हिमाचल में कुदरत के दो रंग: कहीं ओलावृष्टि से फसलों पर आफत, तो कहीं तपती गर्मी के बीच स्कूलों का बदला समय

हिमाचल प्रदेश, जिसे देवताओं की भूमि कहा जाता है, इन दिनों कुदरत के दो बेहद अलग और चुनौतीपूर्ण रूपों से जूझ रहा है।

हिमाचल मौसम अपडेट

हिमाचल प्रदेश, जिसे देवताओं की भूमि कहा जाता है, इन दिनों कुदरत के दो बेहद अलग और चुनौतीपूर्ण रूपों से जूझ रहा है। एक तरफ शिमला के ऊपरी इलाकों में भारी ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है, तो दूसरी तरफ ऊना जैसे मैदानी जिलों में तपती गर्मी ने प्रशासन को स्कूलों का समय बदलने पर मजबूर कर दिया है। पिछले तीन दिनों से जारी मौसम के इस अनिश्चित मिजाज ने न केवल आम जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के दौरे पर भी पानी फेर दिया।

राष्ट्रपति का दौरा रद्द: मौसम ने रोकी ‘पालमपुर’ की राह

हिमाचल की शांत वादियों में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू का आगमन राज्य के लिए एक बड़ा गौरवपूर्ण अवसर था। अटल टनल के दीदार के बाद उनका अगला पड़ाव पालमपुर था, लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। हिमाचल के आसमान पर छाए घने बादलों और अनिश्चित दृश्यता (visibility) के कारण सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति का पालमपुर दौरा रद्द करना पड़ा। यह इस बात का प्रमाण है कि पहाड़ों में मौसम किस कदर हावी है कि वीवीआईपी (VVIP) कार्यक्रमों को भी स्थगित करना पड़ रहा है।

ऊपरी इलाकों में तबाही: कुफरी, रोहड़ू और चौपाल में बरसे ‘सफेद ओले’

शिमला जिले के पर्यटन स्थल कुफरी समेत ऊपरी इलाकों जैसे रोहड़ू और चौपाल में गुरुवार को जो मंजर दिखा, उसने बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। दोपहर बाद अचानक आसमान काला हुआ और फिर शुरू हुई भारी ओलावृष्टि। देखते ही देखते सड़कें और खेत सफेद चादर से ढक गए।

यह ओलावृष्टि सेब के बागवानों और मटर की खेती करने वाले किसानों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है। इस समय सेब की फसल अपने शुरुआती और नाजुक दौर में होती है, ऐसे में ओलों की मार ने आने वाले सीजन की उम्मीदों को गहरा जख्म दिया है। किसानों का कहना है कि साल भर की मेहनत मिनटों में मिट्टी में मिल गई। न केवल शिमला, बल्कि मनाली और कुल्लू के ऊंचे क्षेत्रों में भी इसी तरह का माहौल बना हुआ है।

ऊना की तपिश: स्कूलों के समय में प्रशासन का बड़ा बदलाव

पहाड़ों में जहाँ ओले गिर रहे हैं, वहीं हिमाचल का प्रवेश द्वार कहे जाने वाले ऊना और बिलासपुर जैसे मैदानी इलाके भीषण गर्मी की चपेट में हैं। ऊना में पारा 35 डिग्री के पार बना हुआ है, जिससे स्कूली बच्चों की सेहत पर खतरा मंडराने लगा था। इसे देखते हुए ऊना के जिला उपायुक्त (DC) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

4 मई से ऊना के सभी सरकारी और निजी स्कूलों (प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी तक) का समय बदल दिया गया है। अब बच्चे सुबह 7:30 बजे स्कूल पहुँचेंगे और दोपहर 1:30 बजे उनकी छुट्टी हो जाएगी, ताकि वे दोपहर की झुलसाने वाली लू से बच सकें। यह कदम दर्शाता है कि एक ही राज्य के भीतर मौसम की विषमताएँ कितनी व्यापक हैं।

पारे में भारी गिरावट: भूंतर में 10 डिग्री लुढ़का तापमान

मौसम विभाग के अनुसार, बारिश और ओलावृष्टि के कारण मध्य और ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कुल्लू के भूंतर में अधिकतम तापमान सामान्य से 10 डिग्री नीचे गिरकर 20.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुँच गया है। वहीं धर्मशाला और सुंदरनगर में भी पारा सामान्य से 4 से 6 डिग्री कम दर्ज किया गया। यह अचानक आई ठंडक सैलानियों के लिए तो सुखद है, लेकिन स्थानीय निवासियों के लिए स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां लेकर आई है।

पर्यटन की रफ़्तार और बारिश का आंकड़ा

खराब मौसम और बारिश के बावजूद, मैदानी इलाकों की गर्मी से बचने के लिए भारी संख्या में सैलानी शिमला और मनाली पहुँच रहे हैं। शिमला के मॉल रोड और रिज पर छाए बादलों के बीच पर्यटक सुहावने मौसम का आनंद ले रहे हैं। आँकड़ों की बात करें तो 1 मार्च से अब तक हिमाचल में सामान्य से 11 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। चंबा और लाहौल-स्पीति में सूखे जैसे हालात हैं, जबकि अन्य जिलों में बारिश का औसत सामान्य के करीब पहुँच रहा है। पिछले 24 घंटों में मनाली में सबसे ज्यादा 14 एमएम और सराहन में 25.5 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई।

येलो अलर्ट: 5 मई तक सावधान रहने की हिदायत

मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, राहत अभी मिलने वाली नहीं है। 3 मई से एक बार फिर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने वाला है। विभाग ने चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। इन इलाकों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। 5 मई तक पूरे प्रदेश में रुक-रुक कर बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी रहने की संभावना है।

प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि वे नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी रास्तों से दूर रहें, क्योंकि अचानक होने वाली भारी बारिश भूस्खलन का कारण बन सकती है।

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