मणिपुर की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह को राज्यसभा के जरिए दिल्ली ला सकती है। अगर पार्टी इस फैसले पर अंतिम मुहर लगाती है, तो बीरेन सिंह जल्द ही राष्ट्रीय राजनीति में एक नई भूमिका में नजर आ सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि पूर्वोत्तर को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने के लिए बीजेपी उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री पद भी सौंप सकती है।
एन. बीरेन सिंह पहली बार 15 मार्च 2017 को मणिपुर के मुख्यमंत्री बने थे। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बाद, उन्होंने राज्य में पहली बार पार्टी को मजबूती से सत्ता में स्थापित करने में मदद की थी। उनके नेतृत्व में बीजेपी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जीत हासिल की और वे लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। हालांकि, मई 2023 में भड़की मैतेई-कुकी हिंसा के कारण उनकी सरकार लगातार दबाव में रही। राज्य में हुई हिंसा, विस्थापन और कथित प्रशासनिक विफलताओं को लेकर विपक्ष ने उन्हें लगातार निशाने पर लिया।
करीब डेढ़ साल तक राजनीतिक दबाव झेलने के बाद, आखिरकार एन. बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था।
क्या दिल्ली में पूर्वोत्तर का प्रतिनिधित्व बढ़ाना चाहती है बीजेपी?
इसके कई महीनों बाद, बीजेपी ने युमनम खेमचंद सिंह को मणिपुर का नया मुख्यमंत्री नियुक्त किया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि पार्टी एन. बीरेन सिंह को पूरी तरह से दरकिनार नहीं करना चाहती थी, और अब उन्हें राज्यसभा भेजने को लेकर चर्चाएं अंतिम दौर में हैं।
हाल के दिनों में दिल्ली में केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल (मंत्रिमंडल विस्तार) की अटकलें भी तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी वर्ष 2027 और 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए केंद्र में पूर्वोत्तर राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व देना चाहती है। ऐसी स्थिति में, पूर्वोत्तर में बीरेन सिंह के अनुभव और प्रभाव को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी के भीतर यह भी माना जाता है कि मैतेई समुदाय के बीच उनका अभी भी खासा प्रभाव है।
मणिपुर में राज्यसभा की केवल एक सीट है। वर्तमान में इस सीट पर बीजेपी के महाराजा लीशेम्बा सनाजाओबा का कब्जा है, जिनका कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो रहा है। इस सीट के लिए अब एन. बीरेन सिंह का नाम सबसे आगे चल रहा है। चूंकि राज्यसभा चुनाव का फैसला विधायकों (MLAs) के वोटों से होता है, इसलिए संख्या बल के मामले में बीजेपी बेहद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है।
मणिपुर विधानसभा में बीजेपी का मजबूत गणित
60 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में बीजेपी ने 2022 के चुनावों के बाद 32 सीटें जीती थीं। बाद में, जदयू (JD-U) के पांच विधायक भी बीजेपी में शामिल हो गए, जिससे पार्टी की ताकत और बढ़ गई। इसके अलावा, नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) और कुछ निर्दलीय विधायक भी एनडीए (NDA) खेमे के साथ जुड़े हुए हैं। इसका मतलब है कि बीजेपी को अपने पसंदीदा राज्यसभा उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने में ज्यादा मुश्किल नहीं होनी चाहिए।
मणिपुर की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू वहां का जातीय संतुलन (ethnic balance) है। घाटी के इलाकों में मैतेई समुदाय का दबदबा है, जबकि पहाड़ी इलाकों में कुकी और नगा समुदाय का प्रभाव है। बीजेपी के अधिकांश विधायक मैतेई समुदाय से आते हैं। पार्टी के पास कुकी-ज़ो समुदाय के भी कई विधायक थे, हालांकि उनमें से कुछ ने हिंसा के बाद खुले तौर पर असंतोष व्यक्त किया था। वहीं, एनपीएफ (NPF) के जरिए बीजेपी ने नगा-बहुल क्षेत्रों में भी अपना प्रभाव बनाए रखा है।
