पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘रक्तपात’ कोई नया शब्द नहीं है, लेकिन बुधवार की रात मध्यमग्राम के पास जो हुआ, उसने राज्य के सुरक्षा तंत्र और राजनीतिक गलियारों को हिलाकर रख दिया है। डोलतला और मध्यमग्राम चौमाथा के बीच की वह सड़क, जो आमतौर पर देर रात तक वाहनों की आवाजाही से गुलज़ार रहती है, अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। शुभेंदु अधिकारी के ‘मिस्टर डिपेंडेबल‘ कहे जाने वाले 42 वर्षीय चंद्रनाथ रथ की हत्या ने यह साबित कर दिया है कि बंगाल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता अब ‘प्रोफेशनल हिट’ (पेशेवर हत्याओं) के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
उस काली रात का मंजर: जब बीच सड़क पर थमी सांसे
बुधवार की रात जब चंद्रनाथ रथ अपनी सफेद स्कॉर्पियो (SUV) में सवार होकर जा रहे थे, तब दोहरिया के पास अचानक उनकी गाड़ी को रुकना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। एक मोटरसाइकिल SUV के बगल में आकर रुकी और पलक झपकते ही शूटर ने बेहद करीब से फायरिंग शुरू कर दी।
जब तक भीड़ मौके पर पहुंचती, हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर गायब हो चुके थे। गाड़ी के भीतर चंद्रनाथ रथ खून से लथपथ पड़े थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हमले में उनके ड्राइवर बुद्धदेव बेरा भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज कोलकाता के अपोलो अस्पताल में चल रहा है।
जांच में बड़ा खुलासा: ‘इम्पल्सिव’ नहीं, बल्कि ‘कोऑर्डिनेटेड’ था हमला
पश्चिम बंगाल पुलिस और अब सीआईडी (CID) की शुरुआती जांच इस ओर इशारा कर रही है कि यह हमला किसी गुस्से या अचानक हुई झड़प का नतीजा नहीं था। जांचकर्ताओं का मानना है कि हत्यारों ने रथ की गतिविधियों पर कई दिनों तक नजर रखी थी।
सुनियोजित घेराबंदी: पुलिस सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने एयरपोर्ट कॉरिडोर से ही रथ की गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया था। योजना के तहत, कुछ मोटरसाइकिलों ने पीछे से घेरा बनाया, जबकि एक अन्य वाहन ने आगे जाकर रास्ता रोक दिया ताकि SUV की रफ्तार कम हो जाए।
फर्जी नंबर प्लेट का खेल: पुलिस ने एक संदिग्ध चार पहिया वाहन को ज़ब्त किया है, जिसका इस्तेमाल हमलावरों को कवर देने के लिए किया गया था। जांच में पाया गया कि इस गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट लगाई गई थी, ताकि पहचान छिपाई जा सके।
हथियारों की सटीकता: साधारण अपराधी नहीं, एक्सपर्ट्स का काम!
