महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक मल्टीनेशनल आईटी कंपनी में गंभीर आरोपों के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने सात टीम लीडरों को गिरफ्तार किया है, जिन पर धर्मांतरण का रैकेट चलाने, महिला कर्मचारियों के साथ यौन शोषण करने और हिंदू कर्मचारियों पर धार्मिक दबाव बनाने के आरोप लगे हैं।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में आसिफ अंसारी, शफी शेख, शाह रुख कुरैशी, रज़ा मेमन, तौसीफ अत्तार और दानिश शेख शामिल हैं, जबकि एक महिला आरोपी की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। सभी आरोपी कंपनी में सुपरवाइजरी भूमिका में थे और जूनियर कर्मचारियों को मैनेज करते थे।
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई कई कर्मचारियों की शिकायतों के बाद की गई, जिनमें आठ महिला कर्मचारी और एक पुरुष कर्मचारी शामिल हैं। इन सभी ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न, मानसिक दबाव और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए हैं।
आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस कमिश्नर ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है, जो पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी।
मामले की शुरुआत तब हुई जब एक युवती के माता-पिता ने पुलिस से संपर्क किया। उन्होंने अपनी बेटी के व्यवहार में अचानक बदलाव को लेकर चिंता जताई। शिकायत के मुताबिक, युवती ने बुर्का पहनना शुरू कर दिया था और रमजान के रोजे रखने लगी थी, जिससे परिवार चिंतित हो गया और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
जांच शुरू होने के बाद कई अन्य कर्मचारी भी सामने आए और उन्होंने भी इसी तरह के आरोप लगाए। पुलिस के अनुसार अब तक इस मामले में कुल नौ आपराधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
महिला कर्मचारियों ने अपने बयानों में आरोप लगाया है कि वरिष्ठ पदों पर बैठे कुछ सहकर्मी पहले उनसे दोस्ती करते थे और फिर धीरे-धीरे उन पर भावनात्मक दबाव बनाते थे। कुछ महिलाओं ने दावा किया कि शादी का झांसा देकर उनसे संबंध बनाए गए, जबकि कुछ ने छेड़छाड़, अनुचित स्पर्श और जबरन नजदीकी बनाने की कोशिशों के आरोप लगाए।
एक पीड़िता ने बताया कि एक आरोपी ने ऑफिस परिसर और बिल्डिंग की सीढ़ियों में उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की। कई महिलाओं ने यह भी कहा कि उनके निजी जीवन को लेकर अश्लील टिप्पणियां की जाती थीं और उनसे निजी सवाल पूछे जाते थे।
जांच एजेंसियों का मानना है कि ये घटनाएं 2022 से लेकर 2026 की शुरुआत तक कई वर्षों से चल रही थीं।
यौन शोषण के आरोपों के साथ-साथ इस मामले में धार्मिक दबाव के भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। एक पुरुष कर्मचारी ने पुलिस को बताया कि उसके हिंदू रीति-रिवाजों का मजाक उड़ाया जाता था और उसे दूसरे धर्म से जुड़ी प्रार्थनाएं करने के लिए मजबूर किया जाता था। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे उसकी इच्छा के खिलाफ मांस, जिसमें बीफ और मटन शामिल था, खाने के लिए मजबूर किया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जांच में यह भी सामने आया है कि एक व्यक्ति को धर्मांतरण से जुड़े धार्मिक प्रक्रिया के लिए मुंबई ले जाया गया था। जांच के दौरान कथित धर्मांतरण से जुड़े कुछ फोटो भी बरामद किए गए हैं।
इस मामले में कंपनी की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। एक महिला पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने कंपनी के हेड ऑफ ह्यूमन रिसोर्सेज (HR) से औपचारिक शिकायत की, तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके मुताबिक, उसे कहा गया कि इस तरह का व्यवहार “कॉरपोरेट कल्चर में सामान्य” है।
इस बयान के बाद कंपनी की आंतरिक शिकायत प्रणाली और कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन आरोपों को बेहद गंभीर बताया और कहा कि पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की है।
वहीं राज्य मंत्री नितेश राणे ने दावा किया कि करीब 15 पीड़ितों ने शिकायत दी हो सकती है और अन्य लोगों से भी आगे आने की अपील की। उन्होंने कंपनी के HR विभाग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर ऐसी गतिविधियां चल रही थीं, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
उन्होंने यह भी बताया कि जब आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, तो वहां करीब 600 लोगों की भीड़ जमा हो गई थी, जिससे मामले की संवेदनशीलता और बढ़ गई।
फिलहाल SIT इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह मामला किसी बड़े संगठित नेटवर्क का हिस्सा है और क्या इसमें और लोग भी शामिल हैं। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतने लंबे समय तक एक प्रतिष्ठित कंपनी में यह सब कैसे चलता रहा और किसी ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की।
जांच अभी जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, मामले में और खुलासे हो सकते हैं।






























