पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। यह हाल के हफ्तों में उनके खिलाफ दर्ज दूसरी आपराधिक शिकायत है, जिससे उनके चुनावी भाषणों को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।
यह मामला 9 मार्च को कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित मेट्रो चैनल में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम में दिए गए उनके भाषण से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उनके बयान से विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैल सकता है, सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
पुलिस के अनुसार, पहले यह शिकायत नेताजी नगर थाने में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज की गई थी। बाद में इसे हरे स्ट्रीट थाने भेज दिया गया क्योंकि भाषण उसी क्षेत्र में दिया गया था। पुलिस अब मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध वीडियो व अन्य सबूतों की जांच की जा रही है।
यह शिकायत नेताजी नगर निवासी और व्यवसायी तुषार कांती दास ने दर्ज कराई है। उनका कहना है कि ममता बनर्जी के भाषण से समाज में तनाव और सांप्रदायिक विवाद पैदा हो सकता है।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, ममता बनर्जी ने अपने भाषण में लोगों को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कथित “भ्रामक प्रचार” से सावधान रहने को कहा था, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस प्रचार की बात कर रही थीं। दास का आरोप है कि भाषण में ऐसा संकेत दिया गया कि अगर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी नहीं होती, तो एक समुदाय दूसरे समुदाय को नुकसान पहुंचा सकता था। उनके अनुसार, इस तरह का बयान दंगा भड़काने की क्षमता रखता है।
तुषार कांती दास ने यह भी कहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने यह शिकायत जनहित में दर्ज कराई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, एफआईआर में विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी फैलाने, आपराधिक धमकी देने और शांति भंग करने के इरादे जैसे आरोप शामिल किए गए हैं। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि भाषण से सार्वजनिक शांति, सांप्रदायिक सौहार्द या लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कोई प्रभाव पड़ा या नहीं।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में ममता बनर्जी के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज हुई थी। वह शिकायत भारत-बांग्लादेश संबंधों पर उनकी एक अलग टिप्पणी से जुड़ी थी और सिलिगुड़ी पुलिस आयुक्तालय में दर्ज की गई थी।
हालांकि संबंधित भाषण 9 मार्च को दिया गया था, लेकिन शिकायत 20 मई को दर्ज कराई गई और 7 जून को एफआईआर दर्ज होने के बाद इसे संबंधित थाने में भेज दिया गया। अब लगातार दो एफआईआर दर्ज होने से ममता बनर्जी की कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां बढ़ गई हैं।






