अपराध स्थल से बरामद कारतूसों ने पुलिस को हैरान कर दिया है। जांच की जा रही है कि क्या इस हमले में ग्लॉक (Glock) सीरीज की अत्याधुनिक पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था। बंगाल में राजनीतिक हिंसा के दौरान आमतौर पर देसी कट्टों का उपयोग होता है, लेकिन इस मामले में ‘प्रेसिजन फायरिंग’ (सटीक निशाना) की गई।
जांचकर्ताओं ने पाया कि ज्यादातर गोलियां सीधे रथ को लगीं, जबकि गाड़ी के अन्य हिस्सों को बहुत कम नुकसान हुआ। यह इस बात का सबूत है कि शूटर को पता था कि उसे किसे निशाना बनाना है और वह हथियार चलाने में माहिर था।
कौन थे चंद्रनाथ रथ? वायु सेना के जवान से अधिकारी के ‘सारथी’ तक
चंद्रनाथ रथ की हत्या ने बीजेपी के भीतर एक बड़ा शून्य पैदा कर दिया है। रथ केवल एक निजी सहायक नहीं थे, बल्कि वह शुभेंदु अधिकारी की राजनीतिक मशीनरी के केंद्र में थे।
- सैन्य पृष्ठभूमि: राजनीति में आने से पहले चंद्रनाथ रथ ने भारतीय वायु सेना (IAF) में अपनी सेवाएं दी थीं। उनके भीतर का अनुशासन और रणनीतिक समझ उन्हें भीड़ से अलग बनाती थी।
- पर्दे के पीछे के रणनीतिकार: नंदीग्राम और भवानीपुर जैसे हाई-वोल्टेज चुनावी मुकाबलों में रथ ने लॉजिस्टिक्स, कैंपेन मैनेजमेंट और इंटरनल कम्युनिकेशन को बखूबी संभाला था। वह अधिकारी के उन चुनिंदा साथियों में से थे जिन्हें हर गुप्त जानकारी होती थी।
- विश्वसनीयता का दूसरा नाम: बीजेपी के भीतर उन्हें ‘परछाई’ माना जाता था। वह कभी सुर्खियों में नहीं आए, लेकिन अधिकारी के हर बड़े फैसले के पीछे उनकी प्रशासनिक सलाह शामिल होती थी।
- राजनीतिक उबाल: बीजेपी और टीएमसी के बीच तीखा वार-पलटवार
इस हत्या के बाद पश्चिम बंगाल का राजनीतिक तापमान सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
बीजेपी का आरोप:
शुभेंदु अधिकारी ने सीधे तौर पर इसे ‘पॉलिटिकल मर्डर’ करार दिया है। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से सुनियोजित ऑपरेशन था। दो-तीन दिनों तक रेकी की गई थी।” बीजेपी का आरोप है कि चुनाव नतीजों के बाद टीएमसी उनके कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बना रही है। कैबिनेट मंत्री सुकांत मजूमदार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और इसे राज्य प्रायोजित हिंसा का हिस्सा बताया है।
टीएमसी की प्रतिक्रिया:
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इस घटना की कड़ी निंदा की है, लेकिन साथ ही इसे बीजेपी की आपसी गुटबाजी का परिणाम बताने की कोशिश भी की है। टीएमसी ने मांग की है कि मामले की ‘अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच’ होनी चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी चुनाव के बाद हुई हिंसा में उनके भी तीन कार्यकर्ता मारे गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल और सीआईडी की चुनौती
मध्यमग्राम जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में, जहां पुलिस की मौजूदगी रहती है, वहां इस तरह की अत्याधुनिक हत्या कानून-व्यवस्था की पोल खोलती है। हमलावरों ने अपनी मोटरसाइकिलों से नंबर प्लेट हटा दी थी और सीसीटीवी से बचने के लिए हेलमेट का उपयोग नहीं किया था (या पहचान छिपाने के अन्य तरीके अपनाए थे)।
अब सीआईडी (CID) इस मामले की जांच कर रही है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती उन ‘सफेदपोश’ चेहरों को बेनकाब करना है जिन्होंने इस सुपारी किलिंग या राजनीतिक हत्या के आदेश दिए थे।
बंगाल में हिंसा का अंत कब?
चंद्रनाथ रथ की हत्या केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं है, बल्कि यह उस लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला है जहां मतभेद का जवाब गोलियों से दिया जा रहा है। एक पूर्व सैन्य कर्मी, जिसने देश की रक्षा की, उसे अपने ही राज्य में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता की भेंट चढ़ना पड़ा।
उत्तर 24 परगना में फिलहाल तनाव व्याप्त है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या बंगाल की राजनीति कभी इस ‘रक्तपात के दुष्चक्र’ से बाहर निकल पाएगी? चंद्रनाथ रथ की हत्या की गुत्थी सुलझना राज्य की न्याय व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा है।
