अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक बार फिर मानव इतिहास का नया अध्याय लिखने की तैयारी हो रही है। NASA अपने महत्वाकांक्षी Artemis II मिशन के तहत इंसानों को चंद्रमा के पास भेजने जा रहा है। इस मिशन में दुनिया के सबसे शक्तिशाली रॉकेट, Space Launch System (SLS), का उपयोग किया जाएगा।
यह मिशन अपोलो युग के बाद पहली बार इंसानों को चांद के पास ले जाने का प्रयास है। Artemis II में चार अंतरिक्ष यात्री Orion स्पेसक्राफ्ट के जरिए चंद्रमा की परिक्रमा करेंगे और सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लौटेंगे।
SLS रॉकेट: शक्ति और तकनीक का संगम
SLS एक सुपर हैवी-लिफ्ट रॉकेट है, जिसे खासतौर पर गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी ऊंचाई लगभग 98 मीटर (322 फीट) है, जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी अधिक है।
पूरी तरह ईंधन से भरे इस रॉकेट का वजन लगभग 2,600 मीट्रिक टन है। लॉन्च के समय यह करीब 39.1 मेगान्यूटन का जोर पैदा करता है, जो अपोलो मिशन के Saturn V रॉकेट से लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।
इसमें चार RS-25 लिक्विड इंजन और दो शक्तिशाली सॉलिड रॉकेट बूस्टर लगे हैं। कोर स्टेज में लिक्विड हाइड्रोजन और लिक्विड ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है, जिससे यह अत्यधिक ऊर्जा उत्पन्न करता है।
Orion स्पेसक्राफ्ट और मिशन की दूरी
Artemis II मिशन में SLS रॉकेट Orion स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में भेजेगा। यह स्पेसक्राफ्ट चार अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा करेगा।
यह मिशन इंसानों को पृथ्वी से लगभग 4.5 लाख किलोमीटर दूर तक ले जाएगा, जो अब तक मानव द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी होगी।
SLS Orion को इतनी तेज गति प्रदान करता है कि वह चंद्रमा के पीछे से घूमकर “फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी” के जरिए सुरक्षित रूप से वापस लौट सके।
SLS की प्रमुख क्षमताएं और उपयोग
SLS की सबसे बड़ी खासियत इसकी भारी वजन उठाने की क्षमता है। यह रॉकेट लगभग 27 मीट्रिक टन वजन को चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचा सकता है।
भविष्य में इसके और उन्नत संस्करण—Block 1B और Block 2—और अधिक क्षमता के साथ 38 से 46 मीट्रिक टन तक वजन ले जाने में सक्षम होंगे।
यह रॉकेट केवल मानव मिशनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, कार्गो मिशन और गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी किया जाएगा।
सुरक्षा और विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान
SLS को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें उन्नत कंप्यूटर सिस्टम और क्रू सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
हालांकि यह रॉकेट पुन: उपयोग (reusable) नहीं है, लेकिन इसकी विश्वसनीयता और स्थिरता इसे खास बनाती है। यह NASA के दशकों के अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता पर आधारित है।
विकास में समय और लागत
SLS रॉकेट का विकास 2011 में शुरू हुआ था। इसका पहला मिशन, Artemis I, 2022 में लॉन्च किया गया, यानी इसे तैयार होने में लगभग 11 साल का समय लगा।
इस पूरे कार्यक्रम पर अब तक लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। एक बार लॉन्च करने की लागत करीब 21 हजार करोड़ रुपये के आसपास है।
हालांकि इसकी लागत अधिक है, लेकिन NASA इसे भविष्य में अधिक किफायती बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
Saturn V से तुलना: कितना आगे है SLS?
SLS की तुलना अक्सर Apollo युग के Saturn V रॉकेट से की जाती है। Saturn V ने 1960 और 70 के दशक में इंसानों को चांद तक पहुंचाया था।
लेकिन SLS आधुनिक तकनीक, बेहतर नियंत्रण प्रणाली और उन्नत सुरक्षा के साथ कई मायनों में उससे आगे है। इसका लॉन्च थ्रस्ट अधिक है और यह भविष्य के गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है।
जहां Saturn V केवल Apollo मिशनों तक सीमित था, वहीं SLS का उपयोग चांद के अलावा मंगल और उससे आगे के अभियानों में भी किया जाएगा।
भविष्य की योजनाएं: चांद से मंगल तक
Artemis कार्यक्रम का उद्देश्य केवल चांद की परिक्रमा तक सीमित नहीं है। NASA की योजना चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने और भविष्य में मंगल मिशन की तैयारी करने की है।
SLS इस पूरी रणनीति का केंद्र है। यह रॉकेट न केवल अंतरिक्ष यात्रियों को चांद तक पहुंचाएगा, बल्कि वहां आवश्यक उपकरण और संसाधन भी भेजेगा।
NASA का Artemis II मिशन और SLS रॉकेट अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक नई दिशा की शुरुआत है। यह तकनीक, शक्ति और मानव साहस का संगम है, जो आने वाले समय में अंतरिक्ष विज्ञान को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
यदि यह मिशन सफल रहता है, तो यह न केवल चांद पर मानव वापसी का रास्ता खोलेगा, बल्कि मंगल जैसे दूरस्थ ग्रहों तक पहुंचने के सपने को भी साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।






























