सीबीएसई ने Class 12 के छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब बोर्ड के नए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है।
CBSE ने इस साल कॉपियों की जांच के लिए डिजिटल OSM सिस्टम शुरू किया था। इसके तहत शिक्षकों ने छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी देखकर नंबर दिए। बोर्ड का कहना था कि इससे जांच प्रक्रिया तेज और ज्यादा पारदर्शी होगी। लेकिन रिजल्ट आने के बाद देशभर से कई शिकायतें सामने आने लगीं।
छात्रों ने लगाए कम नंबर और अधूरी जांच के आरोप
सीबीएसई के आंकड़ों के अनुसार, 4,04,319 छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मांगी है। इसके तहत कुल 11,31,961 कॉपियों के लिए आवेदन किए गए। बोर्ड अब तक 8,98,214 उत्तर पुस्तिकाएं ऑनलाइन उपलब्ध करा चुका है।
छात्रों का आरोप है कि कई सवालों की जांच नहीं हुई, कुछ उत्तरों को आधे नंबर मिले और कई स्कैन कॉपियां धुंधली थीं। कुछ छात्रों ने यह भी शिकायत की कि उत्तर पुस्तिका देखने के दौरान पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था।
सोशल मीडिया पर भी छात्रों और अभिभावकों ने स्क्रीनशॉट साझा कर दावा किया कि कुछ जवाबों पर नंबर नहीं दिए गए या गलत तरीके से अंक दिए गए हैं। इसके बाद डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।
विरोध के बाद CBSE ने घटाई फीस
लगातार आलोचना के बाद CBSE ने री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन की फीस कम कर दी। अब स्कैन कॉपी के लिए 100 रुपये प्रति विषय और मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए भी 100 रुपये प्रति विषय देने होंगे। री-इवैल्यूएशन की फीस प्रति प्रश्न के हिसाब से ली जाएगी।
पहले स्कैन कॉपी के लिए 700 रुपये और वेरिफिकेशन के लिए 500 रुपये फीस तय थी। बोर्ड ने यह भी कहा है कि अगर री-इवैल्यूएशन के बाद छात्रों के नंबर बढ़ते हैं तो फीस वापस कर दी जाएगी।
ऐसे कर सकते हैं आवेदन
छात्रों को सबसे पहले CBSE पोर्टल से अपनी स्कैन उत्तर पुस्तिका डाउनलोड करनी होगी। इसके बाद उन्हें देखना होगा कि सभी सवाल जांचे गए हैं या नहीं, कुल अंक सही हैं या नहीं और सभी पेज मौजूद हैं या नहीं।
अगर कोई गलती मिलती है तो छात्र मार्क्स वेरिफिकेशन या किसी विशेष प्रश्न के री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। CBSE ने साफ किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद नंबर बढ़ भी सकते हैं, घट भी सकते हैं या जैसे हैं वैसे ही रह सकते हैं। इसके बाद जारी अंक ही अंतिम माने जाएंगे।
विवाद सिर्फ नंबरों तक सीमित नहीं
यह विवाद अब सिर्फ परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रह गया है। तकनीकी समस्याएं, पारदर्शिता को लेकर सवाल और उत्तर पुस्तिकाओं तक पहुंच में दिक्कतों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है।
इसी बीच एक किशोर हैकर के वायरल दावे ने भी विवाद बढ़ाया। उसने दावा किया था कि CBSE से जुड़े पोर्टल में सुरक्षा खामियां हैं। हालांकि बोर्ड ने बाद में साफ किया कि मूल्यांकन प्रणाली में कोई सेंध नहीं लगी और वायरल स्क्रीनशॉट केवल टेस्ट प्लेटफॉर्म के थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। Rahul Gandhi ने डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए, जबकि CBSE ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अपने सिस्टम का बचाव किया।
अब री-इवैल्यूएशन विंडो खुलने के बाद हजारों छात्र फिर से पोर्टल पर लॉगिन कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि दूसरी जांच के बाद उनके रिजल्ट को लेकर स्थिति साफ हो जाएगी।
