ऑपरेशन सिंदूर 2.0: सेना प्रमुख ने भारत की अगली सैन्य रणनीति के दिए संकेत, भविष्य के संघर्षों के लिए तैयार हो रही हैं सशस्त्र सेनाएं

ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भारतीय सशस्त्र बल आवश्यकता पड़ने पर “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति केवल शत्रुता में अस्थायी विराम।

ऑपरेशन सिंदूर 2.0

ऑपरेशन सिंदूर 2.0

सेना प्रमुख General Upendra Dwivedi ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है और भारतीय सशस्त्र बल आवश्यकता पड़ने पर “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा स्थिति केवल शत्रुता में अस्थायी विराम (Temporary Cessation of Hostilities) है, इसलिए भारतीय सेना और तीनों सेनाएं उच्च स्तर की सैन्य तैयारी बनाए हुए हैं।

पुणे के खड़कवासला स्थित National Defence Academy (एनडीए) में 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड की समीक्षा के बाद जनरल द्विवेदी ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। फिलहाल शत्रुता में अस्थायी विराम है। यदि जरूरत पड़ी तो भारतीय सेना और तीनों सेनाएं ऑपरेशन सिंदूर 2.0 के लिए पूरी तरह तैयार हैं।”

यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद अपनाया गया भारत का सैन्य रुख अभी भी बरकरार है। साथ ही भारत केवल वर्तमान खतरों के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति को ध्यान में रखते हुए भी तैयारी कर रहा है।

पहलगाम हमले के बाद शुरू हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 22 अप्रैल 2025 को दक्षिण कश्मीर की बैसरन घाटी, पहलगाम के पास हुए आतंकी हमले के बाद की गई थी। इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 नागरिकों की हत्या कर दी थी।

इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ढांचे और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए व्यापक सैन्य कार्रवाई की थी।

जनरल द्विवेदी के अनुसार, इस अभियान ने यह स्थापित किया कि भारत उकसावे का जवाब किस प्रकार देता है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने सटीक हमलों (Precision Strikes), खुफिया जानकारी आधारित अभियानों और समन्वित सैन्य कार्रवाई की प्रभावशीलता को साबित किया।

भविष्य के युद्धों का नया मॉडल बना ऑपरेशन सिंदूर

सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि यह भारत के भविष्य के युद्ध संचालन मॉडल का उदाहरण है।

उन्होंने एनडीए से पास आउट होने वाले कैडेट्स को संबोधित करते हुए कहा कि आधुनिक खतरे केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्रों से नहीं आते। इसलिए भविष्य के सैन्य अधिकारियों को अधिक जटिल और असामान्य चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एकीकृत योजना, रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सटीक लक्ष्य भेदन और मजबूत वायु रक्षा प्रणाली के महत्व को उजागर किया। साथ ही सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल की अहमियत भी सामने आई।

जनरल द्विवेदी ने कहा, हम वर्तमान में तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और मजबूत करने तथा भविष्य के युद्धों के लिए खुद को तैयार करने पर काम कर रहे हैं।”

युद्ध अब जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं

सेना प्रमुख ने कहा कि भविष्य के संघर्ष केवल जमीन, समुद्र और आसमान तक सीमित नहीं रहेंगे। अब युद्ध साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और संज्ञानात्मक (Cognitive) क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।

उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक ने युद्धक्षेत्र को बेहद पारदर्शी बना दिया है, जहां दुश्मन आपकी गतिविधियों और तैनाती पर लगभग वास्तविक समय में नजर रख सकता है।

उन्होंने कहा, आज युद्धक्षेत्र इतना पारदर्शी हो गया है कि हर गतिविधि पर दूसरी तरफ की नजर रहती है।”

इसी वजह से सैन्य योजनाकारों को ऑपरेशनल सुरक्षा, सैनिकों की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों में नागरिकों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देना होगा।

