हैं और भारत में उन्हें जमकर ट्रोल किया जा रहा है।
लेकिन काव्या मारन कौन हैं, और उन्हें क्यों ट्रोल किया जा रहा है?
काव्या मारन सन ग्रुप के चेयरमैन और कारोबारी कलानिधि मारन की बेटी हैं। कलानिधि मारन Sun TV Network के संस्थापक और चेयरमैन हैं, जो दक्षिण भारत का सबसे बड़ा टीवी नेटवर्क माना जाता है। इसके अतिरिक्त वे Sunrisers Hyderabad आईपीएल टीम के मालिक भी हैं।
मीडिया कारोबार के अलावा वो Sun Pictures के भी मालिक हैं, जो मूल रूप से दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रोडक्शन से जुड़ी है। इसके अतिरिक्त एविएशन कंपनी SpiceJet में भी उनकी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी और नियंत्रण रहा है।
मारन परिवार दक्षिण भारत का बेहद प्रतिष्ठित कारोबारी और राजनैतिक घराना है, जो बीते कई दशकों से दक्षिण भारत, विशेषकर तमिल नाडु की राजनीति को अपने अनुसार नियंत्रित करता आया है।
कलानिधि मारन DMK के संस्थापक और तमिल नाडु के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके एम.करुणानिधि के सगे भतीजे व मौजूदा मुख्यमंत्री स्टालिन के रिश्ते में भाई लगते हैं।
उनके दूसरे सगे भाई और काव्या मारन के चाचा दयानिधि मारन भी न सिर्फ DMK के वरिष्ठ नेता हैं, बल्कि मनमोहन सरकार के पहले कार्यकाल में 2004-2007 के बीच वो केंद्रीय दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री भी रह चुके हैं। अभी भी वो चेन्नई दक्षिण से लोकसभा सांसद हैं।
मारन बंधुओं के पिता और काव्या मारन के दादा भी DMK के बड़े नेता और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
यानी काव्या मारन का संबंध तमिल नाडु की बेहद ताक़तवर फैमिली है, जिनका पूरे दक्षिण भारत पर गहरा प्रभाव है।
क्या पाकिस्तानी खिलाड़ी को हटाएंगी काव्या ?
लेकिन फ़िलहाल काव्या मारन अब विवादों में हैं, क्योंकि उनकी एक दूसरी ‘फ्रेंचाइज़ी’ ने ब्रिटिश क्रिकेट टूर्नामेंट ‘द हंड्रेड’ की नीलामी में पाकिस्तान के स्पिनर अबरार अहमद को अपनी टीम सनराइज लीड्स के लिए खरीद लिया।
अब आम लोग तो दूर सनराइजर्स हैदराबाद के प्रशंसक भी उनके इस फैसले को नहीं पचा पा रहे हैं और वो सवाल पूछ रहे हैं कि आख़िर जो पाकिस्तानी क्रिकेटर भारतीय सेना का अपमान और पहलगाम हमले का मजाक उड़ा रहा था उसे टीम में खरीदने की ऐसा क्या मजबूरी हो गई?
इसी के चलते सोशल मीडिया पर काव्या मारन और उनकी टीम की आलोचना शुरू हो गई और #BoycottSRH जैसे हैशटैग भी ट्रेंड करने लगे।
हालांकि इस पूरे विवाद के बीच BCCI का कोई बयान नहीं आया है, क्योंकि ये टूर्नामेंट बेसिकली इंग्लिश क्रिकेट बोर्ड (ECB) का आयोजन है और इसीलिए BCCI का कोई भी कंट्रोल न तो इसमें हिस्सा लेनी वाली टीमों पर है और न ही उनमें खेलने वाले खिलाड़ियों पर।
लेकिन फिर भी सबकी नजरें सनराइजर्स और काव्या मारन पर हैं कि क्या वो अबरार अहमद को कॉन्टिन्यू करती हैं, या फिर बांग्लादेश के मुस्तफिजुर रहमान की तरह उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा ?
































