रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं। इस दौरे का उद्देश्य भारत और रूस के बीच व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना है, यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देश वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत-रूस आयोग की अहम बैठक
इस दौरे का मुख्य आकर्षण भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की बैठक है, जिसमें व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर चर्चा की जाएगी, इस बैठक की संयुक्त अध्यक्षता रूस की ओर से डेनिस मंतुरोव और भारत की ओर से एस. जयशंकर करेंगे, यह मंच दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां वर्तमान स्थिति की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा होगी।
व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर जोर
दौरे से पहले मंतुरोव ने कहा कि यह आयोग भारत और रूस के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
बैठकों में खासतौर पर निम्न बिंदुओं पर ध्यान दिया जाएगा:
- द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाना
- वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया को अधिक सरल और प्रभावी बनाना
- लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करना
इसके अलावा, दोनों देश निवेश के नए अवसरों को बढ़ावा देने और उद्योग तथा तकनीक के क्षेत्र में संयुक्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी विचार करेंगे।
2030 आर्थिक सहयोग कार्यक्रम की समीक्षा
भारत और रूस ने दिसंबर 2025 में “Economic Cooperation Programme 2030” को अपनाया था, जो दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी का रोडमैप है, इस दौरे के दौरान इस कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, चर्चा इस बात पर भी होगी कि बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में इस योजना को कैसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
अपने दौरे के दौरान मंतुरोव भारत के कई वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात करेंगे। इनमें प्रमुख हैं:
- अजित डोभाल
- निर्मला सीतारमण
इन बैठकों में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक चुनौतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
भारत-रूस संबंधों की पृष्ठभूमि
भारत और रूस के बीच संबंध दशकों पुराने हैं और यह साझेदारी रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में फैली हुई है, दोनों देशों ने समय-समय पर वैश्विक मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन किया है, जिससे उनके संबंध और मजबूत हुए हैं।
बदलते वैश्विक परिदृश्य में सहयोग
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जहां आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियां बढ़ रही हैं, भारत और रूस अपने सहयोग को और गहरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उच्चस्तरीय दौरे दोनों देशों के बीच विश्वास को मजबूत करते हैं और नए अवसरों को जन्म देते हैं।
भविष्य की संभावनाएं
मंतुरोव का यह दौरा भारत-रूस संबंधों में नई ऊर्जा भर सकता है। खासतौर पर व्यापार, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, इससे न केवल दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी उनकी साझेदारी को नई पहचान मिल सकती है।
रूस के उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, यह यात्रा इस बात का संकेत देती है कि भारत और रूस बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपने सहयोग को और व्यापक और प्रभावी बनाना चाहते हैं।






