सूचना युद्ध और राष्ट्रीय एकता का बढ़ता महत्व

जनरल द्विवेदी ने सूचना युद्ध (Information Warfare) के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, आधुनिक युद्धों में जनता का विश्वास और राष्ट्रीय एकता भी रणनीतिक हथियार बन चुके हैं।

उन्होंने कहा, सूचना युद्ध तभी सफल होता है जब पूरा देश एकजुट होकर सूचना देने वाली संस्थाओं पर भरोसा करे। जिस राष्ट्र के नागरिक और संस्थाएं एक-दूसरे पर भरोसा करते हैं, वह युद्ध में हमेशा जीतता है।”

AI और ड्रोन बदलेंगे भविष्य का युद्ध

अपने संबोधन में सेना प्रमुख ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को भविष्य के युद्धों का सबसे बड़ा शक्ति-वर्धक (Force Multiplier) बताया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्धों में निर्णय लेने की गति बहुत तेज हो गई है। ऐसे में कमांडरों को भारी मात्रा में सूचनाओं का तेजी से विश्लेषण करना पड़ता है।

जनरल द्विवेदी ने कहा, “जब युद्ध की गति बहुत तेज हो, तब बेहतर और तेज निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त तकनीकी सहायता की जरूरत होती है।

उन्होंने बताया कि AI आधारित सिस्टम और उन्नत भाषा मॉडल कमांडरों को सूचनाओं का विश्लेषण करने, संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और तेजी से निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा उन्होंने ड्रोन तकनीक के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि आक्रामक तथा रक्षात्मक दोनों प्रकार की ड्रोन क्षमताएं भविष्य के युद्धक्षेत्र की दिशा तय करेंगी।

थिएटर कमांड सुधारों पर भी बोले सेना प्रमुख

जनरल द्विवेदी ने लंबे समय से चर्चा में रहे थिएटर कमांड सुधारों पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के स्तर पर चर्चा पूरी हो चुकी है और प्रस्ताव रक्षा मंत्री को सौंप दिया गया है, जिस पर विचार चल रहा है।

उन्होंने कहा, थिएटराइजेशन सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और मुझे विश्वास है कि आने वाले दो से तीन वर्षों में इसके ठोस परिणाम दिखाई देंगे।”

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सेवा प्रमुख बलों की तैयारी और संसाधनों पर ध्यान देंगे, जबकि थिएटर कमांडर संयुक्त सैन्य अभियानों का संचालन करेंगे।

एनडीए में ऐतिहासिक समारोह

यह महत्वपूर्ण संदेश एनडीए के 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के दौरान दिया गया। इस अवसर पर कुल 353 कैडेट्स ने स्नातक होकर भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने की तैयारी पूरी की।

इनमें से 236 कैडेट्स को Jawaharlal Nehru University से डिग्रियां प्रदान की गईं। स्नातक बैच में 18 महिला कैडेट्स भी शामिल थीं।

जनरल द्विवेदी, जो स्वयं एनडीए के 65वें कोर्स के पूर्व कैडेट रह चुके हैं, ने युवा अधिकारियों से पेशेवर उत्कृष्टता, नेतृत्व और एनडीए के आदर्श वाक्य सेवा परमो धर्मः” का पालन करने का आह्वान किया।

उन्होंने महिला कैडेट्स की भी सराहना करते हुए कहा कि साहस, दृढ़ संकल्प और सैन्य उत्कृष्टता का किसी लिंग से संबंध नहीं होता।

समारोह में पूर्व Kiran Bedi मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम का समापन Su-30 MKI लड़ाकू विमानों, चेतक हेलिकॉप्टरों, सारंग हेलिकॉप्टर एरोबैटिक्स टीम और आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम के शानदार फ्लाईपास्ट के साथ हुआ।

सेना प्रमुख के बयान से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि भारत वर्तमान शांति को स्थायी नहीं मान रहा है और भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने के लिए सैन्य, तकनीकी और रणनीतिक स्तर पर लगातार अपनी तैयारियां मजबूत कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर अब केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि भारत की नई युद्ध रणनीति की आधारशिला के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है।

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